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मुआवजा माँगने पर SDM रोहित ने किसान को धमकाया कहा, पीड़ित ने थाने में किया शिकायत,वही एसडीएम ने भी रखा अपना पक्ष

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पाली संवाददाता – दीपक शर्मा
कोरबा/पाली:- कोरबा जिले के पाली तहसील से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, यहाँ के करतली गाँव के एक किसान ने पाली के अनुविभागीय अधिकारी (SDM) रोहित कुमार पर गंभीर आरोप लगाए हैं,किसान पीताम्बर सिंह ने थाना पाली में आवेदन देकर SDM के खिलाफ शासकीय पद के दुरुपयोग, मारपीट,जान से मारने की धमकी देने और अवैध रूप से थाने में बंधक बनाने का आरोप लगाते हुए FIR दर्ज करने की माँग की है,
क्या है पूरा मामला?  
पीड़ित किसान पीताम्बर सिंह पिता भुवन सिंह, निवासी ग्राम करतली ने अपने आवेदन में बताया कि 24 जून 2026 को गाँव में एस.ई.सी.एल की अप्रोच रोड के निर्माण के लिए सीमा चिन्हांकन का कार्य चल रहा था। इस दौरान प्रशासनिक अमला दल-बल के साथ मौके पर मौजूद था।
पीताम्बर का आरोप है कि उसकी और अन्य ग्रामीणों की जमीन इस सड़क निर्माण से प्रभावित हो रही है, लेकिन उन्हें अब तक मुआवजा नहीं मिला है। इसी माँग को लेकर वे शांतिपूर्ण तरीके से विरोध कर रहे थे और कह रहे थे कि पहले मुआवजे का निराकरण हो फिर निर्माण शुरू किया जाए।
SDM पर लगे ये गंभीर आरोप:  
आवेदन के अनुसार, इसी दौरान मौके पर मौजूद SDM रोहित कुमार ने बिना किसी कानूनी प्रक्रिया के जबरन काम शुरू कराने का प्रयास किया,जब पीताम्बर ने बिना मुआवजे की जमीन पर काम रोकने का अनुरोध किया तो SDM आगबूला हो गए।
पीड़ित का आरोप है कि:- 
पीड़ित ने SDM पर सरेआम कालर पकड़कर धक्का-मुक्की करने,अत्यंत उग्र होकर जान से मारने की नीयत से धमकी दी कि _’तुमको जिंदा गाड़ दूंगा’,अपने पद का दुरुपयोग कर पुलिस से जबरन पकड़वाया और धमकाया कि _’तुमको 7 महीने का जेल भेज दूंगा, कोई बाहर नहीं निकाल सकता,इसके बाद पीड़ित को बिना किसी अपराध के शाम तक थाने में अवैध रूप से बंधक बनाकर रखा गया।
किसान की माँग  
पीताम्बर सिंह ने थाना प्रभारी पाली को दिए आवेदन में SDM रोहित कुमार के खिलाफ संज्ञेय अपराध के तहत प्राथमिकी दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की माँग की है।
वही मामले में एसडीएम रोहित सिंह ने अपना पक्ष रखा
इस आरोप से इनकार करते हुए एसडीएम रोहित कुमार सिंह ने बताया कि एप्रोच रोड में आ रही बाधा को दूर करने के लिए वह ग्राम करतली पहुंचे थे। उनके साथ तहसीलदार, पटवारी और पाली थाना प्रभारी भी मौके पर मौजूद थे। यहां जिन ग्रामीणों की जमीन संबंधी शिकायत थी, उनका 4 से 6 घंटा लगाकर जमीन की नापजोख कराई गई, संतोषपूर्ण तरीके से उनका शंका समाधान किया गया। जिसको मुआवजा लेना था उनसे मुआवजा के बारे में बात की गई। इसी कड़ी में पीतांबर सिंह की जमीन का भी मामला आया जिसमें उसके द्वारा बात रखने के दौरान एकाएक आवेश में आकर अधिकारियों को एसईसीएल से जोड़ते हुए गाली गलौज करना शुरू कर दिया गया। अभद्र और अपमानजनक शब्दों का उपयोग किया जाने लगा जिस पर उसे समझाइश दी गई तो वह और उग्र हो गया। यह सारा घटनाक्रम वहां पर मौजूद ग्रामीणों सहित उसकी मां ने स्वयं देखा। जिन ग्रामीणों की समस्या का समाधान पटवारी की टीम ने कई घंटे लगाकर किया उनमें खुशी की लहर थी लेकिन पीतांबर सिंह समाधान की बजाय अनर्गल आरोप लगने लगा। उसके इस अमर्यादित आचरण और शासकीय कार्य में बाधा को देखते हुए उपस्थित पुलिस बल को कार्रवाई के निर्देश दिए गए थे। शाम को पूरी कार्रवाई निपटने के बाद वापस लौटते समय पीतांबर सिंह की मां ने मुझसे (एसडीएम से) आग्रह किया कि उसके बेटे को छोड़ दिया जाए, उसने नादानी में गलती कर दी है,आप भी मेरे बेटे समान हो, उसे माफ कर दें।एसडीएम ने वृद्ध मां के आग्रह को नहीं ठुकराया और मौके पर ही पाली टीआई को निर्देश दिए कि पीतांबर के विरुद्ध किसी भी तरह की आपराधिक कार्रवाई न की जाए और उसे छोड़ दिया जाए। इसके बाद पीतांबर पर कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की गई और उसे बख्श दिया गया। यहां से जाने के बाद उसके मन में क्या सूझी, वही जाने लेकिन जिस तरह से उसने अमर्यादित आचरण किया, उसके लिए कई गैर जमानती धाराओं के तहत अपराध पंजीकृत किया जा सकता था। एसडीएम ने कहा कि पूरी कार्रवाई ग्रामीणों के सामने हुई है, इसमें किसी तरह का कोई गलत आचरण मेरे द्वारा या मेरी टीम के द्वारा नहीं किया गया, लगाए गए आरोप पूर्णत: निराधार हैं।

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