रायपुर। छत्तीसगढ़ में सशस्त्र नक्सलवाद के खात्मे के बाद अब नेताओं की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की जा रही है। इसी कड़ी में बस्तर संभाग के भाजपा और कांग्रेस से जुड़े 116 नेताओं की सुरक्षा श्रेणी में कटौती किए जाने की जानकारी सामने आई है। बताया जा रहा है कि कई नेताओं की सुरक्षा Z+ से Z, Y+ से Y और Z से Y श्रेणी में कर दी गई है। हालांकि, इस संबंध में विस्तृत आधिकारिक आदेश जारी होना अभी बाकी बताया जा रहा है।
केदार कश्यप, दीपक बैज समेत नौ नेताओं की सुरक्षा श्रेणी बदली
मिली जानकारी के अनुसार, भाजपा और कांग्रेस के नौ नेताओं की सुरक्षा Z+ श्रेणी से घटाकर Z श्रेणी की गई है। इनमें छत्तीसगढ़ सरकार के कैबिनेट मंत्री केदार कश्यप, पूर्व मंत्री महेश गागड़ा, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज और पूर्व मंत्री कवासी लखमा के नाम शामिल हैं। इसके अलावा बस्तर के कर्मा परिवार को उपलब्ध कराई जा रही सुरक्षा व्यवस्था में भी बदलाव किए जाने की जानकारी सामने आई है।
बस्तर संभाग के सांसदों, विधायकों और पूर्व मंत्रियों की सुरक्षा की भी समीक्षा की गई है। सुरक्षा श्रेणी में यह बदलाव नेताओं को वर्तमान में मौजूद खतरे के आकलन और क्षेत्र में बदली परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए किए जाने की बात कही जा रही है।
छह महीने की समीक्षा के बाद लिया गया फैसला
इस मामले में छत्तीसगढ़ के उप मुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा ने बताया कि मार्च 2026 की निर्धारित समय-सीमा के अनुसार छत्तीसगढ़ सहित पूरे देश से सशस्त्र नक्सलवाद समाप्त करने का लक्ष्य हासिल किया गया। इसके बाद नेताओं की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा के लिए छह महीने तक कमेटी ने आकलन किया।
विजय शर्मा के अनुसार, नक्सलवाद समाप्त होने के बाद सुरक्षा व्यवस्था में बदलाव जरूरी है, लेकिन किसी व्यक्ति की सुरक्षा पूरी तरह हटा देना भी उचित नहीं है। इसी आधार पर सुरक्षा श्रेणी में एक स्तर की कटौती की गई है।
उन्होंने बताया कि Z+ श्रेणी को Z, Y+ को Y और Z श्रेणी को Y में बदला गया है। आने वाले छह महीनों में भी सुरक्षा की समीक्षा की जाएगी और खतरे के आकलन के आधार पर आगे निर्णय लिया जाएगा। यानी सुरक्षा व्यवस्था में बदलाव की प्रक्रिया आगे भी जारी रह सकती है।
क्या होती है Z+ और Z श्रेणी की सुरक्षा?
Z+ श्रेणी की सुरक्षा: यह उच्चतम स्तर की सुरक्षा व्यवस्थाओं में से एक है। इसमें सुरक्षा प्राप्त व्यक्ति के खतरे के आकलन के अनुसार बड़ी संख्या में सुरक्षाकर्मी, प्रशिक्षित कमांडो, एस्कॉर्ट वाहन और बहुस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था शामिल हो सकती है। सुरक्षाकर्मियों की वास्तविक संख्या और तैनाती व्यक्ति की सुरक्षा संबंधी जरूरतों के आधार पर अलग-अलग हो सकती है।
Z श्रेणी की सुरक्षा: यह भी एक उच्चस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था है। इसमें खतरे के आकलन के अनुसार पुलिसकर्मी, प्रशिक्षित सुरक्षा कर्मी, एस्कॉर्ट और आवश्यकतानुसार अन्य सुरक्षा इंतजाम किए जाते हैं। इसकी तैनाती भी संबंधित व्यक्ति को उपलब्ध कराए गए सुरक्षा प्रोटोकॉल पर निर्भर करती है।
खतरे के आकलन के आधार पर तय होगी सुरक्षा
नेताओं की सुरक्षा श्रेणी में कटौती का उद्देश्य उपलब्ध सुरक्षा संसाधनों का जरूरत के अनुसार इस्तेमाल करना और मौजूदा खतरे के आधार पर व्यवस्था निर्धारित करना माना जा रहा है। हालांकि, किसी नेता की सुरक्षा में बदलाव का मतलब यह नहीं है कि उसकी सुरक्षा पूरी तरह समाप्त कर दी गई है।
फिलहाल, 116 नेताओं की सुरक्षा श्रेणी में बदलाव से संबंधित विस्तृत आधिकारिक आदेश जारी होने के बाद ही सभी नामों और उनकी संशोधित सुरक्षा व्यवस्था की पूरी स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।







