सरगुजा संवाददाता उमेश कुमार प्रजापति
रोपाखार और कमलेश्वरपुर में प्रस्तावित खदानों को लेकर हंगामेदार जनसुनवाई, पूर्व मंत्री अमरजीत भगत भी विरोध में उतरे, पर्यावरण और पर्यटन बचाने की उठी मांग
सरगुजा जिले के मैनपाट में 1 जुलाई को छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल और “छत्तीसगढ़ का नामीक शिमला” कहेजाने वाले मैनपाट में प्रस्तावित चार नई बॉक्साइट खदानों के विरोध में आयोजित पर्यावरणीय जनसुनवाई बुधवार को भारी हंगामे के बीच संपन्न हुई। रोपाखार और कमलेश्वरपुर में आयोजित किया गया जनसुनवाई के दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीणों, जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों ने खदानों का पुरजोर विरोध करते हुए पर्यावरण, पर्यटन और स्थानीय आजीविका पर पड़ने वाले संभावित दुष्प्रभावों को लेकर गंभीर चिंता जताई गई।
वहीं जनसुनवाई में शामिल सीतापुर विधायक रामकुमार टोप्पो ने कहा कि जिन चार नई बॉक्साइट खदानों के लिए वर्तमान में पर्यावरणीय प्रक्रिया चल रही है, उन्हें वर्ष 2021-22 में तत्कालीन कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में स्वीकृति प्रदान की गई थी। उस समय क्षेत्र के विधायक एवं मंत्री अमरजीत भगत थे। उन्होंने स्पष्ट कहा कि यदि ग्राम सभाओं और स्थानीय ग्रामीण खदानों के पक्ष में अपनी सहमति नहीं देंगे, तो उनकी इच्छा का पूरा सम्मान किया जाएगा और उनकी आपत्तियों को गंभीरता से लिया जाएगा।

वहीं विधायक टोप्पो ने छत्तीसगढ़ राज्य खनिज विकास निगम (सीएमडीसी) पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा माइनिंग प्लान में कमलेश्वरपुर और रोपाखार क्षेत्र के बौद्ध मंदिरों, प्रमुख पर्यटन स्थलों तथा अन्य महत्वपूर्ण स्थलों की जानकारी छिपाकर पर्यावरणीय स्वीकृति हासिल की गई है। और उन्होंने कहा यदि जांच में अनियमितता सामने आती है तो दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की जाएगी। उन्होंने इस पूरे मामले को विधानसभा में उठाने की भी घोषणा की है।
वहीं जनसुनवाई में पहुंचे पूर्व मंत्री एवं पूर्व विधायक अमरजीत भगत ने भी नई खदानों का विरोध करते हुए कहा मैनपाट में वर्षों से हो रहे बॉक्साइट खनन के बावजूद क्षेत्र को अपेक्षित विकास नहीं मिला है। इसके विपरीत पर्यावरण, जलस्रोतों और प्राकृतिक संसाधनों को नुकसान पहुंचा है। और उन्होंने कहा नई खदानों के शुरू होने से मैनपाट की पर्यटन पहचान, जैव विविधता और स्थानीय लोगों की आजीविका पर गंभीर संकट खड़ा हो जाएगा।
जहां रोपाखार के उप सरपंच रजनीश पांडेय ने आरोप लगाया है कि पंचायतों को प्रस्तावित खदानों की स्वीकृति संबंधी जानकारी तक नहीं दी गई। और वही सांप सब्त में उन्होंने कहा कि माइनिंग प्लान में बौद्ध मंदिर, प्रमुख पर्यटन स्थल और आरक्षित वन क्षेत्र जैसी महत्वपूर्ण जानकारियां छिपाई गई हैं। उनका दावा था कि मैनपाट में प्रतिदिन हजारों पर्यटक पहुंचते हैं, जिससे सैकड़ों परिवारों की रोजी-रोटी जुड़ी हुई है। ऐसे में नई खदानें शुरू होने से पर्यटन उद्योग और पर्यावरण दोनों पर प्रतिकूल असर पड़ेगा।
और उन्होंने यह भी आरोप लगाया पहले से संचालित खदानों में नियमों की अनदेखी कर खनन किया जा रहा है तथा स्थानीय मजदूरों का शोषण हो रहा है। उन्होंने दो टूक कहा कि क्षेत्र के ग्रामीण किसी भी कीमत पर नई खदानों को शुरू से ही नहीं होने देंगे और कानूनी व लोकतांत्रिक तरीके से अपना विरोध प्रदर्शन जारी रखेंगे।
जहां जनसुनवाई के दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने प्रस्तावित खदानों के विरोध में नारेबाजी की। हालांकि कुछ लोगों ने खदानों के समर्थन में भी अपनी बात रखी, लेकिन भारी विरोध और हंगामे के बीच प्रशासन ने निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार जनसुनवाई पूरी कराई।
मैनपाट में प्रस्तावित बॉक्साइट खदानों को लेकर अब राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर बहस तेज हो गई है। स्थानीय लोगों का कहना है विकास के नाम पर क्षेत्र की प्राकृतिक धरोहर, पर्यटन पहचान और पर्यावरण से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। वहीं जनसुनवाई के बाद अब सभी की निगाहें प्रशासन और सरकार की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई है अब यह देखना होगा कि छत्तीसगढ़ की सरकार इस मामले में कोई ठोस कदम उठाए जाएंगे या फिर कागजों में ही सिमत रह जाएंगे।








