नई दिल्ली / कोण्डागांव (छत्तीसगढ़):
शिक्षक दिवस के पावन अवसर पर देश के लगभग 25 लाख वरिष्ठ एवं अनुभवी शिक्षकों के समक्ष उत्पन्न गंभीर आजीविका संकट को लेकर एक विशेष ज्ञापन महामहिम राष्ट्रपति महोदया को प्रेषित किया गया है। यह ज्ञापन छत्तीसगढ़ के कोण्डागांव जिले के शासकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय नयापारा (चांदागांव) के शिक्षक श्री रामचंद्र सोनवंशी एवं समस्त पीड़ित शिक्षकवृंद की ओर से भेजा गया है।
मुख्य बिंदु एवं संकट का कारण:
न्यायालय का निर्णय: माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा सिविल अपील संख्या 1385/2025 (आदेश दिनांक 01 सितंबर 2025 एवं 29 मई 2026) के तहत 23 अगस्त 2010 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों को मिली TET (Teacher Eligibility Test) की छूट को अमान्य कर दिया गया है।
सेवा पर संकट: इस निर्णय के परिणामस्वरूप, 01 अगस्त 2028 तक TET उत्तीर्ण न करने पर देश भर के लगभग 25 से 30 वर्षों से सेवा दे रहे 25 लाख वरिष्ठ शिक्षकों के समक्ष सेवामुक्त होने का बड़ा संकट खड़ा हो गया है।
नियमों में विसंगति: ज्ञापन में यह प्रमुखता से उठाया गया है कि देश की अन्य किसी भी उच्च प्रशासनिक या शासकीय सेवा (जैसे IAS, IPS, PCS) में सेवाकाल के मध्य में ऐसी कोई नई परीक्षा पास करने की बाध्यता नहीं होती। उच्च शिक्षा में भी NET जैसे नियम लागू होने से पूर्व के शिक्षकों को हमेशा सुरक्षित रखा गया है।
प्रमुख माँगें:
संसदीय संशोधन या अध्यादेश: केंद्र सरकार द्वारा संसद में विधायी संशोधन या अध्यादेश लाकर ‘निःशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा अधिकार अधिनियम 2009’ में NCTE की 23 अगस्त 2010 की अधिसूचना के पैरा-4 (पूर्व नियुक्त शिक्षकों को TET से छूट) को स्थायी रूप से शामिल किया जाए।
मानवीय आधार पर सेवा संरक्षण: 20 से 25 वर्षों से अपनी निष्ठावान सेवा दे रहे शिक्षकों के परिवारों के भविष्य को सुरक्षित करते हुए उन्हें TET की अनिवार्यता से पूर्णतः मुक्त रखा जाए।
देश के राष्ट्रनिर्माताओं ने महामहिम राष्ट्रपति महोदया से इस गंभीर विषय पर हस्तक्षेप कर उचित मार्गदर्शन और निर्देश देने की विनम्र अपील की है, ताकि लाखों शिक्षकों का जीवन और भविष्य सुरक्षित हो सके।
*राष्ट्रपति सचिवालय के वेबसाइट पर ईमेल के माध्यम से*







