राज्य विधानसभा में परीक्षा संशोधन विधेयक पर चर्चा शुरू होने से पहले ही सदन में जोरदार हंगामा देखने को मिला। विपक्ष ने छात्रों की कथित पिटाई के मामले पर तत्काल चर्चा कराने की मांग को लेकर कार्यवाही में व्यवधान उत्पन्न किया, जिसके चलते निर्धारित विधायी कार्य आगे नहीं बढ़ सका।
सदन की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी सदस्यों ने छात्रों से जुड़े मुद्दे को उठाते हुए चर्चा की मांग की। इस दौरान नारेबाजी और विरोध के कारण सदन का माहौल गरमा गया। सरकार की ओर से तय एजेंडे के अनुसार परीक्षा संशोधन विधेयक पर चर्चा प्रस्तावित थी, लेकिन लगातार विरोध के चलते इस पर विचार-विमर्श शुरू नहीं हो सका।
विधानसभा अध्यक्ष ने स्थिति को सामान्य बनाने का प्रयास करते हुए कहा कि सभी दल आपसी सहमति और संसदीय परंपराओं के अनुरूप समाधान निकालें, ताकि सदन का कामकाज सुचारु रूप से चल सके। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि महत्वपूर्ण विधायी कार्यों को बाधित करना लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए उचित नहीं है।
सत्तापक्ष के नेताओं ने विपक्ष पर आरोप लगाया कि वह जनहित से जुड़े विधायी कार्यों को आगे बढ़ने से रोकने का प्रयास कर रहा है। उनका कहना है कि चर्चा और संवाद के लिए सदन सर्वोत्तम मंच है, लेकिन बार-बार के हंगामे से महत्वपूर्ण विषयों पर निर्णय लेने की प्रक्रिया प्रभावित हो रही है।
वहीं विपक्ष अपने रुख पर कायम रहा और कहा कि छात्रों से जुड़े मामले पर पहले चर्चा होना जरूरी है। हालांकि, लगातार गतिरोध के कारण परीक्षा संशोधन विधेयक पर बहस शुरू नहीं हो सकी और सदन का निर्धारित एजेंडा प्रभावित रहा।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि विपक्ष और सरकार के बीच सहमति नहीं बनती है तो आगामी दिनों में भी सदन की कार्यवाही बाधित होने की आशंका बनी रह सकती है, जिससे जनता से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा और निर्णय में देरी हो सकती है।







