रायपुर संवाददाता – रघुराज
रायपुर, खमतराई: राजधानी के खमतराई थाना क्षेत्र के अंतर्गत श्रीनगर चौक, स्यान सदन के सामने बाल शोषण और कानून के उल्लंघन का एक बेहद संवेदनशील मामला प्रकाश में आया है। यहां एक स्थानीय फल विक्रेता (गुप्ता फल वाला) द्वारा एक मूक-बधिर और मानसिक रूप से अस्वस्थ बच्चे को बंधुआ मजदूर की तरह इस्तेमाल करने का आरोप लगा है।
स्थानीय प्रत्यक्षदर्शियों और सजग नागरिकों से मिली जानकारी के अनुसार, उक्त फल विक्रेता इस बेसहारा बच्चे की कमजोरी और लाचारी का सीधा फायदा उठा रहा है। बच्चे से सुबह से लेकर देर रात तक दुकान का सारा भारी काम, साफ-सफाई और सामान ढोने का काम करवाया जाता है। इसके एवज में उसे कोई नकद पारिश्रमिक या मजदूरी नहीं दी जाती, बल्कि सिर्फ एक वक्त की चाय और थोड़ा सा नाश्ता देकर टरका दिया जाता है।
शारीरिक और मानसिक रूप से अत्यंत कमजोर है बच्चा
आस-पास के दुकानदारों और राहगीरों का कहना है कि यह बच्चा आर्थिक रूप से पूरी तरह विपन्न है और दिमागी तथा शारीरिक रूप से भी बेहद कमजोर है। वह अपनी बात ठीक से रखने या विरोध करने की स्थिति में भी नहीं है। इस तरह एक विशेष आवश्यकता वाले बच्चे (CWSN) से इस कदर कड़ा श्रम कराना न सिर्फ बाल श्रम निषेध कानून का खुला उल्लंघन है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं को भी तार-तार करता है।
स्थानीय प्रशासन और श्रम विभाग से हस्तक्षेप की मांग
इस घटना को लेकर स्थानीय प्रबुद्ध नागरिकों में गहरा रोष है। लोगों का कहना है कि रायपुर जैसे विकसित शहर के रिहायशी इलाके में इस प्रकार का शोषण प्रशासन की मुस्तैदी पर सवाल खड़े करता है। सजग नागरिकों ने मांग की है कि:
* जिला श्रम विभाग और बाल कल्याण समिति (CWC) तुरंत इस स्थान पर छापेमारी करे।
* बच्चे को इस अमानवीय माहौल से तुरंत रेस्क्यू (मुक्त) कराकर किसी सुरक्षित बाल गृह या सुधार गृह भेजा जाए, जहां उसे उचित चिकित्सा और मानसिक सहयोग मिल सके।
* बाल श्रम (निषेध और विनियमन) अधिनियम के तहत आरोपी फल विक्रेता के खिलाफ तत्काल एफआईआर (FIR) दर्ज कर दंडात्मक कार्रवाई की जाए।
इस तरह के मामलों में समाज और प्रशासन दोनों को मिलकर आगे आना होगा ताकि किसी भी मासूम का बचपन और भविष्य इस तरह अंधकारमय न हो।








