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लगभग 42 लाख रुपए की लागत से हो रहा निर्माणाधीन स्टाफडेम बारिश के पहली ही पानी मे बहा,ग्रामीणों ने कहा जिम्मेदारो पर हो कार्यवाही

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रिपोर्ट-खिलेश साहू
धमतरी:- मगरलोड विकासखंड के ग्राम हरदी में जल संरक्षण के उद्देश्य से लगभग 42लाख रुपये की लागत से निर्माणाधीन स्टॉपडेम पहली ही बारिश में तेज बहाव के कारण क्षतिग्रस्त होकर बह गया। निर्माण कार्य पूरा होने से पहले ही संरचना के धराशायी होने से इसकी गुणवत्ता, तकनीकी डिजाइन और निर्माण प्रक्रिया को लेकर ग्रामीणों ने गंभीर सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि निर्माण के दौरान ही कार्य की गुणवत्ता को लेकर आपत्तियां उठाई गई थीं। ग्रामीण साधुराम के अनुसार निर्माण में तकनीकी खामियों और निर्माण सामग्री की गुणवत्ता को लेकर जिम्मेदारों को पहले ही अवगत कराया गया था, लेकिन शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया गया।
      बिना सरिया और कॉलम के निर्माण का आरोप….ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि स्टॉपडेम के निर्माण में आवश्यकतानुसार सरिया और कॉलम का उपयोग नहीं किया गया। निर्माण कार्य से जुड़े इंजीनियर खेमन लाल साहू की भूमिका पर भी ग्रामीणों ने सवाल उठाते हुए तकनीकी लापरवाही की जांच की मांग की है। ग्रामीणों के अनुसार स्टॉपडेम का करीब 90प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका था। ऐसे में पहली बारिश में पानी के दबाव से संरचना के क्षतिग्रस्त होने को वे निर्माण गुणवत्ता और तकनीकी डिजाइन की जांच का विषय बता रहे हैं। ग्रामीणों ने यह भी बताया कि मनरेगा की राशि अभी तक नहीं मिली है।
निगरानी और निर्माण सामग्री की आपूर्ति पर भी सवाल
        ग्रामीणों ने क्षेत्र की जिला पंचायत सभापति मीना डेमन  साहू की प्रतिनिधि डेमन साहू की कथित निगरानी को लेकर भी सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण कार्य की निगरानी में लापरवाही बरती गई। साथ ही निर्माण सामग्री की आपूर्ति किसी विशेष दुकान या फर्म से कराए जाने संबंधी आरोप लगाते हुए इसकी भी जांच की मांग की गई है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि निर्माण सामग्री …..ट्रेडर्स कुंडेल से संबंधित थी और इस संबंध में जिला पंचायत सभापति मीना डेमन साहू से जुड़े होने का दावा भी किया गया है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र एवं आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। ग्रामीणों ने सामग्री आपूर्ति, बिलों और भुगतान की जांच की मांग की है।इसके अलावा मनरेगा के तहत कार्य की स्वीकृति, तकनीकी स्वीकृति और निर्माण की प्रशासनिक प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।
       200 से 250 एकड़ कृषि भूमि को मिलना था लाभ…ग्राम हरदी के सरपंच नोहर लाल ध्रुव ने बताया कि स्टॉपडेम का निर्माण करीब 200 से 250 एकड़ कृषि भूमि को सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से किया जा रहा था। पहली बारिश में ही संरचना के क्षतिग्रस्त होने से किसानों को मिलने वाले अपेक्षित लाभ पर भी सवाल खड़े हो गए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि नाले की चौड़ाई, जलग्रहण क्षेत्र और संभावित जल प्रवाह का पर्याप्त तकनीकी आकलन किया गया था या नहीं, इसकी विशेषज्ञ टीम से जांच कराई जानी चाहिए।
      स्वतंत्र तकनीकी जांच की मांग…ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि मामले की जांच संबंधित विभाग तक सीमित न रखते हुए स्वतंत्र तकनीकी विभाग अथवा विशेषज्ञ समिति से कराई जाए। जांच में स्वीकृत लागत, तकनीकी स्वीकृति, डिजाइन, निर्माण सामग्री, माप पुस्तिका, भुगतान, कार्य की निगरानी और निर्माण की गुणवत्ता सहित सभी बिंदुओं की जांच की जाए। ग्रामीणों ने कहा कि यदि जांच में किसी अधिकारी, इंजीनियर, निर्माण एजेंसी या अन्य जिम्मेदार व्यक्ति की लापरवाही अथवा अनियमितता सामने आती है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाए तथा शासकीय राशि के नुकसान की जिम्मेदारी भी तय की जाए।मामले में ग्रामीणों द्वारा लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है। संबंधित विभाग, इंजीनियर और जिला पंचायत सभापति का पक्ष सामने आने के बाद स्थिति और स्पष्ट होगी। अब ग्रामीणों की नजर प्रशासन की जांच और कार्रवाई पर टिकी हुई है।

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