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TET अनिवार्यता पर 25 लाख वरिष्ठ शिक्षकों की चिंता बढ़ी, सेवा सुरक्षा को लेकर उठी बड़ी मांग

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कोण्डागांव। देशभर में 23 अगस्त 2010 से पहले नियुक्त वरिष्ठ शिक्षकों के लिए TET (Teacher Eligibility Test) की अनिवार्यता का मुद्दा गंभीर होता जा रहा है। छत्तीसगढ़ के कोण्डागांव जिले के शासकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय निपापारा, चांदागांव में पदस्थ शिक्षक श्री रामचंद्र सोनवंशी द्वारा राष्ट्रपति सचिवालय में प्रस्तुत आवेदन पर 22 सितंबर 2026 को जवाब प्राप्त हुआ है।

आवेदन संख्या PRSEC/E/2026/0065970 के जवाब में राष्ट्रपति सचिवालय की ओर से सुप्रीम कोर्ट के संबंधित आदेशों का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि सभी शिक्षकों पर TET की प्रयोज्यता से संबंधित विषय पर न्यायालय द्वारा निर्णय लिया जा चुका है।

सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का दिया गया हवाला

प्राप्त जवाब में सुप्रीम कोर्ट के 1 सितंबर 2025 के सिविल अपील नंबर 1385/2025 तथा 29 मई 2026 के पुनर्विचार याचिका संबंधी आदेश का उल्लेख किया गया है।

प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, इन आदेशों के अनुपालन के चलते 23 अगस्त 2010 से पहले नियुक्त वरिष्ठ शिक्षकों के लिए 1 अगस्त 2028 तक TET उत्तीर्ण करने का विषय सामने आया है।

प्रभावित शिक्षकों की ओर से चिंता जताई गई है कि जिन शिक्षकों ने नियुक्ति के समय निर्धारित योग्यता के आधार पर सेवा शुरू की और वर्षों तक कार्य किया, उनके लिए सेवा के दौरान नई पात्रता शर्त लागू होना गंभीर विषय है।

20-25 साल से सेवा दे रहे शिक्षकों की चिंता

प्रेस विज्ञप्ति में दावा किया गया है कि देशभर में बड़ी संख्या में ऐसे वरिष्ठ शिक्षक हैं, जो करीब 20 से 25 वर्षों से सेवा दे रहे हैं। इन शिक्षकों की नियुक्ति के समय TET अनिवार्यता लागू नहीं थी।

शिक्षकों की ओर से सवाल उठाया गया है कि लंबे समय तक सेवा देने के बाद नई पात्रता परीक्षा की अनिवार्यता का उनकी सेवा पर क्या प्रभाव पड़ेगा। इसी को लेकर सेवा सुरक्षा और भविष्य को लेकर चिंता जताई गई है।

शिक्षक समुदाय ने उठाई सेवा संरक्षण की मांग

इस मामले में प्रभावित शिक्षकों की ओर से सरकार से पुराने नियुक्त शिक्षकों को सेवा संरक्षण देने की मांग की गई है। उनका कहना है कि 23 अगस्त 2010 से पहले नियुक्त शिक्षकों को उनकी नियुक्ति के समय लागू नियमों के आधार पर सेवा सुरक्षा प्रदान की जानी चाहिए।

प्रेस विज्ञप्ति में यह भी मांग की गई है कि पूर्व नियुक्त शिक्षकों को TET अनिवार्यता से छूट देने के लिए आवश्यक कानूनी प्रावधान किए जाएं।

क्या हैं प्रमुख मांगें?

प्रभावित शिक्षकों की ओर से मुख्य रूप से ये मांगें रखी गई हैं—

  • 23 अगस्त 2010 से पहले नियुक्त शिक्षकों को TET अनिवार्यता से छूट देने की मांग।
  • वरिष्ठ शिक्षकों के लिए पूर्ण सेवा संरक्षण सुनिश्चित करने की मांग।
  • NCTE की 23 अगस्त 2010 की अधिसूचना के संदर्भ में पूर्व नियुक्त शिक्षकों के लिए स्थायी कानूनी संरक्षण की मांग।
  • शिक्षकों की सेवा और आजीविका से जुड़े प्रभावों पर सरकार द्वारा हस्तक्षेप की मांग।

राष्ट्रपति सचिवालय के जवाब के बाद मामला फिर चर्चा में

राष्ट्रपति सचिवालय से प्राप्त जवाब में सुप्रीम कोर्ट के पूर्व आदेशों का हवाला दिए जाने के बाद अब इस मुद्दे पर प्रभावित शिक्षकों की ओर से आगे की कानूनी और नीतिगत पहल की मांग की जा रही है।

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