अर्जुन झा/दुर्ग। कृषि के क्षेत्र में केवल डिग्री नहीं, बल्कि व्यावहारिक अनुभव ही भविष्य की राह तय करता है। इसी उद्देश्य से छत्तीसगढ़ कृषि महाविद्यालय दुर्ग भिलाई की बीएससी कृषि छात्रा कुसुमश्री रेड्डी ने अपने शैक्षणिक मॉड्यूल के तहत भिलाई-3 के पास औरी गांव स्थित आधुनिक पोल्ट्री फार्म का विस्तृत अध्ययन किया।
इस विज़िट का मुख्य उद्देश्य यह समझना था कि कैसे पारंपरिक खेती से हटकर तकनीक के माध्यम से एक सफल ‘बिजनेस सिस्टम’ खड़ा किया जा सकता है।अध्ययन के दौरान यह बात सामने आई कि युवा उद्यमी प्रसंग चंद्राकर ने अपने फार्म को एक प्रोफेशनल सिस्टम के रूप में विकसित किया है। उन्होंने पुणे से प्राप्त पोल्ट्री डिप्लोमा के ज्ञान को जमीन पर उतारते हुए यहां एनवायरमेंट कंट्रोल हाउस स्थापित किया है। छात्रों के लिए यह देखना दिलचस्प था कि कैसे ऑटोमेशन के जरिए तापमान और आर्द्रता को नियंत्रित कर पक्षियों की मृत्यु दर को न्यूनतम किया जा सकता है और उत्पादन बढ़ाया जा सकता है।

सेल्फ-सस्टेनेबल मॉडल पर जोर
छात्रों ने सीखा कि बिजनेस में लागत कम करने के लिए स्वयं का प्रबंधन कितना जरूरी है। फार्म में मक्का और सोयाबीन आधारित संतुलित फीड (दाना) खुद तैयार किया जाता है, जिससे लागत पर नियंत्रण रहता है। साथ ही बायो सिक्योरिटी और नियमित टीकाकरण के जिस सख्त सिस्टम को यहां अपनाया गया है, वह कृषि के छात्रों के लिए एक बेहतरीन व्यावहारिक सबक है।
मार्केट लिंकेज और भविष्य की संभावनाएं
इस केस स्टडी के माध्यम से यह संदेश देने का प्रयास किया गया है कि सही प्रबंधन और मार्केट लिंकेज के साथ पोल्ट्री फार्मिंग को एक लाभकारी उद्योग बनाया जा सकता है। कॉलेज प्रशासन और छात्रों के अनुसार, स्थानीय स्तर पर मौजूद ऐसे आधुनिक फार्मिंग सिस्टम भविष्य के कृषि स्नातकों के लिए किसी प्रयोगशाला से कम नहीं हैं।








