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वेदांता पावर हादसे की जांच अब तक अधूरी क्यों? 30 दिन की समय-सीमा के बावजूद रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं, जांच लंबित रखने पर उठे गंभीर सवाल

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कोरबा/सक्ती/बिलासपुर
वेदांता पावर लिमिटेड, सिंघितराई, तहसील डभरा, जिला सक्ती में दिनांक 14 अप्रैल 2026 को बॉयलर के स्टीम पाइप के वाटर सप्लाई पाइप के ज्वाइंट में तकनीकी खराबी के कारण हुई गंभीर औद्योगिक दुर्घटना की जांच को लेकर अब गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
छत्तीसगढ़ शासन, सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी आदेश क्रमांक ESTB/11647/2026-GAD-6 दिनांक 17 अप्रैल 2026 के अनुसार इस दुर्घटना में प्रभावित श्रमिकों एवं मृत श्रमिकों के संबंध में जांच हेतु संभागायुक्त, बिलासपुर संभाग को जांच अधिकारी नियुक्त किया गया था।
शासन के उक्त आदेश में जांच के लिए स्पष्ट रूप से तीन बिंदु निर्धारित किए गए थे—
1. घटना कब और कैसे घटित हुई?
2. वे परिस्थितियां एवं कारण क्या थे, जिनके फलस्वरूप घटना हुई?
3. भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के संबंध में क्या सुझाव हैं?
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि शासनादेश में जांच अधिकारी को 30 दिनों के भीतर जांच पूर्ण कर अपना जांच प्रतिवेदन राज्य शासन को प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया था।
इसके बावजूद, संभागायुक्त कार्यालय द्वारा उपलब्ध कराई गई सूचना के अनुसार जांच कार्यवाही अभी भी प्रगति पर बताई जा रही है और सूचना उपलब्ध कराना संभव नहीं बताया गया है।
इस स्थिति में गंभीर प्रश्न उठता है कि जब शासन द्वारा जांच पूरी करने के लिए स्पष्ट रूप से 30 दिनों की समय-सीमा निर्धारित की गई थी, तो लगभग तीन माह से अधिक समय बीत जाने के बाद भी जांच कार्यवाही पूरी क्यों नहीं की गई?
यदि जांच निर्धारित अवधि में पूरी नहीं हो सकी, तो निम्न प्रश्नों का जवाब सार्वजनिक किया जाना आवश्यक है—
– जांच की समय-सीमा बढ़ाने के संबंध में क्या कोई आधिकारिक आदेश जारी किया गया है?
– यदि हां, तो उक्त आदेश किस प्राधिकारी द्वारा और किस तारीख को जारी किया गया?
– जांच में देरी के वास्तविक कारण क्या हैं?
– क्या जांच अधिकारी द्वारा शासन से समय-वृद्धि की अनुमति मांगी गई थी?
– क्या शासन ने जांच की अवधि बढ़ाने की अनुमति दी है?
– यदि कोई समय-वृद्धि आदेश जारी नहीं हुआ है, तो निर्धारित समय-सीमा के बाद जांच को किस कानूनी अथवा प्रशासनिक आधार पर लंबित रखा गया है?
यह भी गंभीर चिंता का विषय है कि इतनी बड़ी औद्योगिक दुर्घटना, जिसमें अनेक श्रमिक प्रभावित हुए और श्रमिकों की मृत्यु हुई, उसकी जांच रिपोर्ट अब तक सार्वजनिक नहीं की गई है।
इस मामले में यह आशंका उत्पन्न होना स्वाभाविक है कि कहीं जांच कार्यवाही को जानबूझकर लंबित रखने के नाम पर पूरे मामले को दबाने का प्रयास तो नहीं किया जा रहा है? क्या जांच में अनावश्यक देरी कर कंपनी प्रबंधन को बचाने अथवा उसे क्लीनचिट देने की भूमिका तैयार करने का प्रयास किया जा रहा है?
यह स्पष्ट किया जाना आवश्यक है कि जांच में देरी केवल प्रशासनिक विषय नहीं है, बल्कि यह मृत एवं प्रभावित श्रमिकों के परिवारों को न्याय दिलाने तथा भविष्य में ऐसी दुर्घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने से जुड़ा गंभीर सार्वजनिक हित का मामला है।
मांग की जाती है कि छत्तीसगढ़ शासन एवं संभागायुक्त, बिलासपुर तत्काल स्पष्ट करें कि—
1. जांच अब तक पूर्ण क्यों नहीं हुई;
2. 30 दिनों की निर्धारित समय-सीमा का पालन क्यों नहीं किया गया;
3. समय-सीमा बढ़ाने संबंधी आदेश की प्रमाणित प्रति सार्वजनिक की जाए;
4. जांच में हुई देरी के कारणों को सार्वजनिक किया जाए;
5. जांच रिपोर्ट को शीघ्र पूर्ण कर सार्वजनिक किया जाए; तथा
6. यदि जांच में अनावश्यक देरी या लापरवाही हुई है तो जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए।
श्रमिकों की जान से जुड़े इतने गंभीर मामले में जांच को अनिश्चितकाल तक लंबित रखना स्वीकार्य नहीं है। शासन को इस मामले में पारदर्शिता सुनिश्चित करते हुए जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करनी चाहिए और दोषी पाए जाने वाले व्यक्तियों एवं कंपनी प्रबंधन के विरुद्ध कानून के अनुसार कार्रवाई करनी चाहिए।
जारीकर्ता:
संजय कुमार पटेल
जिला सचिव, इंटक, कोरबा
सदस्य, ऑल इंडिया प्रोफेशनल कांग्रेस

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