Home चर्चा में खेलों से मजबूत होता समाज, सद्भावना से सशक्त होता राष्ट्र

खेलों से मजबूत होता समाज, सद्भावना से सशक्त होता राष्ट्र

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-राष्ट्रीय खेल दिवस पर जांजगीर में निकली सद्भावना रैली, खिलाड़ी-प्रशिक्षकों का हुआ सम्मान

-मेजर ध्यानचंद की जयंती पर खेल प्रतिभाओं को मिला प्रोत्साहन, अनुशासन और निरंतर अभ्यास का दिया संदेश

जिला जांजगीर-चांपा, 29 अगस्त 2026। हॉकी के जादूगर और महान खिलाड़ी मेजर ध्यानचंद की जयंती के अवसर पर मनाए गए राष्ट्रीय खेल दिवस को जांजगीर में खेल भावना, सद्भाव और सम्मान के साथ मनाया गया। जिला प्रशासन एवं खेल एवं युवा कल्याण विभाग द्वारा कलेक्टर श्री जन्मेजय महोबे के निर्देशन में सद्भावना रैली एवं खिलाड़ी-प्रशिक्षक सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। आयोजन का उद्देश्य खेलों के प्रति युवाओं में रुचि बढ़ाने के साथ-साथ स्वस्थ जीवनशैली, अनुशासन, आपसी भाईचारे और सकारात्मक सोच का संदेश समाज तक पहुंचाना रहा।

सद्भावना रैली ने दिया खेल और एकता का संदेश
राष्ट्रीय खेल दिवस के अवसर पर आयोजित सद्भावना रैली को अतिथियों ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। रैली में खिलाड़ियों, प्रशिक्षकों, खेलप्रेमियों एवं विभागीय अधिकारियों-कर्मचारियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। रैली के माध्यम से आमजन को खेलों को जीवन का हिस्सा बनाने, नियमित व्यायाम एवं स्वस्थ जीवनशैली अपनाने तथा समाज में आपसी सद्भाव और भाईचारा कायम रखने का संदेश दिया गया।
रैली का माहौल खेल भावना और ऊर्जा से सराबोर रहा। खिलाड़ियों की सहभागिता ने यह संदेश दिया कि खेल केवल

प्रतियोगिता और पदक हासिल करने का माध्यम नहीं, बल्कि व्यक्तित्व निर्माण, अनुशासन, आत्मविश्वास और सामाजिक एकता का भी सशक्त माध्यम है।

खिलाड़ियों और प्रशिक्षकों का सम्मान
कार्यक्रम के दौरान विभिन्न खेल विधाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर जिले का नाम रोशन करने वाले खिलाड़ियों तथा खेलों के विकास में उल्लेखनीय योगदान देने वाले प्रशिक्षकों को सम्मानित किया गया। सम्मान प्राप्त करने वाले खिलाड़ियों एवं प्रशिक्षकों का उत्साहवर्धन करते हुए अतिथियों ने कहा कि खेल के क्षेत्र में सफलता एक दिन में नहीं मिलती। इसके लिए नियमित अभ्यास, अनुशासन, धैर्य, मेहनत और निरंतर सीखने की भावना आवश्यक है।

खिलाड़ियों को जिला स्तर से आगे बढ़कर राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर पर बेहतर प्रदर्शन करने के लिए प्रेरित किया गया। प्रशिक्षकों के योगदान को भी विशेष रूप से रेखांकित किया गया, क्योंकि किसी खिलाड़ी की प्रतिभा को निखारकर उसे सफलता की दिशा में आगे बढ़ाने में प्रशिक्षक की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है।

मेजर ध्यानचंद को किया गया नमन
समारोह में हॉकी के महान खिलाड़ी मेजर ध्यानचंद के भारतीय खेल जगत में अतुलनीय योगदान का स्मरण किया गया। उनके खेल कौशल, अनुशासन और देश के लिए समर्पण को युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत बताया गया। वक्ताओं ने कहा कि मेजर ध्यानचंद ने अपने प्रदर्शन से भारतीय हॉकी को विश्व पटल पर गौरव दिलाया और उनकी उपलब्धियां आज भी देश के खिलाड़ियों को प्रेरणा देती हैं।

राष्ट्रीय खेल दिवस का आयोजन इसी प्रेरणा को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का अवसर भी बना, जहां खेल प्रतिभाओं को सम्मान और प्रोत्साहन देकर उन्हें भविष्य की बड़ी उपलब्धियों के लिए तैयार करने का संदेश दिया गया।

प्रशासन और खेल विभाग की सहभागिता
कार्यक्रम में मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायत श्री विनय कुमार पोयाम, एसडीएम एवं खेल अधिकारी जांजगीर श्री सुब्रत प्रधान, तहसीलदार श्री शशिभूषण सोनी, खेल विभाग के श्री एस.एस. बघेल सहित विभिन्न खेलों के प्रशिक्षक, खिलाड़ी, अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।

इस अवसर पर प्रशिक्षक श्री गोपेश्वर कहरा, श्री राजेश राठौर, श्री वरुण पाण्डेय, श्री राकेश गढ़वाल, श्री जितेंद्र तिवारी एवं श्री पुष्कर दिनकर सहित विभिन्न खेल विधाओं से जुड़े प्रशिक्षकों और खिलाड़ियों की सहभागिता रही। कार्यक्रम का संचालन श्री दीपक यादव ने किया।

खेल प्रतिभाओं को प्रोत्साहन देने की जरूरत

राष्ट्रीय खेल दिवस का यह आयोजन इस बात की ओर भी ध्यान आकर्षित करता है कि जिले में मौजूद खेल प्रतिभाओं को बेहतर प्रशिक्षण, संसाधन और निरंतर प्रोत्साहन उपलब्ध कराया जाए। ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में अनेक प्रतिभाशाली खिलाड़ी ऐसे हैं, जिन्हें उचित मार्गदर्शन और अवसर मिलने पर राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाने का अवसर मिल सकता है।

जांजगीर में आयोजित सद्भावना रैली और सम्मान समारोह ने खेलों को लेकर सकारात्मक वातावरण बनाने के साथ खिलाड़ियों और प्रशिक्षकों का मनोबल बढ़ाया। आयोजन ने यह स्पष्ट संदेश दिया कि मैदान में पसीना बहाने वाला खिलाड़ी केवल अपने लिए नहीं, बल्कि अपने परिवार, जिले और प्रदेश का गौरव बढ़ाने के लिए भी संघर्ष करता है।
राष्ट्रीय खेल दिवस पर जांजगीर में खेल और सद्भाव का यह संगम युवा पीढ़ी को स्वस्थ, अनुशासित और सकारात्मक दिशा देने की महत्वपूर्ण पहल के रूप में सामने आया।

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