अर्जुन झा/बालोद/दल्लीराजहरा :- राष्ट्रभक्त प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी को ‘गद्दार’ कहने वाले राहुल गांधी पहले अपने परिवार का देशविरोधी और गद्दारी से भरा इतिहास देखें। आपातकाल लगाने वाले, देश का विभाजन कराने वाले और सिखों का कत्लेआम करने वाले गांधी परिवार का असली चेहरा बेनकाब हो चुका है। मानसिक रोगी राहुल गांधी द्वारा देश के यशस्वी प्रधानमंत्री आदरणीय श्री नरेंद्र मोदी जी और केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह जी के खिलाफ रायबरेली की जनसभा में इस्तेमाल की गई देशद्रोही और अत्यंत ओछी भाषा पर भारतीय जनता पार्टी पिछड़ा वर्ग मोर्चा, जिला-बालोद ने ज्वालामुखी की तरह उग्र और तीखा आक्रोश व्यक्त किया है। भाजपा पिछड़ा वर्ग मोर्चा के जिला अध्यक्ष श्री श्याम जायसवाल ने राहुल गांधी के इस बयान पर सीधा प्रहार करते हुए कहा कि लगातार मिल रही करारी राजनैतिक शिकस्त और जनता द्वारा बार-बार नकारे जाने के बाद राहुल गांधी पूरी तरह मानसिक संतुलन खो चुके हैं। वे विदेशी ताकतों के इशारे पर भारत में अराजकता और गृहयुद्ध जैसी स्थिति पैदा करने की गहरी साजिश रच रहे हैं, जिसे देश की जनता कभी बर्दाश्त नहीं करेगी।
गद्दारी और देशविरोधी फैसलों का असली डीएनए गांधी परिवार में है: श्याम जायसवाल ने आगे अपने बेहद तल्ख और आक्रोशित बयान में राहुल गांधी को उनके परिवार का आईना दिखाते हुए कहा, दुनिया के सबसे लोकप्रिय नेता, परम देशभक्त और देश के करोड़ों पिछड़ों, शोषितों, वंचितों के मसीहा आदरणीय नरेंद्र मोदी जी को ‘गद्दार’ कहने की जुर्रत करने वाले राहुल गांधी शायद भूल गए हैं कि गद्दारी का असली इतिहास इनके गांधी परिवार का रहा है। देश को गद्दारी और देशविरोधी फैसलों की दलदल में धकेलने का एक लंबा इतिहास खुद गांधी परिवार का है।”श्री जायसवाल ने गांधी परिवार के काले इतिहास पर कड़ा हमला बोलते हुए निम्नलिखित मुख्य बिंदुओं का उल्लेख किया:
देश का विभाजन और जमीन दान में देना: सत्ता की भूख में देश का विभाजन स्वीकार करना, नेहरू जी के कार्यकाल में भारत की हजारों वर्ग किलोमीटर जमीन चीन को सौंप देना और कश्मीर की समस्या को दशकों तक उलझाए रखना इसी गांधी परिवार की देन है।
लोकतंत्र की हत्या (आपातकाल 1975): आज संविधान की झूठी दुहाई देने वाले राहुल गांधी की दादी इंदिरा गांधी ने अपनी कुर्सी बचाने के लिए पूरे देश को जेलखाना बना दिया था, लाखों बेगुनाहों को जेल में ठंसा और देश के लोकतंत्र की क्रूरता से हत्या की। क्या यह देश के साथ गद्दारी नहीं थी?
सिखों का क्रूर नरसंहार (1984): दिल्ली की सड़कों पर हजारों निर्दोष सिखों का कत्लेआम कराया गया और तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने यह कहकर उस नरसंहार को जायज ठहराया था कि ‘जब बड़ा पेड़ गिरता है तो धरती हिलती है’।
सैनिकों के शौर्य पर सवाल और विदेशी ताकतों से सांठगांठ: चीन के दूतावास से गुपचुप तरीके से पैसे लेना, सर्जिकल स्ट्राइक पर हमारी जांबाज सेना से सबूत मांगना और विदेशी धरती पर जाकर भारत विरोधी ताकतों के साथ मिलकर देश को बदनाम करना राहुल गांधी की आदतों में शुमार है।
एक पिछड़े समाज से आने वाले प्रधानमंत्री का अपमान अब बर्दाश्त से बाहर श्याम जायसवाल ने दो टूक शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा कि नरेंद्र मोदी जी देश की अस्मिता, अखंडता और 140 करोड़ भारतीयों के स्वाभिमान के प्रतीक हैं। एक अत्यंत पिछड़े परिवार से निकलकर देश को विश्व गुरु बनाने की राह पर ले जाने वाले प्रधानमंत्री के खिलाफ ऐसी अमर्यादित और देशद्रोही भाषा का प्रयोग पूरे अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) समाज का घोर अपमान है। पिछड़ा वर्ग समाज अब इस अपमान को चुपचाप बर्दाश्त नहीं करेगा और कांग्रेस को इसकी भारी राजनैतिक कीमत चुकानी होगी। और इस इस मानसिक रोगी राहुल गांधी का इलाज जल्द जनता करेगी।








