राजेंद्र जायसवाल/जिला जांजगीर-चांपा जांजगीर-चांपा। परिवार परामर्श केंद्र जैसी संवेदनशील संस्था में नियुक्ति केवल किसी व्यक्ति को सम्मान देने का विषय नहीं है, बल्कि यह सामाजिक विश्वास, निष्पक्षता और जिम्मेदारी से जुड़ा महत्वपूर्ण निर्णय होता है। ऐसे में यदि किसी नियुक्ति का आधार किसी एक चर्चित घटना को बनाया गया हो और बाद में उसी घटना से जुड़े तथ्य या परिस्थितियां बदल जाएं, तो स्वाभाविक रूप से उस निर्णय की समीक्षा की मांग उठना लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा है।
कोसमंदा निवासी मुस्कान प्रधान को उस समय व्यापक प्रशंसा मिली थी, जब उन्होंने कथित रूप से नशे की स्थिति में पहुंचे दूल्हे से विवाह करने से इनकार किया। इस घटना को महिला आत्मसम्मान और नशामुक्त समाज के संदेश के रूप में प्रस्तुत किया गया।
जांजगीर-चांपा पुलिस ने भी उन्हें सम्मानित करते हुए परिवार परामर्श केंद्र में महिला काउंसलर की जिम्मेदारी सौंपी।
अब उसी युवक से उनके विवाह की खबर सामने आने के बाद पूरे घटनाक्रम ने नया मोड़ ले लिया है। यह विवाह उनका पूर्णतः व्यक्तिगत और कानूनी अधिकार है, लेकिन जिस घटना के आधार पर उन्हें सार्वजनिक रूप से महिला सशक्तिकरण का प्रतीक बताते हुए एक संवेदनशील जिम्मेदारी सौंपी गई थी, उस निर्णय की प्रक्रिया पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि क्या किसी वायरल घटना के तुरंत बाद किसी व्यक्ति को ऐसी जिम्मेदारी देना उचित था?
क्या नियुक्ति से पहले उनके सामाजिक कार्य, अनुभव, परामर्श क्षमता और दीर्घकालिक योगदान का समुचित मूल्यांकन किया गया था? यदि नहीं, तो भविष्य में ऐसी नियुक्तियों के लिए स्पष्ट और पारदर्शी मानक तय किए जाने चाहिए।
परिवार परामर्श केंद्र का कार्य केवल सलाह देना नहीं, बल्कि टूटते परिवारों को जोड़ना, वैवाहिक विवादों का समाधान करना और समाज में विश्वास बनाए रखना है। इसलिए यहां नियुक्त प्रत्येक व्यक्ति की योग्यता, निष्पक्षता और चयन प्रक्रिया पर जनता का भरोसा होना आवश्यक है।
इस पूरे मामले में शासन और पुलिस प्रशासन के लिए सबसे उचित कदम यह होगा कि नियुक्ति प्रक्रिया की निष्पक्ष समीक्षा कराई जाए। यदि समीक्षा में यह पाया जाता है कि चयन निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं था, तो नियमों के अनुसार उचित प्रशासनिक निर्णय लिया जाए। वहीं यदि नियुक्ति पूरी तरह नियमसम्मत पाई जाती है, तो विभाग को सार्वजनिक रूप से स्थिति स्पष्ट कर भ्रम समाप्त करना चाहिए।
यह मामला किसी व्यक्ति के निजी जीवन का नहीं, बल्कि सरकारी संस्थाओं की निर्णय प्रक्रिया, पारदर्शिता और जवाबदेही का है। इसलिए आवश्यक है कि प्रशासन इस विषय पर शीघ्र आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी करे और आवश्यकता होने पर स्वतंत्र समीक्षा कराए, ताकि परिवार परामर्श केंद्र जैसी महत्वपूर्ण संस्था की विश्वसनीयता और जनविश्वास अक्षुण्ण बना रहे।








