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डेस्टीनेशन इंग्लिश मीडियम स्कूल में कृष्ण जन्माष्टमी की धूम, बाल कृष्ण और राधा के रूप में सजे नन्हे-मुन्ने बच्चों ने मोहा मन

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जांजगीर-चांपा संवाददाता – राजेन्द्र जायसवाल

जिला जांजगीर चांपा डेस्टीनेशन इंग्लिश मीडियम स्कूल जांजगीर में भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर्व को हर्षोल्लास, उमंग और भक्तिमय वातावरण में धूमधाम से मनाया गया। इस अवसर पर विद्यालय परिसर पूरी तरह कृष्णमय नजर आया। नन्हे-मुन्ने बच्चे बाल कृष्ण की मनमोहक वेशभूषा में, जबकि बालिकाएं राधा के रूप में विद्यालय पहुंचीं। बच्चों की आकर्षक वेशभूषा ने सभी का मन मोह लिया।
कार्यक्रम का शुभारंभ भगवान श्रीकृष्ण की विधिवत आरती के साथ किया गया। इसके पश्चात विभिन्न सांस्कृतिक एवं मनोरंजक गतिविधियों का आयोजन हुआ। विद्यालय परिसर में आयोजित दही हांडी कार्यक्रम आकर्षण का प्रमुख केंद्र रहा। छात्रों ने उत्साहपूर्वक मानव पिरामिड बनाकर दही हांडी फोड़ी और श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप की लीलाओं को जीवंत कर दिया। इस दौरान विद्यार्थियों में जबरदस्त उत्साह और उमंग देखने को मिला।
जन्माष्टमी उत्सव के दौरान अलग-अलग कक्षाओं के विद्यार्थियों के बीच रस्साकस्सी प्रतियोगिता भी आयोजित की गई। प्रतियोगिता में बच्चों ने पूरे जोश के साथ हिस्सा लिया। खेल एवं सांस्कृतिक गतिविधियों के माध्यम से विद्यार्थियों में टीम भावना, अनुशासन, सहयोग और आत्मविश्वास का विकास करने का संदेश दिया गया।
इस अवसर पर संस्था के निदेशक श्री रवि शंकर निर्मलकर, प्राचार्य श्रद्धा रितु निर्मलकर, उप प्राचार्य शिवम सिंह, आदर्श सर, सुशीला मैडम, सपना मैडम, मनीषा मैडम सहित विद्यालय के शिक्षक-शिक्षिकाएं एवं समस्त विद्यार्थी उपस्थित रहे। विद्यालय परिवार ने बच्चों के साथ मिलकर जन्माष्टमी पर्व को उत्साहपूर्वक मनाया।
पढ़ाई के साथ संस्कार और संस्कृति पर भी जोर
विद्यालय प्रबंधन का कहना है कि बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए शिक्षा के साथ-साथ सांस्कृतिक, सामाजिक और खेल गतिविधियों को भी विशेष महत्व दिया जाता है। इसी उद्देश्य से विद्यालय में प्रतिवर्ष विभिन्न पर्वों एवं महत्वपूर्ण अवसरों पर ऐसे कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इन आयोजनों के माध्यम से बच्चों को भारतीय संस्कृति, परंपराओं और सामाजिक मूल्यों से जोड़ने के साथ-साथ उनकी प्रतिभा को मंच प्रदान किया जाता है।
कृष्ण जन्माष्टमी का यह आयोजन केवल उत्सव तक सीमित नहीं रहा, बल्कि बच्चों को संस्कृति, परंपरा, सहयोग और आपसी सद्भाव का संदेश भी दे गया। विद्यालय परिसर में दिनभर उत्साह और उल्लास का माहौल बना रहा।

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