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CG शिक्षक भर्ती के नए नियम से हजारों अभ्यर्थियों के भविष्य पर संकट: पात्रता की कट-ऑफ डेट बदलने से 10 हजार से अधिक उम्मीदवार भर्ती प्रक्रिया से बाहर होने की कगार पर

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रघुराज/रायपुर। छत्तीसगढ़ में 2292 पदों पर सहायक शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया आधिकारिक रूप से शुरू हो चुकी है। राज्य शासन द्वारा भर्ती प्रक्रिया शुरू किए जाने के साथ ही इसके पात्रता संबंधी नए नियमों को लेकर प्रदेश भर के डी.एल.एड. और टी.ई.टी. अभ्यर्थियों के बीच भारी असंतोष और विवाद की स्थिति निर्मित हो गई है। भर्ती के लिए लोक शिक्षण संचालनालय और संबंधित विभागों द्वारा 21 अगस्त तक ऑनलाइन आवेदन मंगाए गए हैं। हालांकि, इस बार भर्ती नियमों में किए गए एक बड़े बदलाव ने हजारों युवाओं के शिक्षक बनने के सपने पर पानी फेर दिया है।

​नई व्यवस्था के तहत विभाग ने स्पष्ट किया है कि आवेदन की अंतिम तिथि यानी 21 अगस्त तक अभ्यर्थियों के पास डी.एल.एड. की डिग्री और साथ ही सी.जी.टैट या सी.टैट पास होने का प्रमाण पत्र अनिवार्य रूप से होना चाहिए। इस नए प्रावधान के कारण प्रदेश के 10 हजार से भी अधिक अभ्यर्थी बिना परीक्षा दिए ही भर्ती प्रक्रिया से सीधे बाहर होने की स्थिति में आ गए हैं। इस निर्णय से उन युवाओं को सबसे बड़ा झटका लगा है जो आगामी शिक्षक पात्रता परीक्षा की तैयारी कर रहे थे।

​सीटेट अभ्यर्थियों के लिए बना नया धर्मसंकट
​इस पूरे विवाद के केंद्र में आगामी केंद्रीय शिक्षक पात्रता परीक्षा (सी.टैट.) की तिथि और भर्ती आवेदन की अंतिम तिथि के बीच का टकराव है। उल्लेखनीय है कि आगामी सी.टैट. परीक्षा की तिथि 6 सितंबर तय की गई है। नए नियमों के अनुसार आवेदन करने की अंतिम तिथि 21 अगस्त रखी गई है। इसका सीधा अर्थ यह है कि जो अभ्यर्थी 6 सितंबर को होने वाली सी.टैट. परीक्षा में शामिल होंगे और उसे पास भी कर लेंगे, वे भी इस सहायक शिक्षक भर्ती के लिए पूर्णतः अपात्र माने जाएंगे।

​अभ्यर्थियों का कहना है कि जब परीक्षा सितंबर में आयोजित हो रही है, तो अगस्त की कट-ऑफ डेट रखकर उन्हें अवसर से पूरी तरह वंचित कर दिया गया है। यदि वे परीक्षा में उत्कृष्ट अंक भी प्राप्त कर लेते हैं, तब भी आवेदन की अंतिम तिथि तक टी.ई.टी. प्रमाण पत्र न होने के कारण उनके आवेदन निरस्त कर दिए जाएंगे। इस स्थिति से प्रदेश के युवाओं में गहरा रोष व्याप्त है।

​शिक्षक भर्ती नोटिफिकेशन में भी लागू होगा यही नियम
​विभागीय सूत्रों और प्राप्त जानकारी के अनुसार, केवल सहायक शिक्षक ही नहीं बल्कि जल्द ही कर्मचारी चयन मंडल आयोग (व्यापमं) द्वारा शिक्षक पदों के लिए जारी होने वाले आगामी नोटिफिकेशन में भी इसी पात्रता नियम को लागू किया जाएगा। वहां भी आवेदन करने की अंतिम तारीख को ही शैक्षणिक व व्यावसायिक योग्यता की पात्रता का आधार बनाया जाएगा।

​इसका व्यापक असर यह होगा कि न केवल सहायक शिक्षक भर्ती, बल्कि आने वाली शिक्षक भर्ती प्रक्रियाओं में भी अंतिम वर्ष के अध्ययनरत छात्र और आगामी टी.ई.टी. परीक्षा देने वाले हजारों उम्मीदवार सीधे तौर पर अपात्र घोषित हो जाएंगे। इस आशंका से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं के भविष्य पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं।

​2019 और 2023 की भर्ती नियमों से किया गया बड़ा बदलाव
​अभ्यर्थी इस नए नियम का विरोध इसलिए भी कर रहे हैं क्योंकि इससे पूर्व हुई भर्ती परीक्षाओं में नियम पूरी तरह से अलग और छात्र हित में थे। वर्ष 2019 और वर्ष 2023 में आयोजित शिक्षक भर्तियों में परीक्षा परिणाम जारी होने की तिथि या फिर दस्तावेज सत्यापन की तिथि को पात्रता की अंतिम सीमा (डेडलाइन) माना गया था।

​उस समय जिन अभ्यर्थियों ने भर्ती प्रक्रिया के दौरान टी.ई.टी. परीक्षा उत्तीर्ण की थी या जिनका अंतिम परिणाम आ चुका था, वे सभी चयन के लिए पात्र मान लिए गए थे। परंतु इस बार आवेदन की अंतिम तिथि को ही कट-ऑफ डेट बनाने का निर्णय युवाओं पर बहुत भारी पड़ रहा है। अभ्यर्थियों का कहना है कि पूर्ववर्ती भर्तियों की तर्ज पर ही इस बार भी परिणाम जारी होने या सत्यापन की तिथि तक पात्रता की छूट दी जानी चाहिए।

​बीएड अभ्यर्थी पहले ही अमान्य, डी.एल.एड. वालों की भी बढ़ीं मुश्किलें
​वर्ष 2023 की शिक्षक भर्ती प्रक्रिया में सहायक शिक्षक पद के लिए डी.एल.एड. के साथ-साथ दो वर्षीय बी.एड. डिग्रीधारियों को भी अवसर प्रदान किया गया था। हालांकि सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों और नए निर्देशों के तहत इस बार बी.एड. अभ्यर्थियों को सहायक शिक्षक पद के लिए पूरी तरह से अमान्य कर दिया गया है।

​केवल डी.एल.एड. उत्तीर्ण अभ्यर्थियों को ही इस पद के लिए योग्य माना गया है। बी.एड. बाहर होने के बाद डी.एल.एड. अभ्यर्थियों को उम्मीद थी कि उन्हें पर्याप्त अवसर मिलेगा, लेकिन आवेदन की अंतिम तिथि की बाध्यता के कारण डी.एल.एड. कर रहे और टी.ई.टी. की तैयारी कर रहे हजारों युवाओं के हाथ से यह मौका भी निकलता दिख रहा है।

​चयन और प्रतीक्षा सूची की वैधता अवधि में बड़ी कटौती
​केवल पात्रता की तिथि ही नहीं, बल्कि इस बार भर्ती प्रक्रिया के बाद तैयार होने वाली चयन सूची (मेरिट लिस्ट) और प्रतीक्षा सूची (वेटिंग लिस्ट) की समयावधि में भी कटौती की गई है। वर्ष 2023 की भर्ती में चयन और प्रतीक्षा सूची जारी होने की तिथि से पूरे 1 वर्ष के लिए वैध होती थी, जिससे पद रिक्त रहने पर नीचे के अभ्यर्थियों को अवसर मिल जाता था।

​परंतु इस बार के नए नियमों में चयन सूची की वैधता को घटाकर मात्र 6 महीने कर दिया गया है। वहीं प्रतीक्षा सूची की वैधता अवधि को घटाकर 9 महीने तय किया गया है। समय सीमा कम होने से अभ्यर्थियों को डर है कि यदि समय पर प्रक्रिया पूरी नहीं हुई या न्यायालयीन मामलों में फंसी, तो सूची लैप्स हो जाएगी और कई पद खाली रह जाएंगे।

​अभ्यर्थियों ने की नियमों में संशोधन की मांग
​प्रदेश भर के प्रभावित अभ्यर्थियों ने राज्य सरकार, शिक्षा मंत्री और लोक शिक्षण संचालनालय से गुहार लगाई है कि भर्ती नियमों में तत्काल संशोधन किया जाए। युवाओं की मांग है कि पात्रता की डेडलाइन को 21 अगस्त की जगह परीक्षा परिणाम या दस्तावेज सत्यापन की तिथि तक बढ़ाया जाए ताकि 6 सितंबर को सी.टैट. देने वाले अभ्यर्थी भी इस भर्ती में शामिल हो सकें।

​अभ्यर्थियों का कहना है कि वर्षों के इंतजार के बाद प्रदेश में शिक्षक भर्ती निकली है। ऐसे में कड़े और व्यावहारिक रूप से कठिन नियमों के कारण 10 हजार से अधिक युवाओं को प्रक्रिया से बाहर करना उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ है। यदि शासन द्वारा समय रहते नियमों में ढील नहीं दी गई, तो अभ्यर्थी उग्र आंदोलन और कानूनी रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे।

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