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जयपुर में बाहनाकाड़ी के युवा जागृति पंथी नृत्य दल ने बिखेरी छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक छटा

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-जवाहर कला केंद्र के शिल्पग्राम में गुरु घासीदास बाबा के संदेशों पर आधारित पंथी नृत्य की शानदार प्रस्तुति, कलाकारों ने बढ़ाया प्रदेश का मान

आरंग –

छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोककला और सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय मंच पर गौरवान्वित करते हुए आरंग क्षेत्र के ग्राम बाहनाकाड़ी के युवा जागृति पंथी नृत्य दल ने राजस्थान की राजधानी जयपुर स्थित जवाहर कला केंद्र के शिल्पग्राम (कलाग्राम) में शानदार प्रस्तुति दी। 27 अक्टूबर से 6 नवंबर तक आयोजित 11 दिवसीय राष्ट्रीय सांस्कृतिक उत्सव में दल के कलाकारों ने बाबा गुरु घासीदास जी के संदेशों पर आधारित पारंपरिक पंथी नृत्य प्रस्तुत कर दर्शकों का मन मोह लिया।

पारंपरिक सफेद वेशभूषा और पैरों में घुंघरू बांधे कलाकारों ने मांदर और झांझ की थाप पर पंथी नृत्य की मनमोहक प्रस्तुति दी। नृत्य के दौरान कलाकारों द्वारा बनाए गए हैरतअंगेज पिरामिड, शानदार शारीरिक संतुलन और अद्भुत तालमेल ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। प्रस्तुति के दौरान पूरा परिसर तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।

15 कलाकारों ने दी शानदार प्रस्तुति

दल के मुख्य संचालक वेदप्रकाश माहेश्वरी ने कहा कि राष्ट्रीय स्तर के इस मंच पर छत्तीसगढ़ की लोककला, संस्कृति और सतनाम परंपरा को प्रस्तुत करना गौरव का विषय है। इस आयोजन के माध्यम से प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान को देश के अन्य हिस्सों तक पहुंचाने का अवसर मिला है।

दल के सभी 15 कलाकारों ने अपनी प्रतिभा, अनुशासन और सामूहिक समर्पण का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। इनमें वेदप्रकाश माहेश्वरी, गोकुल टोडर, रणवीर कुठे, संतोष कोसले, गणेश कोसले, संजय कोसले, चरणदास कोसले, लेखराम नारंग, सूरज मारकंडे, परमेश्वर भारती, किशन कुर्रे, दौलाल कुर्रे तथा देव कुमार कोसले सहित अन्य युवा कलाकार शामिल रहे।

समाज एवं जनप्रतिनिधियों ने दी बधाई

ग्राम बाहनाकाड़ी के पंथी नृत्य दल की इस उपलब्धि पर छत्तीसगढ़ शासन के संस्कृति विभाग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों, आदर्श ग्राम पंचायत बाहनाकाड़ी के सरपंच अशोक बंजारे, सचिन धर्म बंजारे, युवा नेता राजेंद्र माहेश्वरी, प्रगति सिंह, छत्तीसगढ़ सतनामी समाज युवा प्रकोष्ठ के अध्यक्ष प्रदीप सारंगी, दिनेश बंजारे, अश्वनी बबलू एवं त्रिवेंद्र सहित समाज के अनेक लोगों ने कलाकारों को बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।

वहीं, छत्तीसगढ़ के सतनामी समाज के प्रथम पद्मश्री सम्मानित डॉ. आर.एस. बारले तथा राष्ट्रीय पुरस्कार उस्ताद बिस्मिल्लाह खान सम्मान से सम्मानित दिनेश जांगड़े ने भी दल के कलाकारों को शुभकामनाएं प्रेषित कीं।

ग्राम बाहनाकाड़ी के युवा कलाकारों की इस उपलब्धि को छत्तीसगढ़ की लोककला, संस्कृति और गुरु घासीदास बाबा के विचारों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। दल की इस प्रस्तुति से क्षेत्रवासियों एवं सतनामी समाज में हर्ष का माहौल है।

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