जगदलपुर। देश में वर्तमान शिक्षा व्यवस्था की चुनौतियों, शिक्षकों पर बढ़ते गैर-शैक्षणिक कार्यों के बोझ तथा शिक्षा की गुणवत्ता पर पड़ रहे प्रतिकूल प्रभाव को लेकर शिक्षक नेता रामचंद्र सोनवंशी ने व्यापक जन आंदोलन की तैयारी का आह्वान किया है। उन्होंने शिक्षकों, शिक्षाविदों, अभिभावकों, विद्यार्थियों तथा समाजसेवी संस्थाओं से इस अभियान में सहभागी बनने की अपील की है।
रामचंद्र सोनवंशी ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में व्याप्त अनियमितताओं और शिक्षकों पर बढ़ते कार्यभार के कारण गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रभावित हो रही है। ऐसे में समाज के सभी वर्गों को एकजुट होकर शिक्षा सुधार के लिए आवाज उठानी चाहिए। उन्होंने कहा कि शिक्षकों की समाज में व्यापक पहुंच होती है और वे विद्यार्थियों तथा अभिभावकों के माध्यम से सकारात्मक परिवर्तन का बड़ा माध्यम बन सकते हैं।
उन्होंने जन आंदोलन को सफल बनाने के लिए स्पष्ट रणनीति प्रस्तुत करते हुए कहा कि सबसे पहले आंदोलन के उद्देश्य और मांगों को स्पष्ट रूप से निर्धारित किया जाना चाहिए। चाहे वह शिक्षा का अधिकार हो, शिक्षकों की सेवा संबंधी समस्याएं हों या पुरानी पेंशन योजना जैसी मांगें, इन सभी विषयों पर एक लिखित और स्पष्ट मांग पत्र तैयार किया जाना आवश्यक है।
सोनवंशी ने ब्लॉक, जिला एवं राज्य स्तर पर शिक्षक संगठनों को एक मंच पर लाने तथा एक मजबूत कोर कमेटी गठित करने पर भी जोर दिया। उनके अनुसार अनुभवी एवं सक्रिय शिक्षकों की टीम आंदोलन को दिशा देने और समन्वय स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
जन-जागरूकता के लिए अभिभावक बैठकों, सोशल मीडिया अभियानों तथा स्थानीय जनप्रतिनिधियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं से संवाद स्थापित करने की आवश्यकता बताई गई। उन्होंने कहा कि आंदोलन को लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से संचालित किया जाना चाहिए। ज्ञापन, शांति मार्च, क्रमिक भूख हड़ताल, नुक्कड़ नाटक, पोस्टर और जनसंवाद जैसे रचनात्मक माध्यमों का उपयोग कर जनसमर्थन जुटाया जा सकता है।
साथ ही उन्होंने आंदोलन से जुड़ी सभी गतिविधियों के लिए प्रशासनिक अनुमति लेने और शिक्षकों को अपने अधिकारों एवं सेवा नियमों की जानकारी रखने की सलाह दी, ताकि किसी प्रकार की कानूनी या प्रशासनिक समस्या उत्पन्न न हो।
रामचंद्र सोनवंशी ने इच्छुक शिक्षकों से आंदोलन के समर्थन में एकजुट होने और संबंधित व्हाट्सएप समूह से जुड़कर अभियान को मजबूत बनाने का आग्रह किया है। उनका कहना है कि यदि शिक्षक संगठित होकर आगे बढ़ें तो शिक्षा व्यवस्था में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है।








