अब्दुल रफ़ीक खान/महासमुंद :
राजस्व पटवारी संघ, जिला शाखा महासमुंद के तत्वावधान में अपनी 4 सूत्रीय मांगों को लेकर 13 अक्टूबर 2026 से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर बैठे पटवारियों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। जिला अध्यक्ष कमलेश डहरे, उपाध्यक्ष राकेश कवाइत व सुनील पटेल, तथा जिला सचिव दिनेश कुमार प्रधान के नेतृत्व में बड़ी संख्या में पटवारी मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपने कलेक्ट्रेट पहुंचे थे।
कलेक्ट्रेट गेट पर पुलिस ने रोका, अंदर जाने की अनुमति नहीं मिली:
कलेक्ट्रेट परिसर पहुंचने पर प्रशासन और पुलिस बल द्वारा पटवारियों को मुख्य द्वार पर ही बैरिकेड लगाकर रोक दिया गया। कर्मचारियों को अंदर जाने की अनुमति न मिलने पर माहौल तनावपूर्ण हो गया और पटवारियों ने गेट के बाहर खड़े होकर शासन-प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
संघ के पदाधिकारियों ने इसे अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि पटवारी कलेक्ट्रेट और राजस्व प्रशासन का अभिन्न अंग हैं, इसके बावजूद उनके साथ ऐसा व्यवहार किया जा रहा है मानो शासन को अपने ही कर्मचारियों से खतरा हो।
राजस्व कार्य पूरी तरह ठप, 15 नवंबर से धान खरीदी पर मंडराया संकट:
पटवारियों की इस अनिश्चितकालीन हड़ताल के कारण जिले भर में सीमांकन, नामांतरण, फौती, आय-जाति व निवास प्रमाण पत्र जैसे तमाम राजस्व कार्य पूरी तरह ठप पड़े हुए हैं, जिससे आम जनता और किसान रोजाना दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर हैं।

सबसे बड़ी चिंता आगामी 15 नवंबर से शुरू होने वाली समर्थन मूल्य पर धान खरीदी को लेकर खड़ी हो गई है। धान खरीदी की संपूर्ण प्रक्रिया में गिरदावरी सत्यापन, रकबा सुधार, किसान पंजीयन की जांच और विवादों के निपटारे में पटवारी की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में यदि पटवारियों की मांगों का शीघ्र समाधान नहीं निकाला गया, तो बिना पटवारियों के धान खरीदी व्यवस्था में भारी अव्यवस्था और किसानों को गंभीर दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।
पटवारियों की प्रमुख 4 सूत्रीय मांगें:
1. राजस्व निरीक्षक (RI) पद पर विभागीय पदोन्नति:
2. वेतन विसंगति का त्वरित निराकरण:
3. पी.वी. (PV) ऐप का बहिष्कार व तकनीकी सुधार:
4. दमनात्मक कार्रवाइयों को तत्काल निरस्त करना:
मांग पूरी होने तक आंदोलन जारी रखने की चेतावनी:
जिला अध्यक्ष कमलेश डहरे, उपाध्यक्ष राकेश व सुनील पटेल और जिला सचिव दिनेश कुमार प्रधान ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि शासन ने समय रहते उनकी जायज मांगों का निराकरण नहीं किया, तो यह आंदोलन और उग्र होगा, जिससे धान खरीदी सहित आम जनता को होने वाली परेशानियों की पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।







