विमल सोनी/रतनपुर: छत्तीसगढ़ की ऐतिहासिक और धार्मिक नगरी रतनपुर, जहाँ माँ महामाया के दर्शन के लिए देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं, आज खुद अपनी बदहाली पर आंसू बहा रही है। शहर के प्रमुख धार्मिक स्थलों—गिरिजाबंद हनुमान मंदिर और राम टेकरी की ओर जाने वाले मार्गों की हालत इतनी दयनीय हो चुकी है कि यहाँ आना किसी खतरे से खाली नहीं है। सड़कों के बड़े-बड़े गड्ढे और रातों का सन्नाटा चीरता घना अंधेरा प्रशासन की पोल खोल रहा है, जिससे स्थानीय नागरिकों और पर्यटकों में भयंकर गुस्सा है।
1. जर्जर सड़कें और जानलेवा गड्ढे: हादसों को दे रहे खुला आमंत्रण
बिलासपुर-रतनपुर मार्ग से मुख्य महामाया मंदिर, हनुमान मंदिर और रामटेकरी की ओर जाने वाली अंदरूनी सड़कों पर विकास के दावे दम तोड़ चुके हैं। इन मार्गों पर इतने बड़े-बड़े गड्ढे हो चुके हैं कि दोपहिया और चारपहिया वाहन चालकों के लिए हर पल दुर्घटना की तलवार लटकी रहती है।

- वाहनों की लाइटों के सहारे सफर: हालात इतने बदतर हैं कि रात के वक्त वाहन चालकों को अपनी गाड़ियों की हेडलाइट के उजाले के भरोसे ही सड़कों के गड्ढों को बचाते हुए जान जोखिम में डालकर आवाजाही करनी पड़ रही है।
- बरसात में नरक बनता रास्ता: बारिश के मौसम में इन गड्ढों में पानी भर जाने से तालाब और सड़क का फर्क मिट जाता है, जिससे राहगीरों और पैदल चलने वाले श्रद्धालुओं का निकलना तक दूभर हो जाता है।
2. करोड़ों के प्रोजेक्ट, पर सड़कों पर पसरा ‘अंधेरा कानून’
विकास के नाम पर कागजों में बड़े-बड़े दावे और करोड़ों रुपये के बजट स्वीकृत होने का ढिंढोरा पीटा जाता है, लेकिन धरातल पर सच्चाई कुछ और ही है।
- बंद पड़ी स्ट्रीट लाइटें: प्रमुख मार्गों और चौक-चौराहों पर लाइटें लगाने की योजनाएं सिर्फ फाइलों तक सीमित हैं। वर्तमान में कई प्रमुख मार्गों पर स्ट्रीट लाइटें पूरी तरह बंद पड़ी हैं।
- असामाजिक तत्वों का आतंक: रात होते ही पूरा इलाका अंधेरे के आगोश में डूब जाता है। अंधेरे का फायदा उठाकर असामाजिक तत्वों का खौफ बढ़ गया है, जिससे दूर-दूर से आने वाली महिलाओं और श्रद्धालुओं में भारी असुरक्षा और डर का माहौल है।
3. प्रशासनिक उदासीनता और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप
स्थानीय लोगों और रिपोर्ट्स के मुताबिक, रतनपुर में विकास कार्यों के लिए आने वाले भारी-भरकम बजट का जमकर बंदरबांट हुआ है।
- घटिया सामग्री का खेल: शहर में लाइटें लगाने वाले प्रोजेक्ट्स में मानकों की धज्जियां उड़ाई गईं। कम वजन और घटिया क्वालिटी के खंभे खड़े किए गए, जो भ्रष्टाचार की कहानी खुद बयां कर रहे हैं।
- खींचतान और ठप पड़े काम: नगरपालिका के भीतर मची आपसी खींचतान और प्रशासनिक समन्वय की भारी कमी के कारण जरूरी टेंडर और विकास कार्य पूरी तरह ठप पड़े हुए हैं। जनता इन सबकी कीमत अपनी रोजाना की परेशानियों और हादसों के रूप में चुका रही है।
जनता की दो टूक चेतावनी:
श्रद्धालुओं और स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि जल्द ही इन सड़कों की मरम्मत और बंद पड़ी स्ट्रीट लाइटों को चालू नहीं किया गया, तो प्रशासन के खिलाफ बड़ा जन-आंदोलन छेड़ा जाएगा।







