आरंग संवाददाता – सोमन साहू
राजिम-नवापारा – त्रिवेणी संगम साहित्य समिति राजिम नवापारा जिला गरियाबंद(छ. ग. ) पं. क्र.25298 के द्वारा पर्यावरण एवम जल संरक्षण पर केंद्रित साहित्यिक संगोष्ठी का आयोजन,पथर्रा नवाडीह (राजिम)स्थित त्रिवेणी संगम साहित्य सदन में किया गया|कार्यक्रम की अध्यक्षता श्रवण कुमार साहू,”प्रखर ” शिक्षक साहित्यकार एवम उपाध्यक्ष समरस साहित्य संस्थान छत्तीसगढ़ इकाई “ने किया इस अवसर पर उपस्थित साहित्यकारों ने भीषण गर्मी में पर्यावरण एवम जल संरक्षण के साथ साथ पक्षियों के लिए दाना पानी अपने छतों में रखने हेतु आम नागरिकों से अपील की है|
काव्य गोष्ठी की शुरुवात अतिथियों के द्वारा माँ शारदे की पूजा अर्चना के साथ हुआ कवि भारत साहू प्रभु ने माँ शारदे की भावभरी वंदना प्रस्तुति दी|देशभक्ति के जज्बा को आगे बढ़ाते हुए नरेंद्र साहू ” पार्थ ” ने भारत की प्राचीन ऋषि मुनियों की समृद्ध विरासत पर रचना पढ़ते हुए कहा कि”
भारत ने दुनिया को पहले ज्ञान विज्ञान दिया|

प्राचीन भारतीय मनीषियों ने विकास में योगदान दिया||
काव्य पाठ के अगले कड़ी में मीडिया प्रभारी एवम कवि छग्गु यास “अडिल”ने श्रृंगार रस पर लाजवाब रचना पढ़ते हुए कहा —
तोर रुमुक झूमुक पैरी के धुन ह रे बइरी,
मन ल वो मोर मोहि डारे |
का जादू चला के वो गोरी
अंतस म जगा ल बनाए ,,प्रस्तुत कर खूब वाह वाही लूटी|
कवि किशोर निर्मलकर ने पर्यावरण पर लाजवाब रचना करते हुए कहा–
आमा अमली,नीम के छइंहा, अब तो घलो नंदागे|
चाकर सड़क बनाए के खातिर, एकर जड़ कटागे||
पढ़कर लोगों को सोचने पर मजबूर किया|
इसके पश्चात अध्यक्ष मकसुदन साहू,”बरीवाला” ने गांव का सजीव चित्रण करते हुए कहा कि,
महर-महर महकत हे मोर गाँव के खोर|
जगा-जगा बगरे, डीही डोंगर के शोर||खूब वाहवाही लूटी|
कार्यक्रम में कवि रोहित साहू,”माधुर्य में इस भयानक गर्मी में पंछियो के लिए सकोरा और दाना पानी देने की बात कहते हुए कहा कि–
प्यारे कर लो ऐसा काम,जगत में ऊँचा हो तेरा नाम|
वो कहती चिड़िया रानी, मेरी भोली सयानी||
बिन मौसम बरसात पर लाजवाब रचने पढ़ते हुए युवा कवि तुषार शर्मा” नादान” ने कहा कि,
बिन मौसम बरसात,आफत की है बात|
धड़कन होती बैचेन,उमड़ते है जज्बात||
इसी कड़ी मे कवि भारत लाल साहू ” प्रभु “ने विरह वेदना पर शानदार कविता पढ़ते हुए कहा कि,
गुने ल भईगे संगी,गुने ल भईगे न|
होगे अधरतिहा, गुने ल भईगे न||
मौसम के अचानक बदलाव पर बात रखते हुए डॉ रमेश सोनसायटी ने ताबड़तोड़ रचना करते हुए कहा कि, “अकरस पानी अलकरहा गिरगे,परछी अंगना,गली मोहल्ला,,, पढ़कर खूब वाहवाही लूटी|
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए श्रवण कुमार साहू, “प्रखर” ने सभा को संबोधित करते हुए कलमकारों को हर परिस्थितियों में कलम के माध्यम से समाज जागरण हेतु प्रेरित करते हुए कहा कि–
यदि कवि हो तो,कवि कर्म करो|
सच लिखने में, न शर्म करो|
समाज को आपसे अपेक्षा है,
हे ! साधक नित लेखन धर्म करो||
इस अवसर पर अनेक श्रोताओं ने काव्य पाठ का आनंद लिया|








