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आमाकुंडी बांध टूटने से दर्जनों किसानों की फसल बर्बाद , फसल नुकसान से किसान परेशान , प्रशासन से नुकसान की भरपाई की मांग

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(संवाददाता – हनुमान प्रसाद यादव)
एमसीबी: विकासखंड भरतपुर के ग्राम मसर्रा के आमाकुंडी बांध टूटने से आसपास के खेत जल मग्न हो गया। यह  बांध टूटने से कई दर्जन किसानों के खेतों में खड़ी धान की फसल  भारी मात्रा में नुकसान हो गई है। लगातार बारिश से 40 साल पुराना बांध टूटने से किसानों का भारी नुकसान होने की आशंका है । 40 साल पुराना बांध किसानों का आपदा का कहर बन गया। किसानों में चिंता और नाराजगी का माहौल। गांव के किसानों ने बताया कि आमाकुंडी बांध निर्माण अभिभाजित मध्य प्रदेश के समय जल संसाधन विभाग द्वारा कराया गया था। लगभग चार दशक पुराने इस बांध की स्थिति और इसकी सुरक्षा को लेकर अब सवाल खड़े हो रहे हैं। क्षेत्र में पिछले कई दिनों से लगातार बारिश हो रही थी, बारिश के कारण बांध में पानी का भारी मात्रा में दबाव बढ़ता गया, और 22 अगस्त  की रात, बांध का एक हिस्सा अचानक टूट गया। बांध से निकले  पानी  आस पास के   खेतों को अपने चपेट में ले लिया। जिससे कई खेत और लगे फसल नष्ट हो गए।
 किसानों का कहना है की फसल खराब होने से इस साल की पूरी मेहनत और लागत पर पानी ने बर्बाद कर दिया है। हालांकि इतनी बड़ी घटना में किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई है ,लेकिन फसल नुकसान से  किसानों की चिंता बढ़ा दी है।
 चार दशक पुराने बांध की सुरक्षा पर सवाल, करीब 40 साल पुराने इस बांध की समय पर  मरम्मत देखरेख और रखरखाव का जायजा लेना था।   जल भराव क्षमता के अनुरूप सुरक्षा व्यवस्था करना था। बरसात के पहले ही स्थिति का निरीक्षण करना चाहिए था। इन सभी सवालों का जवाब किसान मांग रही है, किसानों का कहना है कि यदि बांध की स्थिति का समय रहते आकलन किया गया होता और आवश्यक मरम्मत कराई गई होती तो संभवतः ऐसी स्थिति से बचा जा सकता था ।  प्रशासनिक लापरवाही का खामीयजा आज किसानों को भुगतना पड़ रहा है।
प्रभावित किसानों ने प्रशासन से तत्काल मौका  निरीक्षण कर  फसल नुकसान का सर्वे करने की मांग की है। किसानों का कहना है कि जिन किसानों का धान की फसल बर्बाद हुई है उन्हें नियमानुसार मौजा दिया जाए, साथ ही बांध के टूटे हिस्से की जांच करा कर भविष्य में ऐसी घटना की पुर्नवृत्ति रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं। किसानों ने जल संसाधन विभाग और प्रशासन से बांध की मौजूदा स्थिति का तकनीकी परीक्षण करने की भी मांग की है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि बांध किस कारण से टूटा । बता दे कि लगातार बारिश को देखते हुए आसपास के क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था और जल निकासी की स्थिति पर भी नजर बनाए रखने की जरूरत है। घटना ने जहां किसानों की तैयार फसल को नुकसान पहुंचाया है वहीं करीब चार दशक पुराने जल संसाधन ढांचे के रखरखाव को लेकर भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं ,देखना होगा कि प्रशासन प्रभावित किसानों को नुकसान का कितनी जल्दी सर्वे कराता है और क्षति राशि के लिए क्या कदम उठाता है।

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