संवाददाता – राजेन्द्र जायसवाल
जिला जांजगीर-चांपा
जिले में यदि एक साधारण राशन कार्ड की त्रुटि सुधारने के लिए किसी गरीब हितग्राही को सीधे मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 में शिकायत दर्ज करानी पड़े, तो यह स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। आखिर ऐसी स्थिति क्यों बनी कि ग्राम पंचायत, जनपद पंचायत और खाद्य विभाग के स्तर पर समाधान नहीं हुआ और एक सामान्य प्रशासनिक त्रुटि को सुधारने के लिए मुख्यमंत्री स्तर की शिकायत व्यवस्था का सहारा लेना पड़ा?
ग्राम भवतरा निवासी देवेंद्र दिनकर का मामला इसी व्यवस्था की वास्तविक तस्वीर सामने लाता है। राशन कार्ड में दर्ज एक त्रुटि के कारण उनका परिवार लंबे समय तक सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत मिलने वाले राशन से वंचित रहा। यह केवल एक दस्तावेज़ की गलती नहीं थी, बल्कि एक परिवार के भोजन और उसके अधिकार से जुड़ा विषय था।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में शिकायत नहीं की जाती, तो क्या यह त्रुटि कभी सुधरती? क्या स्थानीय अधिकारी स्वयं जिम्मेदारी लेकर समय पर समस्या का समाधान करते? यदि प्रत्येक छोटे-छोटे कार्य के लिए आम नागरिक को मुख्यमंत्री हेल्पलाइन का सहारा लेना पड़े, तो फिर स्थानीय प्रशासन और संबंधित विभागों की जवाबदेही किसलिए है?
मुख्यमंत्री हेल्पलाइन का उद्देश्य गंभीर एवं लंबित शिकायतों का समाधान करना है, न कि ऐसे सामान्य कार्यों का, जिन्हें स्थानीय स्तर पर कुछ ही दिनों में निपटाया जा सकता है। यदि राशन कार्ड सुधार जैसी नियमित प्रक्रिया भी स्थानीय कार्यालयों से नहीं हो पा रही है, तो यह प्रशासनिक संवेदनहीनता और कार्यप्रणाली की कमजोरी को दर्शाता है।
यह घटना केवल एक व्यक्ति की समस्या नहीं है, बल्कि उन हजारों नागरिकों की आवाज है जो कार्यालयों के चक्कर काटते हैं, आवेदन देते हैं और महीनों तक समाधान का इंतजार करते रहते हैं। जब तक शिकायत ऊपर नहीं पहुंचती, तब तक कई मामलों में कार्रवाई नहीं होती। ऐसी व्यवस्था आम जनता के विश्वास को कमजोर करती है।
अब आवश्यकता इस बात की है कि जिला प्रशासन केवल शिकायतों के निराकरण का श्रेय लेने तक सीमित न रहे, बल्कि यह भी समीक्षा करे कि ऐसी शिकायतें पैदा ही क्यों हो रही हैं। संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय हो, कार्यप्रणाली में सुधार हो और आम नागरिकों को उनके अधिकार के लिए मुख्यमंत्री हेल्पलाइन तक जाने की मजबूरी न रहे।
एक प्रभावी प्रशासन वही माना जाएगा, जहाँ नागरिक की समस्या स्थानीय स्तर पर ही समयबद्ध ढंग से हल हो जाए। यदि छोटी-छोटी समस्याओं के समाधान के लिए भी लोगों को मुख्यमंत्री हेल्पलाइन का सहारा लेना पड़े, तो यह उपलब्धि नहीं, बल्कि स्थानीय प्रशासन के लिए आत्ममंथन का विषय है।







