Home कोरबा कोरबा में गेवरा कोयला क्षेत्र के सतत पुनर्प्रयोजन पर हितधारक बैठक आयोजित

कोरबा में गेवरा कोयला क्षेत्र के सतत पुनर्प्रयोजन पर हितधारक बैठक आयोजित

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हेमचंद्र सोनी/कोरबा।
कोरबा कलेक्टोरेट कार्यालय में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) कानपुर के जस्ट ट्रांजिशन रिसर्च सेंटर (JTRC) द्वारा गेवरा कोयला क्षेत्र के सतत पुनर्प्रयोजन (Sustainable Repurposing) विषय पर एक महत्वपूर्ण हितधारक बैठक (Stakeholders’ Meet) आयोजित की गई। बैठक का उद्देश्य खनन गतिविधियों में होने वाले क्रमिक बदलाव के साथ क्षेत्र के दीर्घकालिक सामाजिक, आर्थिक एवं पर्यावरणीय परिवर्तन पर विचार-विमर्श करना तथा भविष्य की पुनर्प्रयोजन रणनीतियों में स्थानीय समुदाय की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करना था।

बैठक में लगभग 75 प्रतिभागियों ने भाग लिया, जिनमें साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL) के वरिष्ठ अधिकारी, माइन क्लोजर एडवाइजरी कमेटी के सदस्य, स्थानीय ग्राम पंचायतों के सरपंच, पार्षद, विभिन्न विभागों के अधिकारी तथा अन्य प्रमुख हितधारक शामिल रहे।

बैठक के दौरान आईआईटी कानपुर के प्रोफेसर प्रदीप स्वर्णकार, अध्यक्ष, मानवीकी एवं सामाजिक विज्ञान विभाग तथा जस्ट ट्रांजिशन रिसर्च सेंटर (JTRC) के संस्थापक, ने वर्ष 2025 के अद्यतन माइन क्लोजर दिशानिर्देशों के अंतर्गत RECLAIM Framework के अनुरूप भविष्य की योजनाओं में स्थानीय समुदाय की भागीदारी सुनिश्चित करने पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि खनन गतिविधियों के समापन के बाद भी क्षेत्र सामाजिक, आर्थिक एवं पर्यावरणीय दृष्टि से सुदृढ़ बना रहे, इसके लिए स्थानीय समुदाय के सुझावों एवं आवश्यकताओं को योजनाओं का अभिन्न हिस्सा बनाया जाना चाहिए।

कोरबा कलेक्टर श्री कुणाल दुदावत ने क्षेत्र के रूपांतरण हेतु उपलब्ध नियामकीय एवं वित्तीय तंत्र की जानकारी साझा करते हुए भारत सरकार के कोयला मंत्रालय द्वारा न्याय-संगत रूपांतरण (Just Transition) की दिशा में किए जा रहे प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि खदान बंद होने के बाद भी क्षेत्र में रोजगार का पारिस्थितिकी तंत्र एवं आर्थिक अवसर बने रहें, इसके लिए समयबद्ध रूप से Just Transition गतिविधियों का क्रियान्वयन अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने इस दिशा में जिला प्रशासन की सक्रिय भूमिका को भी रेखांकित किया।

एसईसीएल गेवरा क्षेत्र के महाप्रबंधक (संचालन) श्री धीरज चौधरी ने बताया कि गेवरा खदान का संचालन वर्ष 1981 में मात्र 5 मिलियन टन वार्षिक उत्पादन क्षमता के साथ प्रारंभ हुआ था, जो वर्तमान में बढ़कर 70 मिलियन टन पर्यावरणीय स्वीकृत क्षमता (Environmental Clearance Capacity) तक पहुँच चुका है। उन्होंने बताया कि इस उपलब्धि के साथ गेवरा विश्व की दूसरी सबसे बड़ी कोयला खदान के रूप में स्थापित हो चुकी है।

उन्होंने यह भी जानकारी दी कि CETI गेवरा के माध्यम से परियोजना प्रभावित परिवारों (PAPs) के लिए कौशल प्रशिक्षण, स्वास्थ्य शिविर, कॉर्पोरेट सामाजिक दायित्व (CSR) के अंतर्गत शिक्षा सहायता तथा स्वरोजगार को प्रोत्साहित करने जैसी विभिन्न गतिविधियाँ संचालित की जा रही हैं। साथ ही, नवीन माइन क्लोजर प्रावधानों के अनुसार पाँच वर्षीय एस्क्रो राशि का न्यूनतम 25 प्रतिशत हिस्सा सामुदायिक विकास एवं आजीविका संवर्धन गतिविधियों के लिए अनिवार्य रूप से आरक्षित किया गया है।

बैठक का प्रमुख निष्कर्ष स्थानीय परिस्थितियों, चुनौतियों एवं जन-आकांक्षाओं पर हुई खुली और सार्थक चर्चा रही। प्रतिभागियों के सुझावों से साक्ष्य-आधारित पुनर्प्रयोजन (Evidence-based Repurposing) की प्रभावी रणनीतियाँ तैयार करने में सहायता मिलेगी, जिससे भविष्य की योजनाएँ स्थानीय आवश्यकताओं एवं अपेक्षाओं के अनुरूप विकसित की जा सकेंगी।

हितधारकों ने विशेष रूप से युवाओं एवं महिलाओं के लिए बहु-कौशल विकास (Multi-skill Development) को प्राथमिकता देने पर बल दिया। बैठक में प्रस्तावित पुनर्प्रयोजन विकल्पों में तकनीकी विकास, कृषि, पर्यटन, पारिस्थितिकीय पुनर्स्थापन (Ecological Restoration), आजीविका विविधीकरण, कौशल विकास तथा नवीकरणीय ऊर्जा (Renewable Energy) जैसे प्रमुख क्षेत्रों को भविष्य की संभावनाओं के रूप में चिन्हित किया गया।

बैठक में जिला प्रशासन की ओर से श्री देवेंद्र पटेल, अपर कलेक्टर, कोरबा; श्री सोबरन सिंह कंवर, मुख्य वन संरक्षक; श्री कुमार निसाद, जिला वन अधिकारी; तथा श्री प्रमोद कुमार, जिला खनिज अधिकारी उपस्थित रहे। एसईसीएल मुख्यालय की ओर से श्री पियूष किशोर, महाप्रबंधक एवं विभागाध्यक्ष, Mine Closure एवं Repurposing Cell, तथा एसईसीएल गेवरा क्षेत्र की ओर से श्री धीरज चौधरी, महाप्रबंधक (संचालन) सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। इसके अतिरिक्त आईआईटी कानपुर से प्रोफेसर प्रदीप स्वर्णकार एवं जस्ट ट्रांजिशन रिसर्च सेंटर (JTRC) की शोध टीम ने भी बैठक में सहभागिता की।

बैठक का समापन इस संकल्प के साथ हुआ कि गेवरा क्षेत्र के सतत एवं न्याय-संगत रूपांतरण के लिए स्थानीय समुदाय, जिला प्रशासन, एसईसीएल तथा शैक्षणिक संस्थानों के बीच समन्वित प्रयासों को आगे भी निरंतर जारी रखा जाएगा।

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