रायपुर। छत्तीसगढ़ में स्वाइन फ्लू के मरीज लगातार बढ़ रहे। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, इस साल जनवरी से अब तक प्रदेश में 130 मरीजों में स्वाइन फ्लू की पुष्टि हुई है। इनमें से 31 मरीज फिलहाल एक्टिव हैं, जबकि 99 मरीज इलाज के बाद स्वस्थ हो चुके हैं। Seasonal Influenza ‘A’ H1N1 के पॉजिटिव मामले सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने संक्रमण की रोकथाम और नियंत्रण को लेकर सभी जिलों को दिशा निर्देश जारी किए हैं।
संचालक स्वास्थ्य सेवाएं, छत्तीसगढ़ के अंतर्गत एकीकृत रोग निगरानी कार्यक्रम (IDSP) की ओर से 31 अगस्त 2026 को जारी पत्र में संदिग्ध और संभावित मरीजों की समय पर पहचान, निगरानी, उपचार और रिपोर्टिंग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। विभाग ने सभी मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियों और संबंधित स्वास्थ्य संस्थानों को H1N1 के मामलों की 100 प्रतिशत रिपोर्टिंग IHIP पोर्टल पर सुनिश्चित करने को कहा है। साथ ही संक्रमण नियंत्रण के उपायों, उपचार व्यवस्था और जन-जागरूकता गतिविधियों को प्रभावी तरीके से संचालित करने के निर्देश दिए गए हैं।
राजधानी रायपुर में तीन नए मरीज मिले हैं, जिससे जिले में कुल संक्रमितों की संख्या अब 60 हो चुकी है। यहां करीब 11 मरीज एक्टिव हैं। इसके अलावा दुर्ग, रायगढ़, बिलासपुर, धमतरी, कोरबा, बेमेतरा और महासमुंद समेत अन्य जिलों में भी सक्रिय मरीज मौजूद हैं। संक्रमण अब उन जिलों तक भी पहुंच रहा है, जहां पहले स्वाइन फ्लू के मामले सामने नहीं आए थे।
राजधानी रायपुर में तीन नए मरीज मिले हैं, जिससे जिले में कुल संक्रमितों की संख्या अब 60 हो चुकी है। यहां करीब 11 मरीज एक्टिव हैं। इसके अलावा दुर्ग, रायगढ़, बिलासपुर, धमतरी, कोरबा, बेमेतरा और महासमुंद समेत अन्य जिलों में भी सक्रिय मरीज मौजूद हैं। संक्रमण अब उन जिलों तक भी पहुंच रहा है, जहां पहले स्वाइन फ्लू के मामले सामने नहीं आए थे।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार H1N1 एक श्वसन तंत्र का संक्रमण है। इसके सामान्य लक्षणों में सर्दी, खांसी, गले में खराश, बुखार, सिरदर्द, बदन दर्द और थकान शामिल हैं। कुछ मरीजों में दस्त और उल्टी की शिकायत भी हो सकती है। दस्तावेज के अनुसार संक्रमण की सामान्य ऊष्मायन अवधि (Incubation Period) करीब 1 से 2 दिन बताई गई है। संक्रमित व्यक्ति में लक्षण शुरू होने के करीब 3 से 5 दिनों तक संक्रमण दूसरों में फैलने की संभावना रहती है। इसका प्रसार मुख्य रूप से संक्रमित व्यक्ति के संपर्क और ड्रॉपलेट संक्रमण के माध्यम से होता है।







