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बुंदेलखंड के गुमनाम सुनील की आवाज ने मचाई धूम, मंदिरों से लेकर मोबाइल तक गूंज रहा ‘हनुमान’ भजन; गांव का साधारण गायक बना देशभर में चर्चा का चेहरा

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बुंदेलखंड। कहते हैं कि हुनर को पहचान मिलने में वक्त जरूर लग सकता है, लेकिन जब मौका मिलता है तो वही हुनर इंसान की पूरी जिंदगी बदल देता है। बुंदेलखंड के एक छोटे से गांव से निकलकर चर्चा में आए सुनील की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। आंखों से दिखाई न देने वाले सुनील के पास न बड़ा मंच था, न आर्थिक संसाधन और न ही फिल्म इंडस्ट्री में कोई गॉडफादर। उनके पास अगर कुछ था तो वह थी भजन गाने की कला और अपनी आवाज पर भरोसा।

कल तक सुनील की पहचान उनके गांव और आसपास के धार्मिक आयोजनों तक सीमित थी। वे मंदिरों और सत्संगों में तंबूरा लेकर भजन गाया करते थे। धीरे-धीरे इसी अभ्यास ने उनकी आवाज में ऐसा जादू पैदा कर दिया, जिसने आज उन्हें लोगों के बीच चर्चा का विषय बना दिया है।

फोन पर रिकॉर्ड किया भजन और बदल गई कहानी

बताया जाता है कि सुनील ने एक दिन अपने मोबाइल फोन से एक भजन रिकॉर्ड किया। उस समय शायद उन्होंने भी नहीं सोचा होगा कि उनकी यह छोटी सी रिकॉर्डिंग इतनी दूर तक पहुंचेगी। भजन इंटरनेट पर धीरे-धीरे लोगों तक पहुंचने लगा और उनकी आवाज ने अनजान लोगों का ध्यान खींचना शुरू कर दिया।

इसी दौरान एक फिल्ममेकर ने सुनील की आवाज सुनी। आवाज से प्रभावित होकर उसने सुनील की तलाश शुरू की और आखिरकार उनके गांव तक पहुंच गया। इसके बाद सुनील को मुंबई बुलाया गया और उन्हें स्टूडियो में गाने का मौका मिला।

फिल्म में गूंजी सुनील की आवाज

सुनील की आवाज को फिल्म ‘हनुमान अंश’ के एक भजन में जगह मिली। इस गीत की पंक्तियां हैं—

“मैंने तेरे ही भरोसे, हनुमान सागर में नैया डाल दी…”

भजन सामने आते ही सोशल मीडिया और आम लोगों के बीच इसकी चर्चा होने लगी। सुनील की सादगी भरी और भावपूर्ण आवाज ने श्रोताओं के दिल को छू लिया। देखते ही देखते यह गीत लोगों की जुबान पर चढ़ने लगा।

गाने ने बदली फिल्म की तस्वीर?

सोशल मीडिया पर वायरल हो रही कहानी के मुताबिक, फिल्म की शुरुआत उम्मीद के मुताबिक नहीं रही और सिनेमाघरों में दर्शकों की संख्या कम बताई जा रही थी। लेकिन फिल्म के इस भजन को दर्शकों का जबरदस्त प्यार मिलने लगा।

हालांकि फिल्म की सफलता का पूरा श्रेय केवल एक गाने को देना सही नहीं होगा, लेकिन यह जरूर कहा जा सकता है कि सुनील की आवाज वाला यह भजन फिल्म को लेकर दर्शकों की दिलचस्पी बढ़ाने में चर्चा का विषय बन गया है।

मंदिरों से लेकर मोबाइल तक सुनाई दे रही आवाज

सुनील की आवाज में गाया गया यह भजन अब धार्मिक आयोजनों और सोशल मीडिया पर तेजी से सुना जा रहा है। कई लोग इसे बार-बार सुन रहे हैं और भजन की भावपूर्ण प्रस्तुति की तारीफ कर रहे हैं।

जिस आवाज को कभी सिर्फ गांव के मंदिरों और सत्संगों तक सुना जाता था, वही आवाज अब बड़े पर्दे के जरिए हजारों-लाखों श्रोताओं तक पहुंच रही है।

संघर्ष से सफलता तक पहुंची सुनील की कहानी

सुनील की कहानी इस बात की मिसाल बनकर सामने आ रही है कि प्रतिभा किसी पहचान की मोहताज नहीं होती। आंखों की रोशनी न होने और आर्थिक कठिनाइयों के बावजूद उन्होंने भजन गायन को अपना सहारा बनाया। मंदिरों और सत्संगों में लगातार गाते हुए उन्होंने अपनी आवाज को निखारा और आखिरकार एक दिन उनकी प्रतिभा फिल्मी दुनिया तक पहुंच गई।

आज सुनील के लिए सबसे बड़ा मंच कोई आलीशान स्टूडियो नहीं, बल्कि वे लाखों श्रोता हैं जो उनकी आवाज सुनकर भावुक हो रहे हैं और भजन को पसंद कर रहे हैं।

गांव के मंदिरों से शुरू हुआ सफर अब बड़े पर्दे तक पहुंच चुका है। सुनील की कहानी बताती है कि अगर हुनर सच्चा हो और मेहनत लगातार जारी रहे, तो एक छोटी सी आवाज भी पूरे देश तक पहुंच सकती है।

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