बारिश के मौसम में बारिश के गंदे पानी के बीच से चलना हमारी मज़बूरी होती है। लेकिन इस बात का ध्यान रखें कि सड़क पर जमा पानी सिर्फ बारिश का पानी नहीं होता। इसमें नाली का पानी, मिट्टी, कचरा, जानवरों का मल-मूत्र, केमिकल्स और बैक्टीरिया मिल सकते हैं। इस तरह का पानी आपके सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकता है। ऐसे पानी के संपर्क में आने से कई बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। ऐसे में बचाव बेहद ज़रूरी है, चलिए जानते हैं बचाव के लिए क्या करें?
बारिश के पानी में चलने से कौन सी समस्याएं होती हैं?
- अगर आपके पैरों में कट, छाले, या कोई घाव हो है तो बारिश के पानी में चलने से इन घावों के जरिए शरीर में इंफेक्शन पहुंच जाता है। जिस वजह से स्किन इंफेक्शन, फंगल इंफेक्शन और कुछ मामलों में लेप्टोस्पायरोसिस जैसी गंभीर बीमारी का खतरा हो सकता है।
- लेप्टोस्पायरोसिस मानसून में होने वाली एक गंभीर बीमारी है, जो खराब पानी या मिट्टी के संपर्क में आने से फैलती है। यह बीमारी बारिश के पानी में संक्रमित जानवरों के यूरिन की वजह से होती है। इस बीमारी में अक्सर बुखार, शरीर दर्द, आंखों में लालपन, सिरदर्द, उल्टी, पीलिया जैसी सेहत से जुड़ी समस्याएं होने लगती हैं।
- बारिश के पानी के अंदर कांच, लोहे के टुकड़े, गड्ढे या बिजली के तार भी हो सकते हैं। और ये चीजें पैरों में चोट लगने, गिरने या करंट की वजह बन सकती हैं
घर पहुंचने के बाद करें ये काम:
- तुरंत बदलें गीले कपड़े और जूते : बारिश के पानी से आने के बाद गीले कपड़े और जूते बदलें। पानी और साबुन से अपना हाथ और पैर धोएं। नाखूनों और एड़ी को अच्छी तरह साफ करें, क्योंकि इन्हीं जगहों पर फंगल इंफेक्शन जल्दी होता है।
- एंटीसेप्टिक लगाएं: अगर त्वचा पर कोई कट, खरोंच या छाला दिखे, तो घाव को खुला और गीला न छोड़ें उसे साफ पानी से धोकर एंटीसेप्टिक लगाएं। अगर घाव में सूजन , दर्द महसूस हो तो डॉक्टर से सलाह लें
- वाटरफ्रूफ शूज़ का इस्तेमाल: बारिश के मौसम में आप चप्पल या सैंडल की जगह वाटरफ्रूफ शूज़ या गम्बूट्स पहनें। या फिर आप बाहर जाने के लिए बरसाती चप्पल का भी इस्तेमाल कर सकते हैं।








