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TRAI के 5G नियम पर Jio-Airtel-Vi आमने-सामने! 80% लिमिट से क्यों भड़कीं टेलीकॉम कंपनियां

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भारत में 5G सर्विस को लेकर टेलीकॉम कंपनियों और TRAI के बीच विवाद बढ़ता नजर आ रहा है। Reliance Jio, Airtel और Vodafone Idea (Vi) ने 5G नेटवर्क स्लाइसिंग को लेकर TRAI के प्रस्तावित नियमों पर सवाल उठाए हैं। कंपनियों का कहना है कि इन नियमों से 5G नेटवर्क की क्षमता का पूरा इस्तेमाल करना मुश्किल हो सकता है और कंपनियों पर अतिरिक्त खर्च का बोझ भी पड़ सकता है।

TRAI ने अगस्त में 5G नेटवर्क स्लाइसिंग को लेकर ड्राफ्ट नियम जारी किए थे। आसान भाषा में समझें तो नेटवर्क स्लाइसिंग 5G नेटवर्क को अलग-अलग हिस्सों में बांटकर किसी खास सर्विस या ग्राहक के लिए अलग क्षमता देने की तकनीक है।

उदाहरण के लिए, किसी कंपनी को हाई-स्पीड और ज्यादा भरोसेमंद नेटवर्क की जरूरत है, तो टेलीकॉम कंपनी उसके लिए 5G नेटवर्क का एक अलग हिस्सा उपलब्ध करा सकती है।

TRAI की चिंता यह है कि अगर नेटवर्क का बड़ा हिस्सा ऐसी खास सेवाओं के लिए इस्तेमाल होने लगे, तो आम मोबाइल यूजर्स की इंटरनेट स्पीड और सर्विस क्वालिटी प्रभावित हो सकती है।

TRAI ने क्या प्रस्ताव दिया?

TRAI ने सुझाव दिया है कि जिन इलाकों में नेटवर्क स्लाइसिंग चल रही हो, वहां रेडियो रिसोर्स का इस्तेमाल 80% से ज्यादा नहीं होना चाहिए।

इसका मकसद यह है कि सामान्य मोबाइल यूजर्स के लिए भी नेटवर्क में पर्याप्त क्षमता बची रहे और उन्हें खराब इंटरनेट स्पीड का सामना न करना पड़े।

Jio, Airtel और Vi को 80% की सीमा पर आपत्ति

Airtel ने क्या कहा?

Airtel का कहना है कि नेटवर्क का 80% से ज्यादा इस्तेमाल होने का मतलब यह जरूरी नहीं कि ग्राहकों को खराब सर्विस मिल रही है। कंपनी के मुताबिक ऐसी सीमा लगाने से स्पेक्ट्रम का बेहतर इस्तेमाल प्रभावित हो सकता है।

कंपनी का यह भी कहना है कि अगर इस तरह की लिमिट लागू होती है, तो उसे नेटवर्क की क्षमता बढ़ाने पर अतिरिक्त पैसा खर्च करना पड़ सकता है।

Jio की क्या आपत्ति है?

Jio का कहना है कि 80% की तय सीमा के आधार पर नेटवर्क स्लाइसिंग को रोकना व्यावहारिक नहीं है।

कंपनी के मुताबिक आधुनिक 5G नेटवर्क ज्यादा यूटिलाइजेशन पर भी बेहतर तरीके से काम करने के लिए तैयार किए गए हैं। Jio का तर्क है कि स्पेक्ट्रम के इस्तेमाल पर इस तरह की पाबंदी से कंपनियों को उपलब्ध संसाधनों का पूरा फायदा उठाने में परेशानी होगी।

Vi ने क्या कहा?

Vodafone Idea का कहना है कि नेटवर्क स्लाइसिंग का इस्तेमाल ही उस समय किया जाता है, जब नेटवर्क के संसाधनों को किसी खास जरूरत के हिसाब से बांटना हो।

कंपनी के मुताबिक अगर नेटवर्क में पर्याप्त क्षमता मौजूद है तो सभी यूजर्स को अच्छी स्पीड मिल सकती है। इसलिए हर सेल या नेटवर्क हिस्से के लिए एक तय यूटिलाइजेशन लिमिट लगाना तकनीकी रूप से सही नहीं है।

दूसरी तरफ TRAI के समर्थन में भी आवाज

टेलीकॉम कंपनियों के विरोध के बीच कुछ पब्लिक पॉलिसी ग्रुप TRAI के प्रस्ताव के समर्थन में हैं।

The Dialogue जैसे पब्लिक पॉलिसी थिंक टैंक का कहना है कि ऐसी सीमा आम मोबाइल यूजर्स के लिए सुरक्षा कवच की तरह काम कर सकती है। इससे यह सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी कि खास 5G सेवाओं के लिए नेटवर्क का ज्यादा इस्तेमाल होने पर सामान्य ग्राहकों की इंटरनेट सर्विस प्रभावित न हो।

अब आगे क्या होगा?

फिलहाल यह पूरा मामला ड्राफ्ट प्रस्ताव और कंपनियों की आपत्तियों के स्तर पर है। TRAI को टेलीकॉम कंपनियों की प्रतिक्रियाएं मिल चुकी हैं। अब इन सुझावों और आपत्तियों पर विचार के बाद आगे के नियमों को लेकर फैसला किया जाएगा।

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