Home खेल बैडमिंटन वर्ल्ड चैंपियनशिप में बंदरों से निपटने का अनोखा इंतजाम, लंगूर की...

बैडमिंटन वर्ल्ड चैंपियनशिप में बंदरों से निपटने का अनोखा इंतजाम, लंगूर की आवाज निकालेंगे ‘मंकी व्हिस्परर’

9
0

राजधानी में 17 अगस्त से शुरू होने वाली बैडमिंटन वर्ल्ड चैंपियनशिप के लिए इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम को पूरी तरह तैयार किया जा रहा है। खिलाड़ियों के लिए कोर्ट, दर्शकों के लिए बैठने की व्यवस्था और स्टेडियम की सुविधाओं को बेहतर बनाने के साथ आयोजकों के सामने एक ऐसी चुनौती भी है, जिसका जिक्र आमतौर पर किसी अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजन की तैयारियों में नहीं होता, जो है बंदर और कबूतर।

जनवरी में हुए इंडिया ओपन के दौरान स्टेडियम में बंदरों के पहुंचने और दर्शक दीर्घा में घूमने की घटनाओं ने आयोजकों की चिंता बढ़ा दी थी। इस बार ऐसी स्थिति दोबारा न बने, इसके लिए स्टेडियम में कई स्तर पर इंतजाम किए गए हैं।

बंदरों को दूर रखने के लिए तीन ऐसे लोगों को तैनात किया गया है, जिन्हें लंगूर की आवाज निकालने में महारत हासिल है। इन्हें आम बोलचाल में ‘मंकी व्हिस्परर’ कहा जाता है। ये लोग स्टेडियम और आसपास के इलाके में बंदरों की गतिविधियों पर नजर रखेंगे और जरूरत पड़ने पर लंगूर की आवाज निकालकर उन्हें वहां से दूर करने की कोशिश करेंगे।

दिलचस्प बात यह है कि बंदरों के लिए किया गया यह इंतजाम अकेला नहीं है। स्टेडियम के सभी 16 प्रवेश द्वारों पर ऑटोमैटिक डबल-डोर सिस्टम लगाया गया है। वहीं कबूतरों को रोकने के लिए अमेरिका से नॉन-टॉक्सिक रिपेलेंट जेल मंगाई गई है। शिकारी पक्षियों की आवाज निकालने वाली मशीनें भी लगाई गई हैं।

इस पूरे इंतजाम की शुरुआत जनवरी में हुए इंडिया ओपन के अनुभव से हुई। टूर्नामेंट के दौरान कुछ बंदर स्टेडियम के अंदर पहुंच गए थे। वे दर्शक दीर्घा में घूमते दिखाई दिए और कुछ समय के लिए मुकाबलों पर भी असर पड़ा।

घटना के वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से फैली थीं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इसकी चर्चा हुई। आयोजकों के लिए यह अनुभव खासा अहम था, क्योंकि अब भारत को एक और बड़े अंतरराष्ट्रीय बैडमिंटन आयोजन की मेजबानी करनी थी।

इस बार कोशिश है कि खेल के दौरान खिलाड़ियों और दर्शकों का ध्यान सिर्फ मुकाबलों पर रहे और किसी जानवर की वजह से मैच में व्यवधान की नौबत न आए।

असली लंगूर नहीं आएगा, इंसान निकालेगा उसकी आवाज

बंदरों को भगाने के लिए पहले कई जगहों पर असली लंगूरों का इस्तेमाल किया जाता था। रीसस मकाक बंदर लंगूर से दूरी रखते हैं। इसकी एक वजह लंगूर का बड़ा आकार और उसका व्यवहार माना जाता है।

लेकिन सार्वजनिक और स्थानों पर बंदरों को भगाने के लिए असली लंगूरों के इस्तेमाल पर 2012 से रोक है। इसलिए अब इंसानों के जरिए लंगूर की आवाज की नकल करने का तरीका अपनाया जाता है।

इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम में भी यही व्यवस्था रहेगी। तैनात किए गए कलाकार लंगूर की गुर्राहट और दूसरी आवाजों की नकल करेंगे। उम्मीद है कि आसपास मौजूद रीसस मकाक इन आवाजों को खतरे का संकेत मानकर इलाके से हट जाएंगे।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here