हारून रशीद/किरंदुल। विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर जहाँ आमतौर पर मंच, भाषण और मीडिया की चहल-पहल देखने को मिलती है, वहीं इस बार किरंदुल में एक अनोखा और शांत आयोजन चर्चा का विषय बन गया।
बिना मंच, बिना माइक… फिर भी प्रभावशाली आयोजन
शहर के Zayka Restaurant, Kirandul में 4 मई की शाम एक घंटे के लिए नियमित कामकाज रोक दिया गया। इस दौरान करीब 15 स्थानीय पत्रकारों को आमंत्रित किया गया, लेकिन यहाँ उन्हें भोजन नहीं, बल्कि एक संवेदनात्मक अनुभव दिया गया।
प्रतीकों के जरिए पत्रकारिता की हकीकत
कार्यक्रम की शुरुआत सादगी भरे माहौल में हुई, लेकिन जल्द ही प्रतीकात्मक प्रस्तुतियों ने माहौल को गंभीर बना दिया।
- काली प्लेट: पत्रकारों के सामने खाली काली प्लेटें रखी गईं, जिसके साथ संदेश दिया गया—
“ये उस खबर की प्लेट है… जो हर बार परोसी नहीं जा पाती।”
इस प्रस्तुति ने पत्रकारों पर पड़ने वाले दबाव और समझौतों की ओर संकेत किया। - आईना: हर टेबल पर रखा गया छोटा आईना मानो एक आत्ममंथन का माध्यम बन गया।
“समाज को आईना दिखाते-दिखाते, शायद खुद को देखने का समय नहीं बचता…” - खाली कॉलम: “आज की सबसे बड़ी खबर” शीर्षक वाली एक कोरी शीट उन खबरों का प्रतीक बनी, जो कभी प्रकाशित नहीं हो पातीं।
अनोखा “बिल” और संदेश
कार्यक्रम के अंत में पत्रकारों को एक प्रतीकात्मक बिल दिया गया, जिसमें लिखा था—
“यह बिल पैसे से नहीं… आपके एक सच्चे वाक्य से क्लियर होगा।”
विदाई के समय एक लिफाफा भी दिया गया, जिसमें खाली पन्ने पर लिखा था—
“कुछ सच… अभी भी लिखे जाने बाकी हैं।”
आयोजक की प्रतिक्रिया
इस पहल के आयोजक हारून रशीद ने कहा कि यह आयोजन पत्रकारों के संघर्ष और उनके योगदान को सम्मान देने का एक छोटा प्रयास था। उन्होंने इसे “कृतज्ञता” का प्रतीक बताते हुए कहा कि पत्रकारों का सच किसी भी मिठास से अधिक गहरा होता है।
डिजिटल युग में अलग पहल
आज के दौर में जहाँ अधिकांश आयोजन प्रचार और सोशल मीडिया पर केंद्रित होते हैं, वहीं किरंदुल का यह कार्यक्रम बिना किसी प्रचार-प्रसार के आयोजित किया गया।








