गुरदीप सिंह/कोरबा –
कुसमुंडा क्षेत्र से लेकर गेवरा बस्ती और धर्मपुर इलाके तक लाल ईंट भट्टों का अवैध कारोबार तेजी से फैलता जा रहा है। स्थानीय स्तर पर बिना अनुमति और नियमों की अनदेखी करते हुए कई जगहों पर ईंट भट्टे संचालित किए जा रहे हैं, जिससे लाखों रुपये के खनिज राजस्व की हानि हो रही है।
पर्यावरण पर गंभीर असर
ईंट भट्टों में कोयला और अन्य सामग्री जलाने से निकलने वाला धुआं लगातार वायु प्रदूषण बढ़ा रहा है। इसके अलावा मिट्टी की खुदाई से बड़े-बड़े गड्ढे बन गए हैं, जिससे जमीन की संरचना भी प्रभावित हो रही है।
जंगल और संसाधनों का नुकसान
ईंट पकाने के लिए जंगलों की लकड़ियों का उपयोग किए जाने की भी जानकारी सामने आ रही है। साथ ही धान के भूसे को जलाने से आसपास के क्षेत्रों में प्रदूषण का स्तर और बढ़ रहा है।
नियमों की अनदेखी
उच्च न्यायालय द्वारा लाल ईंट के व्यावसायिक निर्माण पर प्रतिबंध लगाया गया है। राज्य शासन ने भी निर्देश जारी किए हैं कि अवैध ईंट निर्माण पर कार्रवाई की जाए, लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति इसके विपरीत दिखाई दे रही है।
बिना रोक-टोक जारी कारोबार
कुसमुंडा, गेवरा बस्ती और धर्मपुर क्षेत्र के आसपास लगभग 6–7 किलोमीटर के दायरे में कई जगहों पर धड़ल्ले से ईंट भट्टों का संचालन जारी है। प्रशासनिक निगरानी की कमी के चलते यह कारोबार लगातार बढ़ता जा रहा है।
प्रशासन का पक्ष
जिला खनिज विभाग के अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि बिना अनुमति ईंट निर्माण प्रतिबंधित है और शासकीय कार्यों में इनके उपयोग पर भी रोक है। अधिकारियों ने कहा है कि यदि किसी ठेकेदार द्वारा अवैध ईंटों का उपयोग किया जाता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। वहीं जिला प्रशासन ने भी जांच और कार्रवाई की बात कही है।और बढ़ सकता है।








