दल्ली राजहरा –
ये तस्वीरें उस नगर पालिका की है जिस पर पूरे शहर की सफाई की जिम्मेदारी है। नगर पालिका परिसर के अंदर बने शौचालय की हालत देखकर आप अंदाजा लगा सकते हैं कि शहर की सफाई व्यवस्था का क्या हाल होगा।
तस्वीरों में साफ देखा जा सकता है कि शौचालय पूरी तरह से गंदगी से भरा है। टाइलें टूटी हुई हैं, फर्श पर काई और गंदा पानी जमा है, दीवारों पर पीलापन और सीलन है। शौचालय के बाहर नाली में काला बदबूदार पानी भरा हुआ है, जिससे मच्छर और बीमारियों का खतरा बना हुआ है। दीवारों पर काई जम गई है जो लंबे समय से सफाई न होने का सबूत है।
मजे की बात तो ये है कि इसी गंदे शौचालय की दीवार पर एक नोटिस चिपका हुआ है जिसमें लिखा है – “नगर पालिका परिसर के अंदर गुटखा खाकर थूकने एवं पाउच को खुले में फेंकने पर 500 रु. का जुर्माना लगेगा। आदेशानुसार”। यानी जनता पर जुर्माना लगाने वाली नगर पालिका खुद अपने परिसर की सफाई नहीं करा पा रही।
स्थानीय लोगों का कहना है कि जब नगर पालिका अपने ही कार्यालय और शौचालय को साफ नहीं रख सकती, तो वह पूरे शहर को स्वच्छ कैसे रखेगी। स्वच्छ भारत अभियान के तहत लाखों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन जमीनी हकीकत इन तस्वीरों में साफ दिख रही है।
लोगों ने मांग की है कि नगर पालिका अध्यक्ष और सीएमओ को पहले अपने परिसर की सफाई पर ध्यान देना चाहिए, उसके बाद जनता से स्वच्छता की उम्मीद करनी चाहिए। अगर नगर पालिका परिसर का ये हाल है तो शहर के सार्वजनिक शौचालयों की स्थिति क्या होगी, इसका अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं।







