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महतारी वंदन योजना पर विधानसभा में तीखी बहस, आंकड़ों में उलझीं मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े, विधायक उमेश पटेल ने पूछे तीखे सवाल

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रायपुर संवाददाता – रघुराज
रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान महतari वंदन योजना को लेकर सदन में भारी हंगामा और तीखी बहस देखने को मिली। कांग्रेस विधायक और पूर्व मंत्री उमेश पटेल ने महतारी वंदन योजना के क्रियान्वयन और अपात्र किए गए लाभार्थियों के आंकड़ों को लेकर साय सरकार को कटघरे में खड़ा किया। इस दौरान महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े विपक्ष के सवालों और आंकड़ों के इस चक्रव्यूह में उलझती नजर आईं, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
विधायक उमेश पटेल ने सदन में सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों में भारी विसंगतियां हैं। उन्होंने प्रपत्र ‘अ’ और प्रपत्र ‘ब’ का हवाला देते हुए बताया कि पहली किस्त मिलने के बाद लगभग 1 लाख 55 हजार 655 ऐसी महिलाएं हैं, जिन्हें अब योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है। वहीं दूसरी तरफ, प्रपत्र ‘ब’ में काटे गए या अपात्र किए गए हितग्राहियों की संख्या केवल 54 हजार 100 बताई गई है। पटेल ने सीधे तौर पर मंत्री से पूछा कि आखिर इन दोनों आंकड़ों में इतना बड़ा अंतर क्यों है और बाकी की करीब 1 लाख महिलाएं कहां गईं?
इस सवाल के जवाब में मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि जिन महिलाओं को वर्तमान में राशि नहीं मिल रही है, उनमें से कई ऐसी हैं जिनका ई-केवाईसी (e-KYC) नहीं हो पाया है, कुछ की मृत्यु हो चुकी है और कुछ अपात्र हो गई हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिन महिलाओं का भुगतान ई-केवाईसी न होने के कारण रोका गया है, वे अपात्र नहीं हैं। जैसे ही उनका ई-केवाईसी वेरिफिकेशन पूरा होगा, उन्हें योजना का लाभ दोबारा मिलने लगेगा। उन्होंने बताया कि ई-केवाईसी कराने की अंतिम तिथि को 30 जून से बढ़ाकर अब 30 जुलाई कर दिया गया है।
हालांकि, जब उमेश पटेल ने प्रदेश में ई-केवाईसी के कारण लंबित मामलों के प्रतिशत पर सवाल किया, तो आंकड़ों को लेकर सदन में और अधिक भ्रम की स्थिति पैदा हो गई। मंत्री ने पहले इसे 0.2 प्रतिशत और फिर बाद में सुधार करते हुए इसे लगभग 2 प्रतिशत बताया। पटेल ने मई महीने के विभागीय आंकड़ों का संदर्भ देते हुए कहा कि अधिकारियों के अनुसार केवल 37 हजार महिलाओं का ई-केवाईसी पेंडिंग था, तो फिर मंत्री जी के पास 1 लाख से अधिक लंबित होने का आंकड़ा कहां से आ रहा है।
बहस उस समय और अधिक संवेदनशील हो गई जब मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने विसंगति को शांत करने के लिए यह कह दिया कि लगभग 1 लाख से अधिक महिलाएं मृत हो चुकी हैं। इस पर हैरान होते हुए विधायक उमेश पटेल ने तंज कसा और कहा कि क्या महज दो साल के भीतर छत्तीसगढ़ में योजना का लाभ ले रहीं 1 लाख से अधिक महिलाओं की मृत्यु हो गई? उन्होंने मंत्री से अपने अधिकारियों द्वारा दिए गए आंकड़ों को दोबारा दुरुस्त कराने की मांग की।
इसके अलावा, उमेश पटेल ने एक और अहम मुद्दा उठाते हुए पूछा कि पहली किस्त मिलने के बाद 2 हजार 750 महिलाओं को किस आधार पर अपात्र घोषित किया गया, क्योंकि प्रपत्र में इसका कोई स्पष्ट कारण नहीं लिखा था। मंत्री ने इस पर जवाब देते हुए कहा कि त्वरित गति से फॉर्म भरवाए जाने के कारण कई दोहरे आवेदन आ गए थे, कुछ शासकीय सेवकों और उनके परिजनों ने आवेदन कर दिया था, और कुछ आवेदिकाओं की उम्र 21 वर्ष से कम थी, जिसके कारण उन्हें बाद में अपात्र किया गया। विपक्ष ने इस गोलमोल जवाब पर असंतोष व्यक्त करते हुए कहा कि मंत्री जी मूल कारणों को स्पष्ट नहीं कर पा रही हैं।
सदन में इस बात को लेकर भी हंगामा हुआ कि मार्च 2024 के बाद से महतारी वंदन योजना का ऑनलाइन पोर्टल बंद है। उमेश पटेल ने सरकार से पूछा कि यह पोर्टल दोबारा कब खोला जाएगा ताकि नवविवाहित महिलाएं अपना नाम इस योजना से जोड़ सकें। इस पर मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने पलटवार करते हुए कहा कि यह मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का सुशासन है कि सरकार बनते ही दो महीने के भीतर महिलाओं को महतारी वंदन योजना का लाभ देना शुरू कर दिया गया, जबकि पिछली कांग्रेस सरकार ने अपनी घोषणाएं पूरी नहीं की थीं।
इस तीखी नोकझोंक के बाद सदन में विपक्षी सदस्यों ने जमकर नारेबाजी की और छत्तीसगढ़ की महिलाओं के साथ अन्याय बंद करने के नारे लगाए। इस पूरी बहस के दौरान मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े विपक्ष के तीखे सवालों का सटीक और स्पष्ट जवाब देने के लिए संघर्ष करती दिखीं, जिससे सदन का माहौल काफी गरमा गया।

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