आरंग संवाददाता – सोमन साहू
शासकीय प्राथमिक एवं पूर्व माध्यमिक विद्यालय गुखेरा में ‘शाला प्रवेश उत्सव’ बेहद धूमधाम और हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। नवप्रवेशी बच्चों के चेहरे उस वक्त खिल उठे, जब स्कूल प्रबंधन और जनप्रतिनिधियों ने फूलों के हार पहनाकर, मुंह मीठा कराकर और निःशुल्क पाठ्यपुस्तकें सौंपकर उनका आत्मीय स्वागत किया।
इस गरिमामयी समारोह में केवल नए बच्चों का स्वागत ही नहीं हुआ, बल्कि बीते सत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले कक्षा 1 से 8 तक के प्रथम एवं द्वितीय स्थान प्राप्त मेधावी विद्यार्थियों को मेडल और प्रतीक चिन्ह (मोमेंटो) देकर सम्मानित किया गया। इस सराहना से बच्चों का उत्साह देखते ही बन रहा था

कार्यक्रम में सरपंच रेवती पुरुषोत्तम सोनवानी बच्चों को पूरी लगन से अच्छी पढ़ाई करने और हमेशा अपने गुरुजनों की आज्ञा का पालन करने के लिए प्रेरित किया। तथा शाला विकास समिति अध्यक्ष रेखराज़ देवांगन ने
सभी छात्र-छात्राओं को नए सत्र की बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
हरीश दीवान (संकुल समन्वयक) कहा कि शाला प्रवेश उत्सव वह खूबसूरत पल है जो बच्चों के मन को स्कूल के माहौल से जोड़ता है। इसके साथ ही उन्होंने शिक्षकों को शासन की गाइडलाइन के अनुसार नियमित होमवर्क देने, कॉपियां जांचने और स्कूल परिसर को पर्यावरण के अनुकूल हरा-भरा बनाने का आह्वान किया।
कार्यक्रम का सफल संचालन प्राथमिक शाला के प्रधान पाठक अरविंद वैष्णव एवं शिक्षक रामनारायण कन्नौजे ने अपनी स्वरचित बाल कविताओं के माध्यम से बेहद आकर्षक अंदाज में किया।
उत्सव के विशेष आकर्षण के रूप में बच्चों के लिए ‘न्योता भोज’ का आयोजन किया गया, जिसमें उन्हें स्वादिष्ट खीर, पूड़ी और मिठाइयाँ परोसी गईं। बच्चों ने पूरे संस्कार के साथ भोजन मंत्र का जाप किया और स्कूल परिसर में गूंजते हुए गगनभेदी शैक्षिक नारे भी बुलंद किए।
इस अवसर पर उपसरपंच गंगा घासीराम कुर्रे, पंच डेविड ढीढी, कुशाल देवांगन, परशु रात्रे सहित पालक नीतू देवांगन, नेहा कुर्रे, मनोरमा रात्रे, चम्पेश्वर देवांगन आदि विशेष रूप से उपस्थित रहे।
कार्यक्रम को सफल बनाने में पूर्व माध्यमिक शाला के प्रधान पाठक के.के. साहू, शिक्षक विमला चौहान, फातिमा जांगड़े, नोहर लाल यादव, मध्याह्न भोजन स्व-सहायता समूह की डिगेस्वरी यादव, सीमा यादव, पूजा यादव, ललिता यादव और सफाई कर्मी विनोद रात्रे, पुरुषोत्तम सोनवानी,सहित बड़ी संख्या में माताओं का सराहनीय योगदान रहा।








