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शख्सियत…. आज 15 जून 57 वाँ जन्म दिवस पर विशेष – दिव्यांग बच्चों की जीवन गढ़ रहीं सामाजिक कार्यकर्ता हिरा देवी निराला …

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हर इंसान चाहता है कि उसे मजबूत कहा जाए। आज युवा वर्ग कश्मकश भरे ज़िंदगी से कहीं न कहीं जूझ रहा है । महंगी शिक्षा और जीवन के संघर्ष के पलों ने युवा मन को सामाजिक संबंधों से दूर भी किया है । जिनके भीतर ज़िंदगी के तमाचे झेलने के बाद भी मुस्कुराने की जगह बची रही ।टूटना असाधारण बात नहीं है ।  अपने  ही  भीतर की विफलता से ,कभी अपनों की बेरुखी से और कभी उस चुप्पी से जो भीतर रिसती रहती है ,बिना आवाज के । टूटना और बिखरना जीवन का अंत नहीं है ।कभी कभी यह जीवन के नए अध्याय की भूमिका बनता है । महज 37 वर्ष की आयु में ही श्रीमती हिरा देवी निराला ने जीवन के संघर्ष को महसूस किया और उनके जिंदगी में एक बड़े बदलाव के रूप में एक मुस्कान भर दी । उनके ज़िंदगी के सफर में बहुत सारे उतार चढ़ाव आए पर हंसकर स्वीकार कर लिए ।आज वे अपने जीवन के 20 वर्ष  उन दिव्यांग बच्चों को संवारने में गुजार दी उन्हें धूप छांव का अहसास ही नहीं हुआ।
 “छत्तीसगढ़ महिला गौरव अवार्ड से सम्मानित हीरा देवी निराला डॉ ए पी जे अब्दुल कलाम राष्ट्रीय उत्कृष्टता सम्मान  और डॉ भीमराव अंबेडकर विरासत सम्मान से  सम्मानित हैं “
रायपुर  ।  धार्मिक सांस्कृतिक मान्यताओं के आधार पर समाज में प्रथम पूज्य के रूप में श्रीगणेश जी को पूजे जाते हैं ।परिवार और समाज में अग्रणीय सबसे जिसका ऊंचा दर्जा होती है वह माँ की होती है । माँ शब्द संसार की वो सबसे बड़ी शब्द होती है जो जीवन का पालनहार होती है माँ की तपस्या को शब्दों से बयां कर पाना संभव नहीं है माँ वह भाषा है जिसे छोटा बच्चा दूध पीते हुए आंचल में छुपकर बड़ा होता है और अपना जीवन उसके मातृ छाया में पनपता है। माँ वह अबुझ पहली है जो जीवन को संवारती है स्वच्छ समाज गढ़ती है ।
माँ सृजन की पाठशाला है वह खुद तपकर -त्याग और समर्पण से समाज को  गढ़ती है।
शिक्षाविद् सामाजिक कार्यकर्ता श्रीमती हीरा देवी निराला की जीवन कशमकश भरी राहों से गुजरते हुए समाज को नई सीख देती है जो समाज के लिए एक बड़ा उदाहरण है । हीरा देवी बचपन से ही होनहार विद्यार्थी रही समाज के प्रति उसका लगाव रहा ।
आज उन्हें समाज की सशक्त प्रहरी एवं युवाओं के प्रेरणा स्त्रोत के रूप में लोग अब जानने लगे हैं उन्होंने अपने सामाजिक कार्यों से सारंगढ़ – बिलाईगढ़ जिला का नाम गौरवान्वित कर समाज को नई संदेश दे रहे हैं । उनका जन्म 15जून 1969को हुआ वे सामाजिक विज्ञान में एम ए हैं। सारंगढ़ जिला मुख्यालय में  प्रांजल विशेष स्कूल दिव्यांगजन स्कूल संचालित करते हैं ।इस स्कूल की स्थापना 2006में हुई पिछले 20 वर्षों से ऐसे बच्चों की सेवा कर रहे हैं जो समाज से सीधा सीधा टूटे हुए होते हैं जो सुन नहीं सकते बोल नहीं सकते और देख नहीं सकते उनके बीच रहकर उनकी सेवा के साथ साथ पढ़ना लिखना और उन्हें समाज के मुख्य धारा से जोड़ना चुनौती भरा कार्य है ऐसे बच्चों के परिवार भी उनसे दूरी रखते हैं ऐसे बच्चों की देख भाल माता पिता की तरह करना गागर में सागर भरने जैसा कार्य है  दिव्यांग बच्चों  को गढ़ना चुनौती भरा है।
उनकी इस सामाजिक कार्य एवं सेवा भाव को लेकर उन्हें  रायपुर की अग्रणीय सामाजिक व साहित्यिक संस्था वक्ता मंच के द्वारा छत्तीसगढ़ महिला गौरव अवार्ड 2025 से सम्मानित किया गया ।
 वे कई मंचों से सम्मानित हुई हैं। अपने जीवन के ज्यादा समय सामाजिक कार्यों में गुजरते हैं । उनकी यह कार्य समाज के लिए प्रेरणा योग्य है । उनकी कार्य  अखबारों के पन्नो से भले ही दूर हैं पर उनके कार्य सराहनीय हैं । जो समाज को नई राह दिखा रही हैं ।
छत्तीसगढ़ महिला गौरव अवार्ड से
 सम्मानित किया गया जिसमें सारंगढ़ -बिलाईगढ़ जिला से सामाजिक कार्यकर्ता श्रीमती हीरा देवी निराला का भी एक नाम था । अपने उत्कृष्ट कार्यों से  सम्मानित होती रही हैं ।  वर्ष 2025 में कई सम्मान से सम्मानित हुई हैं इसके पूर्व भी वे नारी सशक्तिकरण के लिए सम्मानित हुई है ।
दिव्यांगजन विशेष स्कूल की संरक्षक के साथ साथ वृद्ध सदन की भी जिम्मेदारी है। वही विशेष स्कूल में 40 बच्चों की वह माँ है उनके साथ रहकर उन्हें उनकी जीवन गढ़ रहे हैं । सारंगढ़ – बिलाईगढ़ जिले में प्रांजल विशेष स्कूल का एक अलग पहचान है जहां लोगों की विश्वास जुड़ी है । वहां संचालिका नहीं एक माँ रहती है जो समाज को नई दिशा दे रही हैं । सामाजिक कार्यकर्ता हीरा देवी निराला अपनी कार्यों से पहचानी जाती है जो समाज के लिए एक मिशाल से कम नहीं है ।
वे अब तक कई मंचों से सम्मानित हुई है हाल ही में डॉ भीमराव अंबेडकर विरासत सम्मान 2026 से सम्मानित हुई है इसके पूर्व डॉ ए पी जे अब्दुल कलाम राष्ट्रीयता उत्कृष्ट समान यही नहीं वे मिनीमाता जयंती पर नारी सशक्तिकरण सम्मान, अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर महिला गौरव सम्मान 2026, नई पीढ़ी की आवाज, तुलसी साहित्य अकादमी विभिन्न मंचों से सम्मानित हुई हैं । वे समाज के लिए एक प्रहरी के रूप में  जानी जाती हैं । उनके समाजिक कार्यों के लिए वे पहचानी जाती हैं ।   हिरा देवी निराला आज 57 वाँ वर्ष की हैं उन्हें स्कूल में सब मां कहके पुकारते हैं । यह उनके लिए एक बड़ी बात है । आज उनके जन्म दिवस पर उन्हें हार्दिक शुभकामनों के साथ बधाई ।
लक्ष्मीनारायण लहरे
वरिष्ठ पत्रकार साहित्यकार

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