बीजापुर संवाददाता – पुकार बाफना
बीजापुर 25 जुलाई 2026- ग्राम चिन्नाकोडेपाल के 10 युवाओं ने एकजुट होकर गठित हिमसाराज पुरुष स्व-सहायता समूह के माध्यम से मछली पालन को आजीविका का साधन बनाकर आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश की है। सीमित संसाधनों और आर्थिक चुनौतियों के बावजूद समूह ने सामूहिक प्रयास, बचत और श्रमदान के बल पर सफलता हासिल की है।
समूह के अध्यक्ष सुकल तेलम एवं सचिव प्रदीप तेलम के नेतृत्व में 10 सदस्यीय समूह ने ₹50 हजार की चक्रीय निधि के सहयोग से मछली पालन का कार्य शुरू किया। समूह गठन से पहले अधिकांश सदस्य पारंपरिक खेती एवं मजदूरी पर निर्भर थे, जिससे परिवार का भरण-पोषण करना कठिन हो रहा था। बेहतर आय की तलाश में सदस्यों ने सामूहिक रूप से मछली पालन अपनाने का निर्णय लिया।
शुरुआती दौर में समूह के सामने आधुनिक तकनीक की जानकारी और पर्याप्त पूंजी का अभाव था। सदस्यों ने नियमित बचत शुरू की तथा श्रमदान कर तालाब की साफ-सफाई, गहरीकरण और पानी की गुणवत्ता में सुधार किया। इसके बाद तालाब में रोहू, कतला जैसी उन्नत प्रजातियों के मत्स्य बीज डाले गए। सभी सदस्यों ने जिम्मेदारियां बांटकर तालाब की नियमित देखरेख की, जिससे मछलियों का बेहतर विकास हुआ।
लगभग आठ माह की मेहनत के बाद समूह को पहली बड़ी सफलता मिली। तालाब से अच्छी गुणवत्ता की मछलियों का उत्पादन हुआ, जिनकी बिक्री स्थानीय एवं आसपास के बाजारों में की गई। इससे समूह की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई और सदस्यों की आर्थिक स्थिति मजबूत होने लगी।
हिमसाराज स्व-सहायता समूह की यह सफलता दर्शाती है कि सामूहिक प्रयास, अनुशासित बचत, वैज्ञानिक पद्धति और निरंतर मेहनत से ग्रामीण क्षेत्रों में भी स्वरोजगार के बेहतर अवसर विकसित किए जा सकते हैं। समूह आज क्षेत्र के अन्य युवाओं के लिए प्रेरणा बनकर आत्मनिर्भरता और सामुदायिक विकास का संदेश दे रहा है।







