Home चर्चा में कस्टडी में गुल्लू की मौत: निलंबन से आगे अब निष्पक्ष जांच और...

कस्टडी में गुल्लू की मौत: निलंबन से आगे अब निष्पक्ष जांच और परिवार के भविष्य की जवाबदेही

5
0
संवाददाता – राजेन्द्र जायसवाल
22 वर्षीय युवक की मौत ने खड़े किए गंभीर सवाल, परिजनों के आरोपों के बाद आरक्षक ईश्वरी राठौर निलंबित; दो अधिकारी व चालक भी जांच के दायरे में
 जिला जांजगीर-चांपा चांपा । चांपा थाना परिसर से सामने आई 22 वर्षीय गुल्लू सहीस की मौत की घटना ने पुलिस व्यवस्था, हिरासत में सुरक्षा और गरीब परिवार को न्याय मिलने को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना के बाद मृतक की पत्नी, तीन बच्चों और अन्य परिजनों ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाते हुए चांपा थाना का घेराव किया। मामला बढ़ने पर जिला पुलिस प्रशासन ने आरक्षक ईश्वरी राठौर, बैच नंबर 836 को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। साथ ही दो अधिकारियों और वाहन चालक की भूमिका की भी जांच किए जाने की बात पुलिस अधीक्षक ने कही है।
तहसीलदार राजकुमार मरावी ने भी बताया कि आरक्षक ईश्वरी राठौर के निलंबन की कार्रवाई की जा रही है और आगे जांच के बाद जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी। ऐसे में अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या यह कार्रवाई केवल निलंबन तक सीमित रहेगी या जांच के निष्कर्ष के आधार पर वास्तविक जिम्मेदारी भी तय होगी?
परिजनों का आरोप—पुलिस अभिरक्षा में मारपीट और प्रताड़ना
मृतक के परिजनों का आरोप है कि 8 सितंबर को मेहंदीपारा क्षेत्र से गुल्लू सहीस को आरक्षक ईश्वरी राठौर और एक महिला अधिकारी  द्वारा चांपा थाना लाया गया था। परिजनों के अनुसार अगले दिन उन्हें गुल्लू की मौत की सूचना मिली। इसके बाद परिवार में कोहराम मच गया और पत्नी, तीन बच्चों सहित परिजन न्याय की मांग को लेकर थाना पहुंच गए।
परिजनों ने पुलिसकर्मियों पर मारपीट एवं प्रताड़ना के गंभीर आरोप लगाए हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र जांच होना आवश्यक है। किसी भी पुलिसकर्मी को केवल आरोप के आधार पर दोषी घोषित करना उचित नहीं होगा, लेकिन आरोप इतने गंभीर हैं कि उनकी निष्पक्ष जांच से बचना भी न्याय के हित में नहीं होगा।
पुलिस का अलग दावा—बीमारी के कारण बिगड़ी तबीयत
वहीं चांपा थाना प्रभारी अशोक वैष्णव का कहना है कि गुल्लू पहले से बीमार था और उसे मिर्गी की बीमारी थी। उनके अनुसार उसे दौरा पड़ा, जिसके बाद उसे चांपा के स्वर्गीय बिसाहूदास महंत अस्पताल ले जाया गया, जहां उसकी मृत्यु हो गई। थाना प्रभारी ने परिजनों द्वारा लगाए जा रहे आरोपों को बेबुनियाद बताया है।
यानी एक तरफ परिवार पुलिस अभिरक्षा के दौरान मारपीट और प्रताड़ना को मौत का कारण बता रहा है, जबकि पुलिस बीमारी के कारण मौत होने की बात कह रही है। इन दोनों दावों के बीच वास्तविक सच्चाई केवल निष्पक्ष जांच और वैज्ञानिक साक्ष्यों से ही सामने आ सकती है।
एसपी ने लिया संज्ञान, आरक्षक निलंबित
पुलिस अधीक्षक विजय कुमार पांडेय के अनुसार उन्हें चांपा थाना घेराव और परिजनों द्वारा लगाए गए आरोपों की जानकारी मिली। उन्होंने बताया कि आरक्षक ईश्वरी राठौर, बैच नंबर 836 को चांपा थाना अपराध क्रमांक 478/2026, धारा 34(2) आबकारी अधिनियम से संबंधित मामले में घोर लापरवाही एवं अनुशासनहीनता के आरोप में तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है। साथ ही दो अधिकारियों और वाहन चालक की भूमिका की जांच की जाएगी तथा दोषी पाए जाने पर कार्रवाई होगी।
यह कदम निश्चित रूप से महत्वपूर्ण है, लेकिन जनता का सवाल इससे कहीं आगे है—निलंबन हुआ, अब निष्पक्ष जांच कब पूरी होगी और दोषी कौन है, यह कब सामने आएगा?
गरीब परिवार के तीन बच्चों का भविष्य कौन संभालेगा?
गुल्लू सहीस की मौत का सबसे बड़ा मानवीय पहलू उसकी पत्नी और तीन बच्चों का भविष्य है। यदि परिवार का कमाने वाला सदस्य चला गया है तो तीन मासूम बच्चों के पालन-पोषण, शिक्षा और जीवन-यापन की जिम्मेदारी अब किसके कंधों पर होगी?
सरकार और जिला प्रशासन को केवल जांच और कार्रवाई तक सीमित नहीं रहना चाहिए। यदि नियमानुसार सहायता का प्रावधान है तो मृतक के परिवार को तत्काल आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की दिशा में कदम उठाया जाना चाहिए। तीन बच्चों की शिक्षा और भविष्य के लिए भी शासन को संवेदनशीलता के साथ निर्णय लेना चाहिए।
क्योंकि किसी परिवार को न्याय केवल दोषी को सजा दिलाने से नहीं मिलता, बल्कि पीड़ित परिवार को सम्मानपूर्वक जीवन जीने का सहारा देने से भी मिलता है।
अब सीसीटीवी, मेडिकल और पोस्टमार्टम रिपोर्ट बनेगी जांच की कसौटी
इस मामले में कई ऐसे सवाल हैं जिनका जवाब दस्तावेजी और वैज्ञानिक साक्ष्यों से मिल सकता है—
गुल्लू को थाना कब और किस परिस्थिति में लाया गया?
थाना लाने के समय उसकी मेडिकल जांच हुई थी या नहीं?
थाने के सीसीटीवी में क्या रिकॉर्ड हुआ?
पुलिस अभिरक्षा के दौरान उसकी तबीयत कब बिगड़ी?
अस्पताल ले जाने में कितना समय लगा?
अस्पताल के मेडिकल रिकॉर्ड में क्या दर्ज है?
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का वास्तविक कारण क्या सामने आया?
घटना के समय मौजूद पुलिसकर्मियों और अन्य लोगों की भूमिका क्या थी?
क्या किसी स्तर पर लापरवाही हुई?
इन सभी बिंदुओं की निष्पक्ष जांच जरूरी है। यदि सीसीटीवी फुटेज उपलब्ध है तो उसे तत्काल सुरक्षित रखा जाना चाहिए, ताकि बाद में किसी प्रकार की आशंका न रहे।
निलंबन स्वागतयोग्य, लेकिन क्या जवाबदेही यहीं खत्म हो जाएगी?
पुलिस अधीक्षक द्वारा तत्काल निलंबन की कार्रवाई से यह संदेश गया है कि गंभीर आरोपों को प्रशासन ने संज्ञान में लिया है। लेकिन जनता यह जानना चाहती है कि जांच कितने समय में पूरी होगी और उसका परिणाम क्या होगा।
यदि जांच में आरक्षक या किसी अन्य पुलिसकर्मी की गंभीर लापरवाही या अपराध साबित होता है तो नियमानुसार कठोर कार्रवाई होनी चाहिए। वहीं यदि आरोप जांच में प्रमाणित नहीं होते हैं तो इसकी स्पष्ट जानकारी भी सामने आनी चाहिए। यही पारदर्शिता पुलिस और जनता के बीच विश्वास को मजबूत करेगी।
शासन से सीधा सवाल—क्या गरीब परिवार को न्याय मिलेगा?
गुल्लू सहीस की मौत अब सिर्फ एक परिवार का मामला नहीं रह गया है। यह पुलिस अभिरक्षा में नागरिकों की सुरक्षा और प्रशासनिक जवाबदेही का सवाल बन चुका है।
आज एक मां अपने बेटे को खो चुकी है, एक पत्नी अपना जीवनसाथी खो चुकी है और तीन बच्चे अपने भविष्य के सहारे से वंचित हो गए हैं। ऐसे में शासन-प्रशासन की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है।
सरकार को तत्काल स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करनी चाहिए। जांच में किसी भी प्रकार का दबाव नहीं होना चाहिए। पोस्टमार्टम और मेडिकल दस्तावेजों को सुरक्षित रखा जाए, सीसीटीवी फुटेज संरक्षित किए जाएं और परिवार को जांच की प्रगति की जानकारी दी जाए।
साथ ही मृतक की पत्नी और तीन बच्चों के लिए नियमानुसार तत्काल आर्थिक सहायता, सामाजिक सुरक्षा और बच्चों की शिक्षा के संबंध में ठोस निर्णय लिया जाना चाहिए।
अब सवाल सिर्फ गुल्लू की मौत का नहीं, व्यवस्था के भरोसे का है
गुल्लू की मौत का सच जो भी हो, उसे सामने आना ही चाहिए। यदि बीमारी मौत का कारण थी तो मेडिकल और पोस्टमार्टम रिपोर्ट से यह स्पष्ट हो। यदि पुलिस अभिरक्षा के दौरान किसी प्रकार की लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई हो।
क्योंकि कानून की नजर में गरीब और अमीर की जान की कीमत अलग-अलग नहीं हो सकती।
आरक्षक का निलंबन जांच की शुरुआत है, अंत नहीं। अब शासन-प्रशासन को यह साबित करना होगा कि जांच निष्पक्ष होगी, दोषी चाहे कोई भी हो उसके विरुद्ध कार्रवाई होगी और गुल्लू के पीछे छूट गए तीन बच्चों का भविष्य शासन की संवेदनशीलता से सुरक्षित होगा।
गुल्लू के परिवार को आश्वासन नहीं, निष्पक्ष जांच का परिणाम चाहिए।
परिवार को सहानुभूति नहीं, न्याय के साथ सम्मानजनक जीवन का सहारा चाहिए।
और जनता को सवालों का जवाब चाहिए—आखिर गुल्लू की मौत कैसे हुई?
व्यास कश्यप विधायक जांजगीर चांपा कहना है कि इस मामले में उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए दोषियों के ऊपर कड़ी से कड़ी कार्यवाही होनी चाहिए

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here