गागड़ा परिवार द्वारा पारंपरिक रीति-रिवाज एवं श्रद्धा के साथ नवाखाई त्यौहार मनाया गया। इस अवसर पर परिवार के सदस्यों ने नए अन्न की पूजा-अर्चना कर परिवार की सुख-समृद्धि एवं खुशहाली की कामना की।
नवाखाई पर्व के दौरान परिवार के सभी सदस्य एकत्रित हुए और पारंपरिक परंपराओं का पालन करते हुए नए अन्न का सेवन किया। इस अवसर पर घर में उत्साह और उल्लास का माहौल रहा। इस कार्यक्रम में सोबराय गागड़ा, हरकराम गागड़ा, नथेल गागड़ा, नरेश गागड़ा, फरसू गागड़ा, नोहर गागड़ा, बृजलाल गागड़ा, सहदेव गागड़ा, हेमराज गागड़ा, जीवन गागड़ा, हरिश्चंद्र गागड़ा, नरेंद्र, राधेमोहन, कमेलाल, अजय, परमानंद, रंजीत, कैलाश, धर्मेंद्र, नंदू, संतोष, सगन, संजय, उत्तम, घनश्याम, रोशन, प्रहलाद, खिलेश गागड़ा तेजमणि गागड़ा, नर्मदा, शिरनबाई, रुक्मणि, तिजोबाई, कौशल्या, बिंदीबाई, कल्पना, शशिकला, पूजा, कविता, मंगतीन, शीनू, भवानी, वर्षा, झरना, एवं समस्त परिवार सम्मिलित हुए। परिवार के बुजुर्गों ने नवाखाई पर्व के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह पर्व हमारी कृषि संस्कृति, परंपरा और आपसी भाईचारे का प्रतीक है। नई फसल के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करना और आने वाले समय में सुख-समृद्धि की कामना करना इस पर्व की विशेषता है। नवाखाई का अर्थ ही है—नई फसल के अन्न को पहली बार ग्रहण करना। अलग-अलग क्षेत्रों और समुदायों में इसकी विधि और परंपराएं थोड़ी अलग हो सकती हैं। गागड़ा परिवार ने सभी समाजजनों एवं क्षेत्रवासियों को नवाखाई पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं दीं।







