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राजकुमार सोनी की कलम से: ज़िंदगी की राह, संघर्ष की ठोकरें और हौसलों की जीत

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ज़िन्दगी की राह कभी सीधी नहीं होती,
हर मंज़िल बिना संघर्ष नहीं मिलती।
हर समस्या आसानी से नहीं सुलझती,
हर चीज़ सहज सुलभ सरल नहीं होती।

कितनी भी कोशिश कोई कर ले,
हर आरज़ू मुकम्मल नहीं होती।
राहों में अनेकों लोग हैं मिलते,
पर सब एक समान नहीं होते।

कभी अपनों से भी ठोकर मिल जाती है,
कभी बेगानों से भी राह मिल जाती है।
हर मुस्कान के पीछे ख़ुशी नहीं होती,
हर ख़ामोशी कहानी नहीं कहती।

ठोकरें ही इंसान को चलना सिखाती हैं,
मुश्किलें ही हौसलों को आज़माती हैं।
जो धैर्य और विश्वास से आगे बढ़ता है,
कामयाबी उसी के कदम चूमने आती है।

✍️: राजकुमार सोनी, रायपुर (छत्तीसगढ़)

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