रायपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित CGPSC भर्ती घोटाले में अब प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने भी सक्रिय भूमिका निभाते हुए जांच का दायरा बढ़ा दिया है। मामले में छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) के पूर्व अध्यक्ष एवं सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी टामन सिंह सोनवानी को ईडी ने गिरफ्तार कर लिया है। विशेष अदालत ने उन्हें पूछताछ के लिए 7 दिन की रिमांड पर भेज दिया है।
अब तक इस मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) कर रही थी, लेकिन ईडी की एंट्री के बाद भर्ती प्रक्रिया से जुड़े कथित आर्थिक लेन-देन, अवैध कमाई और मनी लॉन्ड्रिंग के पहलुओं की भी जांच की जाएगी। एजेंसी का मानना है कि भर्ती घोटाले से जुड़े पैसों के प्रवाह, लाभार्थियों और कथित नेटवर्क की परतें पूछताछ के दौरान खुल सकती हैं।
कोर्ट ने दी 7 दिन की रिमांड
ईडी ने विशेष अदालत में आवेदन प्रस्तुत कर सोनवानी से विस्तृत पूछताछ की आवश्यकता बताई। एजेंसी का कहना है कि जांच के दौरान ऐसे संकेत मिले हैं, जिनसे वित्तीय अनियमितताओं और संदिग्ध लेन-देन की आशंका मजबूत हुई है। अदालत ने ईडी की दलीलों को स्वीकार करते हुए सोनवानी को सात दिन की रिमांड पर सौंप दिया।
क्या है पूरा मामला?
CGPSC भर्ती प्रक्रिया को लेकर लंबे समय से विवाद बना हुआ है। आरोप है कि वर्ष 2020 से 2022 के बीच आयोजित भर्ती परीक्षाओं और साक्षात्कारों में पारदर्शिता का पालन नहीं किया गया तथा प्रभावशाली राजनीतिक और प्रशासनिक परिवारों से जुड़े उम्मीदवारों को लाभ पहुंचाया गया। डिप्टी कलेक्टर, डीएसपी समेत कई महत्वपूर्ण पदों पर चयन को लेकर गंभीर सवाल उठे थे।
मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार ने जांच CBI को सौंपी थी। सीबीआई ने अपनी जांच में कई दस्तावेज, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य और अन्य सामग्री जब्त की थी तथा कई लोगों को आरोपी बनाया था।
अब फोकस पैसों के ट्रेल पर
सूत्रों के अनुसार, ईडी यह पता लगाने का प्रयास करेगी कि कथित भर्ती अनियमितताओं से जुड़े आर्थिक लाभ किसे मिले, धन का प्रवाह किन माध्यमों से हुआ और क्या इस पूरे प्रकरण में कोई संगठित नेटवर्क सक्रिय था। जांच एजेंसी वित्तीय दस्तावेजों, बैंकिंग लेन-देन और अन्य संबंधित रिकॉर्ड की भी पड़ताल कर रही है।
ईडी की कार्रवाई के बाद CGPSC भर्ती घोटाले की जांच एक नए मोड़ पर पहुंच गई है। अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि मनी लॉन्ड्रिंग जांच के दौरान और कौन-कौन से नाम तथा तथ्य सामने आते हैं।







