कुसमुंडा संवाददाता – गुरदीप सिंह
एसईसीएल की नेहरू नगर-कुसमुंडा कॉलोनी में दूषित जलापूर्ति से श्रमिकों और परिवारों में भारी आक्रोश, बीमारी फैलने की आशंका
कुसमुंडा। एसईसीएल की नेहरू नगर-कुसमुंडा कॉलोनी में पिछले चार दिनों से पानी सप्लाई पाइपलाइन फटने के कारण पेयजल आपूर्ति पूरी तरह ठप रही। लंबे इंतजार के बाद पाइपलाइन की मरम्मत कर जलापूर्ति तो बहाल कर दी गई, लेकिन राहत मिलने के बजाय कॉलोनीवासियों की परेशानी और बढ़ गई। लोगों के घरों में कोयले की धूल से युक्त, मटमैला, कीचड़ भरा और बदबूदार पानी पहुंच रहा है। इससे खदान श्रमिकों और उनके परिवारों में भारी आक्रोश व्याप्त है।
बारिश के मौसम में दूषित पानी बना बीमारी का खतरा
लगातार हो रही बारिश के बीच दूषित पानी की आपूर्ति ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। कॉलोनीवासियों का कहना है कि नलों से निकल रहे पानी में कोयले के महीन कण, मिट्टी और गंदगी साफ दिखाई दे रही है। इस पानी का उपयोग पीने, खाना बनाने या घरेलू कार्यों के लिए करना स्वास्थ्य के लिए बेहद जोखिम भरा है। सबसे अधिक खतरा बच्चों, बुजुर्गों और पहले से बीमार लोगों पर मंडरा रहा है। पेट दर्द, उल्टी-दस्त, त्वचा संक्रमण और जलजनित बीमारियों के फैलने की आशंका लगातार बढ़ रही है। यदि जल्द स्थिति नहीं सुधरी तो कॉलोनियों में महामारी जैसी स्थिति बनने से इनकार नहीं किया जा सकता।

फिल्टर प्लांट की सफाई नहीं होने का आरोप
कॉलोनीवासियों और श्रमिक संगठनों के प्रतिनिधियों का आरोप है कि एसईसीएल के केंद्रीय फिल्टर प्लांट की नियमित साफ-सफाई और रखरखाव पूरी तरह लापरवाही की भेंट चढ़ गया है। जानकारी के अनुसार फिल्टर प्लांट की सफाई का टेंडर जून माह में ही समाप्त हो चुका था, लेकिन संबंधित ठेकेदार द्वारा समय पर सफाई नहीं कराई गई। बारिश शुरू होने से पहले फिल्टर प्लांट का आवश्यक मेंटेनेंस और तकनीकी जांच भी नहीं की गई, जिसका खामियाजा अब हजारों परिवार भुगत रहे हैं।
केमिकल और क्लोरीन का सही उपयोग नहीं होने का आरोप
स्थानीय लोगों का कहना है कि पानी को शुद्ध करने के लिए आवश्यक केमिकल, फिटकरी और क्लोरीन का निर्धारित मात्रा में उपयोग नहीं किया जा रहा है। इसके कारण नदी का मटमैला और दूषित पानी बिना पर्याप्त शोधन के सीधे लोगों के घरों की टंकियों तक पहुंच रहा है। इससे फिल्टर प्लांट की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
‘नाम का ही फिल्टर प्लांट’—श्रमिक संगठनों का आरोप
श्रमिक संगठन के प्रतिनिधियों और कॉलोनीवासियों का आरोप है कि एसईसीएल का केंद्रीय फिल्टर प्लांट केवल औपचारिकता निभाने के लिए संचालित किया जा रहा है। यदि प्लांट पूरी क्षमता और मानकों के अनुरूप कार्य कर रहा होता तो लोगों के घरों तक इस तरह का गंदा और बदबूदार पानी नहीं पहुंचता। उनका कहना है कि फिल्टर प्लांट में आवश्यक रसायनों का सही अनुपात में उपयोग नहीं होने के कारण पूरी जल शोधन व्यवस्था सवालों के घेरे में है।
प्रबंधन से तत्काल कार्रवाई की मांग
कॉलोनीवासियों ने एसईसीएल प्रबंधन से मांग की है कि दूषित जलापूर्ति को तत्काल बंद कर शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराया जाए। साथ ही केंद्रीय फिल्टर प्लांट की तकनीकी जांच कराई जाए, पाइपलाइन और जलशोधन व्यवस्था का समुचित रखरखाव सुनिश्चित किया जाए तथा जिम्मेदार अधिकारियों और संबंधित ठेकेदार की जवाबदेही तय की जाए। लोगों का कहना है कि यदि जल्द समस्या का समाधान नहीं हुआ तो वे आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे।
लोगों का सवाल—क्या श्रमिकों की सेहत से हो रहा खिलवाड़?
एसईसीएल की कॉलोनियों में रहने वाले हजारों श्रमिक और उनके परिवार कंपनी की जलापूर्ति व्यवस्था पर निर्भर हैं। ऐसे में लगातार दूषित पानी की आपूर्ति और फिल्टर प्लांट की कथित लापरवाही कई गंभीर सवाल खड़े कर रही है। लोगों का कहना है कि कंपनी उत्पादन बढ़ाने पर तो ध्यान दे रही है, लेकिन श्रमिकों और उनके परिवारों को सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने जैसी बुनियादी सुविधा की अनदेखी की जा रही है। यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो यह समस्या बड़े स्वास्थ्य संकट का रूप ले सकती है।







