गुरदीप सिंह/कुसमुंडा (कोरबा)। कुसमुंडा कोयला खदान क्षेत्र में आज एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया। यहाँ नीलकंठ कंपनी का एक विशालकाय डंपर अनजाने में ऊपर से गुजर रही बिजली की हाई-टेंशन लाइन की चपेट में आ गया। गनीमत यह रही कि उस समय लाइन में विद्युत प्रवाह (सप्लाई) बंद था, जिसके कारण डंपर चालक की जान बाल-बाल बच गई।
क्या है पूरा मामला?
मिली जानकारी के अनुसार, नीलकंठ कंपनी के अधीन कार्यरत डंपर ऑपरेटर लकी यादव (पिता: रामदास यादव, निवासी: ग्राम पाली) रोजाना की तरह खदान क्षेत्र में काम कर रहे थे। इसी दौरान डंपर का ऊपरी हिस्सा वहां से गुजर रहे भारी भरकम बिजली के तारों से टकरा गया। घटना के बाद मौके पर हड़कंप मच गया। वहां मौजूद लोगों ने देखा कि बिजली का तार डंपर के पिछले टायरों और बॉडी के बीच बुरी तरह फंस चुका था।
अगर उस वक्त लाइन चालू होती, तो डंपर में भीषण ब्लास्ट हो सकता था और ऑपरेटर लकी यादव की जान को गंभीर खतरा हो सकता था।
SECL प्रबंधन की लापरवाही पर उठे सवाल
इस घटना ने एसईसीएल (SECL) प्रबंधन की सुरक्षा व्यवस्था पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। खदान क्षेत्र में जहां हर वक्त भारी वाहनों की आवाजाही रहती है, वहां इतनी नीचे बिजली की लाइनें होना सीधे तौर पर सुरक्षा मानकों का उल्लंघन है।
घटनास्थल पर मौजूद लोगों और सहकर्मियों के बीच भी इस बात को लेकर तीखी बहस देखने को मिली। कुछ लोगों का कहना था कि यह सीधे तौर पर वहां तैनात सुपरवाइजरों और प्रबंधन की लापरवाही है, जो समय रहते ऐसी जगहों पर सुरक्षा सुनिश्चित नहीं करते।
बाल-बाल बचे ऑपरेटर
टारगेट पर रहने के बावजूद बिजली सप्लाई बंद होने के कारण एक बड़ा अनर्थ होने से रुक गया। घटना के बाद मौके पर मौजूद सुरक्षा अधिकारियों को इसकी सूचना दी गई है और तार को डंपर से सुरक्षित अलग करने का प्रयास किया जा रहा है। स्थानीय लोगों और कर्मचारियों ने मांग की है कि खदान क्षेत्रों में इस तरह के हादसों को रोकने के लिए बिजली के तारों को पर्याप्त ऊंचाई पर रखा जाए








