संवाददाता – विनीत पिल्लई
धमतरी की 55 वर्षीय कौशल्या साहू ने पति के निधन के बाद 30 साल बाद दोबारा पढ़ाई शुरू की और मनोविज्ञान में एमए की डिग्री हासिल कर मिसाल कायम की।
धमतरी की 55 वर्षीय कौशल्या साहू ने पति के निधन के बाद 30 साल बाद दोबारा पढ़ाई शुरू की और मनोविज्ञान में एमए की डिग्री हासिल कर मिसाल कायम की। जानिए उनकी प्रेरक कहानी
55 वर्षीय महिला ने 30 साल बाद एमए किया। धमतरी। कोरोना महामारी ने जब कौशल्या साहू से उनके जीवनसाथी को छीन लिया, तब लगा मानो जिंदगी थम गई हो। लेकिन उन्होंने आंसुओं में डूबने के बजाय अपने अधूरे सपनों को जीने का फैसला किया। कौशल्या ने ये साबित किया कि उम्र सिर्फ एक संख्या है और सपनों की कोई समय-सीमा नहीं होती।
यदि इरादे मजबूत हों तो जीवन की सबसे कठिन परिस्थितियां भी मंजिल तक पहुंचने से नहीं रोक सकतीं। धमतरी की 55 वर्षीय कौशल्या साहू ने शादी के बाद करीब 30 साल पहले छूटी पढ़ाई को फिर से शुरू किया और 55 वर्ष की उम्र में मनोविज्ञान विषय से एमए की डिग्री हासिल कर यह साबित कर दिया कि हालात कितने भी कठिन क्यों न हों, मजबूत इरादों के आगे हार मान लेते हैं।
आज कौशल्या की कहानी सिर्फ एक डिग्री हासिल करने की नहीं, बल्कि टूटकर भी दोबारा खड़े होने की प्रेरक मिसाल बन गई है।। शादी के बाद लगभग 30 वर्षों तक पढ़ाई से दूर रहीं, फिर जीवन ने ऐसा कठिन मोड़ लिया कि पति का साया भी सिर से उठ गया। लेकिन उन्होंने टूटने के बजाय खुद को संभाला, किताबें फिर से उठाईं और आज मनोविज्ञान में एमए की डिग्री हासिल कर हजारों महिलाओं और युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई हैं।
पति के निधन के बाद लिया जिंदगी बदलने का फैसला
कौशल्या साहू ने 12वीं तक पढ़ाई की थी, लेकिन विवाह के बाद उनकी शिक्षा बीच में ही छूट गई। वर्ष 2020 में कोरोना महामारी के दौरान पति के निधन ने उन्हें गहरे सदमे में डाल दिया। इसी कठिन दौर में उन्होंने तय किया कि अब वे अपनी अधूरी पढ़ाई पूरी करेंगी और शिक्षा के माध्यम से अपने जीवन को नई दिशा देंगी।
30 साल बाद कॉलेज में लिया दाखिला
परिवार के सहयोग और हौसले के बल पर वर्ष 2021 में उन्होंने लगभग तीन दशक बाद दुर्ग के शासकीय विज्ञान महाविद्यालय में स्नातक में प्रवेश लिया। उम्र, पारिवारिक जिम्मेदारियां और लंबे अंतराल जैसी चुनौतियां उनके सामने थीं, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। लगातार मेहनत करते हुए वर्ष 2024 में स्नातक की पढ़ाई सफलतापूर्वक पूरी की।
यहीं नहीं रुकीं, अब एमए भी कर लिया
स्नातक के बाद भी उनका सीखने का सफर नहीं थमा। उन्होंने भिलाई के सेंट थॉमस कॉलेज में मनोविज्ञान विषय से एमए में प्रवेश लिया और वर्ष 2026 में स्नातकोत्तर परीक्षा भी सफलतापूर्वक उत्तीर्ण कर ली। यह उपलब्धि इस बात का उदाहरण है कि यदि संकल्प मजबूत हो तो कोई भी सपना अधूरा नहीं रहता।
परिवार और शिक्षकों को दिया सफलता का श्रेय
कौशल्या साहू अपनी इस उपलब्धि का श्रेय अपने परिवार और शिक्षकों को देती हैं। उन्होंने विशेष रूप से मनोविज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ. देबजानी मुखर्जी, सहायक प्राध्यापक डॉ. सुमिता सिंह और डॉ. अंकिता देशमुख के मार्गदर्शन और प्रोत्साहन को अपनी सफलता की महत्वपूर्ण वजह बताया।
समाज के लिए एक संदेश
कौशल्या साहू की कहानी उन सभी लोगों के लिए प्रेरणा है, जिन्होंने किसी कारणवश अपनी पढ़ाई बीच में छोड़ दी। उनका संदेश स्पष्ट है कि सीखने की कोई उम्र नहीं होती। यदि इच्छाशक्ति मजबूत हो और परिवार व शिक्षकों का साथ मिले, तो वर्षों बाद भी अधूरे सपनों को पूरा किया जा सकता है। वे भविष्य में भी उच्च शिक्षा जारी रखकर समाज की सेवा करना चाहती हैं।







