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म्यूल अकाउंट के जरिए 18.17 लाख की साइबर ठगी का खुलासा, चांपा पुलिस ने महिला सहित दो आरोपियों को किया गिरफ्तार

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संवाददाता – राजेन्द्र जायसवाल
जिला जांजगीर-चांपा, 20 जुलाई। साइबर अपराधों पर प्रभावी अंकुश लगाने की दिशा में जांजगीर-चांपा पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। पुलिस मुख्यालय रायपुर के निर्देश पर चलाए जा रहे अभियान के तहत थाना चांपा पुलिस ने म्यूल अकाउंट के माध्यम से साइबर ठगों की मदद करने वाले एक महिला सहित दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जांच में लगभग 18,17,216 रुपये की ऑनलाइन ठगी का खुलासा हुआ है। गिरफ्तार दोनों आरोपियों को न्यायालय में पेश कर न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया है।
पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी कमीशन के लालच में अपने नाम से बैंक खाते खुलवाकर साइबर अपराधियों को उपलब्ध कराते थे। इन खातों का उपयोग देश के विभिन्न राज्यों में ऑनलाइन ठगी की रकम को इधर-उधर ट्रांसफर करने के लिए किया जाता था। इससे ठगी करने वाले मुख्य अपराधियों तक पहुंचना मुश्किल हो जाता था।
समन्वय पोर्टल से प्राप्त इनपुट के आधार पर थाना चांपा पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों, बैंकिंग ट्रांजेक्शन और डिजिटल रिकॉर्ड की गहन जांच की। जांच में पुष्टि हुई कि ठगी की राशि आरोपियों द्वारा उपलब्ध कराए गए बैंक खातों में ट्रांसफर की गई थी।
गिरफ्तार आरोपी
पिंकी डडसेना (37 वर्ष) निवासी बरपालीकला, थाना नगरदा, जिला शक्ति।
सूरज जांगड़े (24 वर्ष) निवासी हसौद, थाना शक्ति।
क्या है म्यूल अकाउंट?
म्यूल अकाउंट वह बैंक खाता होता है जिसे कोई व्यक्ति लालच या कमीशन के बदले साइबर अपराधियों को उपयोग के लिए उपलब्ध कराता है। ऐसे खातों का इस्तेमाल ठगी की रकम को विभिन्न खातों में स्थानांतरित करने के लिए किया जाता है, जिससे अपराध की जांच जटिल हो जाती है। कानून के अनुसार अपना बैंक खाता साइबर अपराधियों को उपलब्ध कराने वाला व्यक्ति भी अपराध का सहभागी माना जाता है और उसके विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की जाती है।
पुलिस की अपील
जांजगीर-चांपा पुलिस ने आम नागरिकों से अपील की है कि किसी भी व्यक्ति के कहने पर अपना बैंक खाता, एटीएम कार्ड, चेकबुक, मोबाइल नंबर या ओटीपी किसी को उपलब्ध न कराएं। कमीशन या आसान कमाई के लालच में बैंक खाता उपलब्ध कराना गंभीर अपराध है और इसके लिए संबंधित व्यक्ति को भी जेल जाना पड़ सकता है।
इन अधिकारियों की रही महत्वपूर्ण भूमिका
इस कार्रवाई में थाना प्रभारी निरीक्षक अशोक वैष्णव, उप निरीक्षक सत्यम चौहान, प्रधान आरक्षक रुकसाना बानो, प्रशिक्षु उप निरीक्षक निकिता साहू, महिला आरक्षक संगीता लहरें तथा आरक्षक ईश्वरी राठौर की सराहनीय भूमिका रही।
यह कार्रवाई साइबर अपराधों के विरुद्ध जांजगीर-चांपा पुलिस की सतर्कता और तकनीकी जांच क्षमता का महत्वपूर्ण उदाहरण है। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि साइबर ठगी से जुड़े मामलों में शामिल प्रत्येक व्यक्ति के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई आगे भी लगातार जारी रहेगी।

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