रायपुर संवाददाता – रघुराज
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में मानसून की पहली दस्तक ने ही प्रशासन और नगर निगम के उन तमाम बड़े-बड़े दावों की हवा निकाल दी है, जो बारिश से पहले ड्रेनेज सिस्टम की सफाई और तैयारियों को लेकर किए जा रहे थे। शनिवार को हुई झमाझम बारिश की पहली बौछार में ही पूरी राजधानी मानो तालाब में तब्दील हो गई। शहर के मुख्य मार्गों से लेकर रिहाइशी इलाकों की अंदरूनी गलियों तक, हर तरफ सिर्फ और सिर्फ पानी का साम्राज्य नजर आया। सुबह के समय अचानक शुरू हुई तेज बारिश के बाद कुछ ही घंटों में स्थिति इतनी बेकाबू हो गई कि कई मुख्य सड़कों पर घुटनों तक पानी भर गया, जिससे राहगीरों, दफ्तर जाने वालों और स्कूली बच्चों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। जगह-जगह गाड़ियां बंद होने और जलभराव के कारण शहर की रफ्तार पूरी तरह से थम गई।
इन प्रमुख वीआईपी और रिहाइशी इलाकों में घरों के अंदर तक घुसा गंदा पानी
बारिश का सबसे बुरा असर शहर के निचले और घनी आबादी वाले इलाकों में देखने को मिला। राजधानी के मोवा, सड्डू, देवेंद्र नगर, पंडरी, और पुरानी बस्ती जैसे क्षेत्रों में ड्रेनेज जाम होने की वजह से सड़कों पर जमा पानी लोगों के घरों और दुकानों के भीतर तक प्रवेश कर गया। श्रीनगर, खमतराई और शिवानंद नगर जैसे रिहाइशी इलाकों की गलियां पूरी तरह से जलमग्न हो गईं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि नालियों की सही समय पर गहरी सफाई न होने की वजह से पानी की निकासी नहीं हो पाई और चंद घंटों की बारिश का गंदा पानी उनके ड्राइंग रूम और किचन तक पहुंच गया। घरों में पानी घुसने से लोगों का कीमती सामान, राशन और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण खराब हो गए। लोग बाल्टियों से अपने घरों के भीतर का पानी बाहर निकालते नजर आए, जिससे नगर निगम के प्रति जनता का गुस्सा साफ तौर पर देखा गया।
मुख्य सड़कों पर लगा लंबा जाम, बीच सड़क पर बंद हुईं दर्जनों गाड़ियां
जलभराव का सीधा असर शनिवार को राजधानी की यातायात व्यवस्था पर पड़ा। रायपुर के सबसे व्यस्ततम मार्गों में से एक जीई रोड, तेलीबांधा, वीआईपी रोड और विधानसभा मार्ग पर पानी का बहाव इतना तेज था कि दोपहिया और चारपहिया वाहनों की रफ्तार पूरी तरह थम गई। घुटनों तक भरे पानी के बीच से गुजरने की कोशिश में दर्जनों मोटरसाइकिलें और कारें बीच सड़क पर ही बंद हो गईं, जिससे वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। जयस्तंभ चौक, घड़ी चौक और रेलवे स्टेशन के पास के अंडरपास पूरी तरह से पानी में डूब गए, जिसके कारण प्रशासन को कुछ रास्तों पर रूट डायवर्ट करना पड़ा। ऑफिस और व्यापारिक प्रतिष्ठानों के लिए निकले लोग घंटों जाम में फंसे रहे, और कई जगहों पर गाड़ियों के साइलेंसर में पानी घुस जाने के कारण लोगों को पैदल ही गाड़ियां खींचनी पड़ीं।
करोड़ों खर्च करने के बाद भी ड्रेनेज सिस्टम पूरी तरह फेल, जनता उठा रही सवाल
हर साल मानसून से ठीक पहले नगर निगम रायपुर द्वारा ड्रेनेज और बड़े नालों की सफाई के नाम पर करोड़ों रुपये का बजट पास किया जाता है। कागजों पर यह दावा किया जाता है कि शहर के सभी छोटे-बड़े नालों से गाद निकाल ली गई है ताकि जलभराव की स्थिति निर्मित न हो। लेकिन शनिवार को हुई पहली ही जोरदार बारिश ने इन सभी दावों को पूरी तरह से झुठला दिया। जनता अब सीधे तौर पर प्रशासन से सवाल पूछ रही है कि आखिर ड्रेनेज सिस्टम की सफाई के नाम पर खर्च किए गए करोड़ों रुपये कहां गए। अगर पहली ही बौछार में राजधानी का यह हाल है, तो आने वाले दिनों में जब मानसून पूरी तरह से सक्रिय होगा और लगातार दो-तीन दिनों तक बारिश होगी, तब रायपुर की स्थिति कितनी भयानक होगी, इसका अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है।
स्मार्ट सिटी रायपुर की खुली पोल, अव्यवस्थाओं को लेकर पार्षदों और जनता में आक्रोश
रायपुर को स्मार्ट सिटी का दर्जा दिलाने के लिए शहर में लगातार सौंदर्यीकरण और निर्माण कार्य किए जा रहे हैं, लेकिन बुनियादी सुविधाओं के नाम पर आज भी स्थिति जस की तस बनी हुई है। विभिन्न वार्डों के स्थानीय पार्षदों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी इस अव्यवस्था को लेकर नगर निगम प्रशासन को आड़े हाथों लिया है। उनका आरोप है कि अधिकारियों की लापरवाही और ठेकेदारों की मनमानी के कारण नालियों का निर्माण सही तकनीकी तरीके से नहीं किया गया है। कई जगहों पर नई सड़कें तो बना दी गईं, लेकिन उनके किनारे पानी की निकासी के लिए ड्रेनेज लाइन छोड़ना अधिकारी भूल गए। इसी अव्यवस्था का खामियाजा आज राजधानी के लाखों नागरिकों को भुगतना पड़ रहा है। व्यापारिक संघों ने भी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा है कि पंडरी कपड़ा मार्केट और गोल बाजार जैसे प्रमुख व्यापारिक केंद्रों में पानी भरने से करोड़ों रुपये का व्यापार प्रभावित हुआ है।
बिजली कटौती ने बढ़ाई मुसीबत, जलभराव के बीच घंटों गुल रही बत्ती
बारिश शुरू होते ही शहर के अधिकांश इलाकों में बिजली की अघोषित कटौती ने लोगों की मुसीबतों को दोगुना कर दिया। जलभराव के कारण जहां लोग पहले से ही परेशान थे, वहीं बिजली गुल हो जाने से पेयजल आपूर्ति भी ठप हो गई। कई इलाकों में सुरक्षा के लिहाज से ट्रांसफार्मर और बिजली के खंभों के पास पानी जमा होने के कारण बिजली विभाग ने खुद ही सप्लाई बंद कर दी थी, ताकि किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना या करंट लगने के हादसे को टाला जा सके। हालांकि, विभाग की इस एहतियाती कार्रवाई के बावजूद लोगों को उमस और अंधेरे में कई घंटे बिताने पड़े।
मौसम विभाग की चेतावनी, आने वाले 48 घंटों में भारी बारिश का अलर्ट जारी
मौसम केंद्र रायपुर के अनुसार, राज्य में मानसून पूरी तरह से सक्रिय हो चुका है और बंगाल की खाड़ी से आ रही नमी के कारण अगले 48 घंटों के भीतर रायपुर समेत प्रदेश के कई हिस्सों में भारी से अति भारी बारिश होने की संभावना है। मौसम वैज्ञानिकों ने चेतावनी जारी करते हुए आम जनता को आकाशीय बिजली और जलभराव वाले क्षेत्रों से दूर रहने की सलाह दी है। इस चेतावनी के बाद नगर निगम और जिला प्रशासन भी अलर्ट मोड पर आ गया है। आनन-फानन में निगम कमिश्नर ने आपातकालीन बैठक बुलाकर सभी जोन कमिश्नरों को मैदान पर उतरने और जलभराव वाले संवेदनशील इलाकों से पंप के जरिए पानी निकालने के निर्देश दिए हैं।
पहली ही बारिश से सबक लेकर तुरंत सुधारी जाए व्यवस्था
राजधानी रायपुर के नागरिकों की अब प्रशासन से यही मांग है कि पहली बारिश में हुई इस फजीहत से सबक लेते हुए युद्ध स्तर पर सुधारात्मक कार्य किए जाएं। शहर के जिन हिस्सों में पानी जमा हो रहा है, वहां तुरंत नए ड्रेनेज चैनल बनाए जाएं और जाम पड़ी नालियों को साफ किया जाए ताकि आने वाले दिनों में जनता को इस नारकीय स्थिति से दोबारा न गुजरना पड़े।
राजधानी रायपुर के इस ड्रेनेज सिस्टम और पहली ही बारिश में बने तालाब जैसे हालातों पर आपकी क्या राय है, क्या आपके इलाके में भी जलभराव की समस्या हुई है, अपने विचार कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं और इस खबर को ज्यादा से ज्यादा शेयर करें ताकि सोए हुए प्रशासन तक जनता की आवाज पहुंच सके।








