Home चर्चा में गोवाबंद पहरिया में श्रद्धापूर्वक मनाई गई भगवान बिरसा मुंडा की पुण्यतिथि

गोवाबंद पहरिया में श्रद्धापूर्वक मनाई गई भगवान बिरसा मुंडा की पुण्यतिथि

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संवाददाता – राजेन्द्र जायसवाल

जिला जांजगीर-चांपा , 9 जून 2026। आदिवासी समाज के महानायक, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी एवं “धरती आबा” भगवान बिरसा मुंडा की पुण्यतिथि ग्राम गोवाबंद पहरिया में श्रद्धा एवं सम्मान के साथ मनाई गई। कार्यक्रम का आयोजन धनराज सिदार के निवास के सामने आदिवासी कांग्रेस की जिलाध्यक्ष श्रीमती अजय शशि जगत के नेतृत्व में किया गया।
कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ शासन के पूर्व उप मुख्यमंत्री टी.एस. सिंहदेव मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे, जबकि अध्यक्षता अकलतरा विधायक राघवेंद्र कुमार सिंह ने की। अतिथियों ने भगवान बिरसा मुंडा के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर उनके बलिदान, संघर्ष और देश के प्रति योगदान को याद किया।

इस अवसर पर टी.एस. सिंहदेव ने आदिवासी समाज के लोगों से भेंट-मुलाकात कर उनकी समस्याओं और आवश्यकताओं की जानकारी ली तथा उनके समाधान के लिए हरसंभव प्रयास करने का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि भगवान बिरसा मुंडा का जीवन जल, जंगल और जमीन की रक्षा, सामाजिक न्याय तथा स्वाभिमान की प्रेरणा देता है।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जिलाध्यक्ष श्रीमती अजय शशि जगत ने बिरसा मुंडा के प्रसिद्ध संदेश “अबूआ राज एते जाना, महारानी राज तुन्दु जाना” तथा “अबुआ दिशुम- अबुआ राज” का वाचन किया। उन्होंने कहा कि बिरसा मुंडा का संदेश आदिवासी अस्मिता, स्वशासन, प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा और शोषण के विरुद्ध संघर्ष का प्रतीक है। उन्होंने समाज को अपनी संस्कृति, परंपरा और मूल्यों को संरक्षित रखने का आह्वान किया।

कार्यक्रम में सामाजिक सियान कमल सिंह मरावी, विजय मरावी, महेत्तर सिंह, पुनेमाचार्य देवनारायण सिंह, टुकेश्वर सिंह, परमेश्वर सिंह जगत, राहुल मरावी, शिव सिंह जगत, सुदर्शन जगत, जीवन लाल भारती, बनवासी बिंझवार, गजानंद बिंझवार, हरेन्द्र बिंझवार सहित अनेक समाज प्रमुख उपस्थित रहे।
इसके अलावा कन्हैया राठौर (पूर्व अध्यक्ष जनपद पंचायत बलौदा), सदन यादव (ब्लॉक अध्यक्ष), दिलीप सिंह, उर्मिला गोंड, दुर्गा रजक, नवल सिंह, मितेश शुक्ल, सिद्धांत सिंह जगत, निर्मल बिंझवार, गिरजा, कृष्णा केवट, उत्तम पाटले, नरेंद्र साहू, पंचराम सहित बड़ी संख्या में ग्रामीणजन एवं समाज के लोग कार्यक्रम में शामिल हुए।
कार्यक्रम के अंत में भगवान बिरसा मुंडा के बताए मार्ग पर चलने तथा समाज की एकता, अधिकारों और सांस्कृतिक विरासत की रक्षा का संकल्प लिया गया। पूरे आयोजन में श्रद्धा, उत्साह और सामाजिक एकजुटता का वातावरण देखने को मिला।

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