रायपुर संवाददाता – रघुराज
छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के तहत उपहार में मिले आभूषणों के नकली होने का मामला सामने आने के बाद हड़कंप मच गया है। सामूहिक विवाह कार्यक्रम में नवविवाहित महिलाओं को बांटे गए गहनों की शुद्धता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। इस घटना ने प्रशासनिक लापरवाही और सप्लायर्स की मिलीभगत को उजागर किया है, जिससे गरीब और जरूरतमंद परिवारों की बेटियों के आत्मसम्मान को ठेस पहुंची है। मामले की गंभीरता को देखते हुए महिला एवं बाल विकास विभाग और स्थानीय प्रशासन ने उच्च स्तरीय जांच शुरू कर दी है।
यह विवाद तब शुरू हुआ जब राज्य के विभिन्न जिलों में आयोजित सामूहिक विवाह के बाद कुछ नवविवाहित महिलाएं और उनके परिजन उपहार में मिले मंगलसूत्र और पायल जैसी सामग्री को लेकर स्थानीय सुनारों के पास पहुंचे। महिलाओं का आरोप है कि उपयोग करने के कुछ ही दिनों के भीतर इन आभूषणों की चमक फीकी पड़ने लगी और वे काले होने लगे। जब स्थानीय स्तर पर कसौटी पत्थर और अन्य पारंपरिक तरीकों से इन आभूषणों की जांच कराई गई, तो सच्चाई सामने आई। सुनारों ने स्पष्ट किया कि दिए गए आभूषण चांदी या सोने के नहीं हैं, बल्कि यह गिलट, लोहा या किसी अन्य सस्ती धातु पर सोने-चांदी की परत चढ़ाकर तैयार किए गए हैं।
इस खुलासे के बाद कई परिवारों में असमंजस और विवाद की स्थिति भी निर्मित हो गई। शुरुआती दौर में कुछ ससुराल वालों को लगा कि वधू पक्ष की ओर से नकली जेवर दिए गए हैं, लेकिन जल्द ही यह स्पष्ट हो गया कि ये आभूषण शासन की योजना के तहत विवाह मंडप में वितरित किए गए थे। विशेष रूप से महासमुंद और मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (एमसीबी) जैसे क्षेत्रों से इस प्रकार की शिकायतें प्रमुखता से सामने आईं, जहां सैकड़ों जोड़ों का विवाह एक ही दिन संपन्न कराया गया था।
मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना का मुख्य उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर और गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वाले परिवारों की बेटियों की शादी में आने वाली वित्तीय कठिनाइयों को दूर करना है। योजना के प्रावधानों के अनुसार, सरकार प्रत्येक वधू को बैंक ड्राफ्ट के माध्यम से सीधी आर्थिक सहायता देने के साथ-साथ गृहस्थी का सामान और मांगलिक आभूषण भी उपलब्ध कराती है। इसके लिए विभाग द्वारा निविदाएं जारी कर सप्लायर्स और ठेकेदारों को आभूषण व अन्य सामग्री की आपूर्ति का जिम्मा सौंपा जाता है।
स्थानीय स्तर पर महिलाओं और उनके परिजनों द्वारा किए गए विरोध प्रदर्शन और शिकायतों के बाद राजनीतिक गलियारों में भी तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। मुख्य विपक्षी दल ने इस मामले को लेकर सरकार पर सीधा हमला बोला है। विपक्ष का आरोप है कि गरीब बेटियों के विवाह की आड़ में करोड़ों रुपये का बड़ा घोटाला किया गया है। बिना उचित गुणवत्ता नियंत्रण और जांच-परख के घटिया सामग्री की आपूर्ति की गई, जो सीधे तौर पर भ्रष्टाचार को दर्शाता है। विपक्षी नेताओं ने मांग की है कि इस पूरे टेंडर प्रक्रिया और सामग्री की खरीद की निष्पक्ष न्यायिक जांच होनी चाहिए।
दूसरी तरफ, शासन और संबंधित विभाग ने इस मामले पर सफाई देते हुए त्वरित कार्रवाई का भरोसा दिलाया है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि नियमों के अनुसार केवल विशिष्ट हिस्सों या लॉकेट के लिए ही चांदी की शुद्धता निर्धारित थी, लेकिन पूरी चेन या आभूषणों में गड़बड़ी की शिकायतें गंभीर हैं। शासन ने स्पष्ट किया है कि भ्रष्टाचार के प्रति उनकी नीति बिल्कुल बर्दाश्त न करने की है। संबंधित जिलों के कलेक्टरों को निर्देश देकर अपर कलेक्टर स्तर के अधिकारियों के नेतृत्व में जांच टीमें गठित कर दी गई हैं।
प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, विवाह में बांटी गई सामग्री के नमूने एकत्र कर उन्हें प्रयोगशाला परीक्षण के लिए भेजा जा रहा है। जांच रिपोर्ट में यदि आभूषणों की गुणवत्ता तय मानकों से कम पाई जाती है, तो दोषी सप्लायर्स के खिलाफ सख्त वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा, संबंधित ठेकेदारों के भुगतान पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी गई है और उन्हें ब्लैकलिस्ट (काली सूची) में डालने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।
इस घटना ने सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन और उसमें होने वाली निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि ऐसी योजनाओं का उद्देश्य निर्धन परिवारों को संबल देना होता है, लेकिन इस तरह की लापरवाही से समाज में गलत संदेश जाता है। फिलहाल प्रभावित महिलाओं को प्रशासन द्वारा आश्वस्त किया गया है कि जांच पूरी होते ही उन्हें तय मानदंडों के अनुरूप शुद्ध आभूषण प्रदान किए जाएंगे। क्षेत्र के लोग अब इस मामले में दोषियों के खिलाफ कड़ी दंडात्मक कार्रवाई और जांच रिपोर्ट के सार्वजनिक होने का इंतजार कर रहे हैं।








