आरंग संवाददाता – सोमान साहू
निर्जला एकादशी व्रत से साधकों को मिलता है सभी एकादशी व्रत का फल — दीवान आरंग -ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी की पुराणों में बड़ी महिमा है जो मनुष्य इस कठिन व्रत को नियमपूर्वक पूरी निष्ठा से करता है उसे वर्ष भर की सभी एकादशियों के बराबर पुण्यफल की प्राप्ति होती है उक्त प्रेरक उद्गार भागवत कथावाचक पं छत्रधर दीवान के हैं उन्होंने बताया कि पौराणिक मान्यतानुसार पाण्डव व माता कुन्ती वर्षभर एकादशी व्रत का पालन करते थे किन्तु भीम अधिक बलशाली थे तथा अधिक समय भूखे नहीं रह पाते थे जिसके कारण यह व्रत उनके लिए बहुत कठिन था इस विषय में उन्होंने महर्षि वेदव्यास जी से पूछा कि मेरे परिजन वर्षभर एकादशी व्रत करते हैं इसलिए आप कुछ ऐसी युक्ति बताईए जिससे मुझे सभी एकादशियों के व्रत का पुण्यफल प्राप्त हो सके महाबली भीम की जिज्ञासा शांत करते हुए कहा कि तुम ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी व्रत करो इस व्रत में अन्न जल का त्याग का त्याग करना होता है महर्षि के बताए अनुसार भीम ने निर्जला रहकर विधिपूर्वक इस व्रत को किया भीमसेन द्वारा इस निर्जला व्रत को करने के कारण इसे भीमसेनी या पाण्डव एकादशी भी कहा जाता है आचार्य श्री ने व्रत का विधान बताते हुए कहा कि एकादशी व्रत को ब्रम्हमुहूर्त में स्नान कर माता लक्ष्मी जी सहित श्री हरि भगवान विष्णु का विधिवत पूजन करें इस दिन अन्न जल का त्याग करें, द्वादशी तिथि को सात्विक भोजन के साथ पारण करें , ब्रह्मचर्य व्रत का पालन करें साथ ही यथाशक्ति दान करें धार्मिकमान्यतानुसार दान करने से साधक को व्रत का पूर्ण फल की प्राप्ति होती है व्रत के दिन व्रत कथा श्रवण, नाम संकीर्तन, मानस एवं सुन्दरकांड पाठ, नाम जप से अक्षय पुण्यफल सहज ही सुलभ हो जाता है








