मंदिर हसौद। लोक निर्माण विभाग (PWD) के अधीन आने वाली नरदहा की मुख्य सड़क इन दिनों अपनी बदहाली को लेकर चर्चा में है। सड़क पर जगह-जगह बड़े-बड़े गड्ढे और जलभराव के कारण राहगीरों एवं वाहन चालकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बारिश के मौसम में स्थिति और भी गंभीर हो गई है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, विभाग द्वारा सड़क के गड्ढों में आए दिन बजरी और मुरुम डालकर अस्थायी मरम्मत की जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि हर तीसरे-चौथे दिन मरम्मत का काम दिखाई देता है, लेकिन बारिश होते ही यह मरम्मत बेअसर साबित हो जाती है। गड्ढों में डाली गई बजरी और मुरुम पानी के साथ बह जाती है और सड़क कुछ ही समय में फिर उसी बदहाल स्थिति में पहुंच जाती है।
बारिश में बढ़ जाता है दुर्घटना का खतरा
सड़क पर जगह-जगह पानी जमा होने के कारण गड्ढों की गहराई दिखाई नहीं देती। ऐसे में दोपहिया वाहन चालकों और राहगीरों के लिए दुर्घटना का खतरा बना रहता है। स्कूली बच्चों को भी रोजाना इस खराब सड़क से गुजरना पड़ता है। कई स्थानों पर सड़क की हालत इतनी खराब है कि वाहन चालकों को गड्ढों से बचने के लिए सड़क के किनारे से होकर गुजरना पड़ता है।
ग्रामीणों का आरोप है कि बार-बार की जा रही अस्थायी मरम्मत से समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो रहा है। उनका कहना है कि यदि गड्ढों में बजरी और मुरुम डालने पर बार-बार खर्च होने वाली राशि का हिसाब लगाया जाए, तो संभवतः सड़क की स्थायी मरम्मत या निर्माण का काम ही कराया जा सकता था।
गड्ढों के बीच सड़क तलाशने को मजबूर ग्रामीण
स्थानीय लोगों का कहना है कि अब स्थिति यह हो गई है कि सड़क पर गड्ढे नहीं, बल्कि गड्ढों के बीच सड़क तलाशनी पड़ रही है। विकास और बेहतर सड़क व्यवस्था के दावों के बीच नरदहा की मुख्य सड़क की बदहाली विभागीय कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रही है।
ग्रामीणों ने लोक निर्माण विभाग से मांग की है कि बार-बार की जा रही अस्थायी मरम्मत के बजाय सड़क का स्थायी, गुणवत्तापूर्ण और टिकाऊ निर्माण कराया जाए। साथ ही बारिश के दौरान जलभराव की समस्या का भी स्थायी समाधान किया जाए, ताकि लोगों को रोजाना की परेशानी से राहत मिल सके और सरकारी धन का भी उचित उपयोग हो।







