संवाददाता – राजेन्द्र जायसवाल
भौतिक सत्यापन के साथ पारदर्शिता, गुणवत्ता और जवाबदेही के मानकों की हो रही गहन समीक्षा
सक्ती, 03 नवम्बर 2026// राज्य कार्यालय के दिशा-निर्देश एवं जिला प्रशासन के आदेशानुसार जिले की कुल 321 ग्राम पंचायतों में माह अक्टूबर 2026 तक 200 ग्राम पंचायतों में सामाजिक अंकेक्षण पूर्ण किया जा चुका है। वित्तीय वर्ष 2026-27 में शत-प्रतिशत सामाजिक अंकेक्षण पूर्ण करने के लक्ष्य के साथ द्वितीय चरण के सामाजिक अंकेक्षण हेतु कार्ययोजना तैयार की गई है। ग्राम पंचायतों में सामाजिक अंकेक्षण की प्रक्रिया लगातार जारी है। सामाजिक अंकेक्षण दलों द्वारा पंचायतों में संचालित विभिन्न योजनाओं एवं कराए गए विकास कार्यों का व्यापक भौतिक सत्यापन किया जा रहा है। कार्यों की वास्तविक स्थिति, गुणवत्ता, हितग्राहियों को प्राप्त लाभ तथा अभिलेखों में दर्ज जानकारी का स्थल स्तर पर मिलान कर वस्तुस्थिति का परीक्षण किया जा रहा है। सामाजिक अंकेक्षण के दौरान केवल कार्यों की भौतिक स्थिति की जांच तक सीमित न रहते हुए पारदर्शिता एवं जवाबदेही सुनिश्चित करने वाले विभिन्न माध्यमों का भी गहन परीक्षण किया जा रहा है। दीवार लेखन, सूचना प्रदर्शन, मस्टररोल, भुगतान संबंधी अभिलेख, कार्यस्थल से संबंधित जानकारी तथा हितग्राहियों को उपलब्ध कराई जा रही सूचनाओं की भी जांच की जा रही है। सामाजिक अंकेक्षण दल द्वारा ग्रामीणों एवं हितग्राहियों से प्रत्यक्ष संवाद कर योजनाओं के क्रियान्वयन की वास्तविक स्थिति की जानकारी ली जा रही है। इस दौरान अभिलेखों में दर्ज जानकारी और जमीनी स्थिति का मिलान करते हुए आवश्यक बिंदुओं को चिह्नित किया जा रहा है, ताकि योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता के साथ सुधार सुनिश्चित किया जा सके।
सामाजिक अंकेक्षण में जनभागीदारी बढ़ाने पर जोर

समस्त ब्लॉक सामाजिक अंकेक्षण प्रदाता एवं ग्रामीण स्रोत व्यक्तियों की जिला स्तर पर सामूहिक समीक्षा उपरांत प्रभारी जिला सामाजिक अंकेक्षण प्रदाता द्वारा बताया गया कि सामाजिक अंकेक्षण को पारदर्शिता एवं जवाबदेही के साथ संपादित किए जाने के निर्देश हैं। प्रभारी जिला सामाजिक अंकेक्षण प्रदाता श्री अनिल कुमार साहू द्वारा लगातार मार्गदर्शन एवं आवश्यक दिशा-निर्देश दिए जा रहे हैं। उनके द्वारा विशेष रूप से ग्रामसभाओं सहित सामाजिक अंकेक्षण की प्रत्येक गतिविधि में अधिकाधिक जनभागीदारी सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया है। उन्होंने बताया कि ग्रामीणों की सक्रिय भागीदारी से सामाजिक अंकेक्षण की प्रक्रिया और अधिक प्रभावी बनती है। ग्रामीणों को योजनाओं के क्रियान्वयन, कार्यों की गुणवत्ता एवं उन्हें प्राप्त सुविधाओं की जानकारी देने के साथ उनकी शिकायतों, सुझावों एवं आपत्तियों को ग्रामसभा के माध्यम से सामने लाने का अवसर दिया जा रहा है। सामाजिक अंकेक्षण की यह प्रक्रिया ग्रामीणों को योजनाओं की निगरानी में सहभागी बनाने के साथ पंचायत स्तर पर पारदर्शिता, जवाबदेही और कार्यों की गुणवत्ता को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल साबित हो रही है।







