बलरामपुर संवाददाता युसूफखान
50 वर्षों के लिए स्वीकृत खनन परियोजना में सड़क निर्माण शुरू, प्रभावित किसान अब भी क्षतिपूर्ति की प्रतीक्षा में
कुसमी
बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के कुसमी विकासखंड अंतर्गत ग्राम जमीरापाट में प्रस्तावित बॉक्साइट खदान परियोजना को लेकर एक बड़ा प्रशासनिक मामला सामने आया है। परियोजना से प्रभावित किसानों की फसल क्षति के एवज में 12 करोड़ 06 लाख 57 हजार 45 रुपये की राशि शासन के खाते में जमा होने के बावजूद अधिकांश किसानों को अब तक मुआवजा नहीं मिल सका है। वहीं दूसरी ओर खदान क्षेत्र तक पहुंच मार्ग निर्माण का कार्य भी शुरू हो गया है, जिससे ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ रही है।

50 वर्षों के लिए स्वीकृत खनन पट्टा
जानकारी के अनुसार छत्तीसगढ़ शासन के खनिज साधन विभाग ने ग्राम जमीरापाट स्थित 114.009 हेक्टेयर क्षेत्र में बॉक्साइट खनन हेतु छत्तीसगढ़ मिनरल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड (सीएमडीसी) को 50 वर्षों के लिए खनिज पट्टा स्वीकृत किया है। इस संबंध में अनुबंध 15 मार्च 2024 को निष्पादित किया गया था।
फसल क्षति का सर्वे, 12 करोड़ से अधिक मुआवजा निर्धारित
खनन क्षेत्र में आने वाली निजी भूमि एवं फसलों के नुकसान का आकलन कराने के लिए सीएमडीसी ने 15 जून 2022 को कलेक्टर बलरामपुर-रामानुजगंज को पत्र भेजा था। इसके बाद प्रशासन ने प्रभावित किसानों की भूमि और फसलों का सर्वे कराया। मूल्यांकन के बाद 12.06 करोड़ रुपये की क्षतिपूर्ति राशि निर्धारित की गई और 26 सितंबर 2024 को सीएमडीसी को डिमांड नोट जारी किया गया।

नवंबर 2025 में राशि जमा, किसानों को अब तक इंतजार
सूत्रों के अनुसार सीएमडीसी ने निर्धारित पूरी राशि 3 नवंबर 2025 को कलेक्टर एवं भू-अर्जन अधिकारी के खाते में जमा कर दी थी। इसके बाद भुगतान प्रक्रिया के लिए मामला अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) कुसमी को भेजा गया, लेकिन सात माह बीत जाने के बाद भी अधिकांश किसानों को भुगतान नहीं मिला है।
फौती नामांतरण बना बाधा
बताया जा रहा है कि खनिज लीज क्षेत्र के 87 खसरों में कई मामलों में फौती नामांतरण की प्रक्रिया लंबित होने के कारण भुगतान अटका हुआ है। जमीरापाट के हल्का पटवारी देवलाल एक्का ने भी नामांतरण प्रक्रिया पूर्ण नहीं होने की पुष्टि की है। राजस्व अभिलेखों में सुधार और उत्तराधिकार संबंधी प्रक्रियाओं के चलते भुगतान में देरी बताई जा रही है।
सड़क निर्माण शुरू, ग्रामीणों का विरोध
कलेक्टर द्वारा 23 मार्च 2026 को भू-प्रवेश की अनुमति जारी किए जाने के बाद खदान क्षेत्र तक पहुंच मार्ग निर्माण का कार्य प्रारंभ कर दिया गया है। खनन कार्य का ठेका लेने वाली तेजस कार्गो इंडिया लिमिटेड, फरीदाबाद ने 28 मई 2026 को भूमि पूजन के साथ सड़क निर्माण शुरू किया। इसकी जानकारी मिलने पर ग्रामीणों ने विरोध जताया। ग्रामीणों का कहना है कि मुआवजा वितरण से पहले परियोजना कार्यों को आगे बढ़ाना उचित नहीं है।

ग्रामीणों ने उठाए सवाल
प्रभावित किसानों और ग्रामीणों का कहना है कि जब मुआवजा राशि पहले ही जमा हो चुकी है तो किसानों को भुगतान में देरी क्यों हो रही है। उनका आरोप है कि किसानों को राहत दिए बिना खदान और सड़क निर्माण कार्यों को आगे बढ़ाया जा रहा है। ग्रामीणों ने प्रशासन से पहले मुआवजा वितरण सुनिश्चित करने की मांग की है।
प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल
नवंबर 2025 में राशि जमा होने के बावजूद किसानों को भुगतान नहीं मिलने से प्रशासनिक प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं। आदिवासी बहुल इस क्षेत्र में भूमि और प्राकृतिक संसाधन ग्रामीणों की आजीविका का प्रमुख आधार हैं। ऐसे में मुआवजा वितरण में हो रही देरी से जनाक्रोश बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
क्या बोले सीएमडीसी महाप्रबंधक
सीएमडीसी नया रायपुर के महाप्रबंधक उपेंद्र कुमार पांडे ने कहा कि जमीरापाट बॉक्साइट खदान प्रारंभ करने का आदेश जारी हो चुका है। उनके अनुसार परियोजना शुरू होने से क्षेत्र में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे तथा विकास को गति मिलेगी। हालांकि प्रभावित किसानों की निगाहें अब भी प्रशासन पर टिकी हैं और वे शीघ्र मुआवजा वितरण की मांग कर रहे हैं








